• संवाददाता

राफेल का मुद्दा चुनावी मौसम में फिर गरमाया


नई दिल्ली चुनावी मौसम में राफेल का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पहले चरण के मतदान से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार को लीक दस्तावेजों को आधार बनाने की अनुमति देने और केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज करने के बाद राफेल पर सियासत तेज हो गई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि डील में करप्शन हुआ। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती भी दे डाली। कुछ देर बाद बीजेपी की वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस प्रेजिडेंट जो कह रहे हैं, यह बात सुप्रीम कोर्ट ने कहां कही है? रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मुझे कोई बताए कि क्या सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कोई बात हुई है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो खुद जमानत पर हैं, उन्हें कोर्ट के फैसले की गलत जानकारी देने का अधिकार किसने दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जो कह रहे हैं ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने कुछ भी नहीं कहा है। बीजेपी नेता ने कहा, 'कांग्रेस प्रेजिडेंट ने शायद आधा पैराग्राफ भी नहीं पढ़ा लेकिन वह कह रहे हैं कि कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और यह भी कह रहे हैं कि कोर्ट ने कहा है 'चौकीदार चोर है', यह अदालत की अवमानना है।' बीजेपी नेता ने कहा कि कोर्ट को हर एक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं और जो मांगे जाएंगे, आगे दिए भी जाएंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अग्रीमेंट के तहत सितंबर 2019 में राफेल आ रहा है। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि बड़े दस्तावेज का एक हिस्सा लेकर लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पीएम को बहस के लिए बुलाने से पहले झूठ बोलना बंद करें। इससे पहले कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कोर्ट के बुधवार के आदेश को न्याय की दिशा में पहला कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्याय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच से होगा। उन्होंने कहा, 'राफेल की चोरी की परतें खुलती जा रही हैं। मोदी जी के झूठ का किला ध्वस्त हो गया। कोर्ट के प्राथमिक निर्णय ने मोदी के चेहरे से झूठ के लबादे को निकाल कर फेंक दिया है।' केंद्र को झटका देते हुए सु्प्रीम कोर्ट ने बुधवार को राफेल मामले में अपने फैसले पर पुनर्विचार के लिए लीक दस्तावेजों को आधार बनाने की अनुमति दे दी और उन दस्तावेजों पर ‘विशेषाधिकार’ होने की केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया। फैसले में इस बात को भी साफ किया गया है कि पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ न सिर्फ विमानों की कीमत के मुद्दे बल्कि राफेल का निर्माण करने वाली कंपनी दसॉ के भारतीय ऑफसेट पार्टनर के चयन के मुद्दे की भी पड़ताल करेगी। इससे पहले केंद्र ने कहा था कि विशेषाधिकार वाले दस्तावेज याचिकाकर्ताओं ने अवैध तरीके से हासिल किए और शीर्ष अदालत के 14 दिसंबर 2018 के फैसले के खिलाफ दायर अपनी पुनर्विचार याचिकाओं के समर्थन में उनका इस्तेमाल किया। कोर्ट ने अपने उस फैसले में फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसफ ने कहा, ‘हम पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करने पर सवाल उठाने वाली केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज करते हैं।’


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