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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बोले, बेगूसराय से लड़ेंगे गिरिराज


पटना बिहार में बेगूसराय लोकसभा सीट खासी चर्चा में है। यहां से बीजेपी ने गिरिराज सिंह को मैदान में उतारा है। हालांकि गिरिराज इस सीट से लड़ने के इच्छुक नहीं बताए जा रहे थे। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि गिरिराज सिंह बेगूसराय लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि गिरिराज सिंह नवादा सीट से चुनाव लड़ना चाह रहे थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह इसी सीट से जीते थे। हालांकि गठबंधन के तहत बीजेपी ने यह सीट जेडीयू को दी है। बेगूसराय सीट पर इस बार दिलचस्प चुनावी जंग देखने को मिल सकती है। भूमिहार बहुल इस सीट पर सीपीआई ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को उतारा है। बेगूसराय से टिकट मिलने पर खुलेआम नाराजगी जताने वाले गिरिराज सिंह ने रविवार को कहा, 'मुझसे बिना पूछे, बिना सलाह-मशविरा किए ही सीट बदल दी गई। पार्टी ने सीट बदलने से पहले मुझे विश्वास में नहीं लिया, इससे मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। बिहार में किसी सांसद या मंत्री की सीट नहीं बदली गई, लेकिन मेरे साथ ऐसा क्यों किया गया। मैं इससे दुखी हूं।' 2019 में आजाद भारत के 17वें लोकसभा चुनाव होने हैं। पिछले 16 लोकसभा चुनावों में देश के साथ-साथ हमारी संसद में भी काफी बदलाव आए हैं। लोकसभा की बात करें तो कुछ मायनों में स्थिति सुधरी लेकिन कुछ में हालात और बेहतर होने की उम्मीद की जा सकती है। अब लोकसभा में पहले के मुकाबले ज्यादा पढ़े लिखे लोग हैं, लेकिन दूसरी तरफ यह बात परेशान करती है कि फिर भी काम के घंटे कम हुए हैं और महिलाओं की भागीदारी भी उतनी तेजी से नहीं बढ़ी है। चलिए अबतक आए प्रमुख परिवर्तनों पर नजर डालते हैं 1951 की लोकसभा में औसत उम्र 46.5 साल थी जो 16वीं लोकसभा में 56 साल तक पहुंच गई। यह दूसरा सबसे उम्रदराज सदन रहा। 2009 में हमारे 43 प्रतिशत सांसद 56 या उससे ज्यादा उम्र के थे। उस वक्त औसत उम्र 57.9 थी। वहीं पहली लोकसभा में कोई भी सांसद 70 के पार नहीं था। लेकिन 2014 में यह 7% पर आ गया। 40 साल से नीचे के सांसद भी पहली लोकसभा के मुकाबले 26 प्रतिशत कम हुए। लोकसभा में पढ़ाई का स्तर पहले से बढ़ा है। 1952 में 23 प्रतिशत सांसद ऐसे थे जिन्होंने 10 तक भी पढ़ाई नहीं की थी। वहीं 16वीं लोकसभा में 75% सांसद ग्रेजुएट थे। सिर्फ 13 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने मैट्रिक पास नहीं की है। 2014 के चुनाव में 62 महिलाएं (11.4%) लोकसभा पहुंची। यह आंकड़े पहली लोकसभा (24 महिलाएं) से बेहतर हैं, लेकिन फिर भी चिंताजनक हैं। पड़ोसी देश नेपाल (29.6), बांग्लादेश (20.3), पाकिस्तान (20.0) भी इस मामले में भारत से आगे हैं। 16वीं लोकसभा में कुल 1,615 घंटे काम हुआ। यह 15वीं लोकसभा के मुताबिक 20 प्रतिशत ज्यादा था लेकिन अगर अबतक लोकसभा में काम के कुल घंटों का औसत (2,689 घंटे) निकाला जाए तो यह 40 फीसदी कम है। लोकसभा की कार्यवाही कुल 331 दिन हुई जो कि पूर्णकालिक लोकसभाओं के औसत से 137 दिन कम है। बेगूसराय में 2014 के चुनाव में बीजेपी के भोला सिंह ने आरजेडी के तनवीर हसन को करीब 58 हजार वोटों से मात दी थी। बीजेपी के भोला सिंह को करीब 4.28 लाख वोट मिले थे, वहीं आरजेडी के तनवीर हसन को 3.70 लाख वोट मिले थे। सीपीआई के राजेंद्र प्रसाद सिंह 1,92,639 वोट पाकर तीसरे नंबर पर थे। बेगूसराय लोकसभा सीट पर भूमिहार मतदाताओं की तादाद सबसे अधिक करीब पौने पांच लाख है। यहां 2.5 लाख मुसलमान, कुशवाहा, कुर्मी करीब दो लाख और यादव मतदाताओं की संख्‍या करीब 1.5 लाख है। विवादों में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्‍हैया कुमार के सीपीआई से मैदान में उतरने के बाद यहां लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है। कन्‍हैया युवा हैं और गिरिराज की ही जाति भूमिहार से ताल्‍लुक रखते हैं। ऐसे में गिरिराज सिंह को डर सता रहा है कि अगर कन्‍हैया भूमिहार वोट काटते हैं, जिसकी संभावना प्रबल है तो उनकी हार हो जाएगी।


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