• संवाददाता

पर्रिकर के बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें विदा किया गया


पणजी गोवा के मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर का निधन रविवार को हुआ था। सोमवार को गोव के ही मीरामार बीच पर राजकीय सम्मान के साथ पर्रिकर का अंतिम संस्कार किया गया। पर्रिकर के शव पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उन्हें गन सल्यूट भी दिया गया। मनोहर पर्रिकर के बेटे ने उनको मुखाग्नि दी। मनोहर पर्रिकर को अंतिम विदाई देने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अध्यक्ष अमित शाह, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और कई अन्य नेता भी गोवा पहुंचे। लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे मनोहर पर्रिकर का निधन रविवार रात को गोवा में हुआ था। सोमवार को अंतिम दर्शन के लिए उनका शव कला अकैडमी रखा गया। जहां से मीरामार बीच तक पर्रिकर की आखिरी यात्रा निकाली गई। इस दौरान पर्रिकर के दोनों बेटे भी मौजद रहे। पीएम मोदी ने भी उनके दोनों बेटों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। जैसे ही उनकी चिता में आग लगाई गई पूरा मैदान 'भारत माता की जय' और 'मनोहर पर्रिकर अमर रहें' के नारों से गूंज उठा। मनोहर गोपालकृष्ण प्रभु पर्रिकर की जिंदगी 13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा एक मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू हुई। सामान्य परिवेश से निकलर उन्होंने आईआईटी मुंबई से शिक्षित होने से लेकर गोवा के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और फिर गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर आखिरी सांस ली। पर्रिकर की जिंदगी एक आम आदमी के पोस्टर बॉय बनने की कहानी की जबरदस्त मिसाल है। आगे की स्लाइड में देखें उनकी राजनीति और जिंदगी के चमकते और संघर्ष से सफलता तक की कहानी...गोवा के इस दिग्गज राजनेता को राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी सादगी और जीवट के लिए याद किया जाता है। कैंसर की दुर्गम लड़ाई से लड़ते हुए उन्होंने आखिरी सांस ली। जीवन के आखिरी वक्त तक वह सक्रिय रहे और कैंसर से लड़ते हुए मुख्यमंत्री के दायित्व निभाते रहे। गोवा की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पर्रिकर रक्षा मंत्री के तौर पर शामिल हुए। रक्षा मंत्री रहने के दौरान देश के दूर-दराज के इलाकों में भी लोग उनकी सादगी के कारण उन्हें बेहद पसंद करते थे। आधी बांह के ट्रेडमार्क शर्ट-पैंट, चश्मे और सिंपल घड़ी में नजर आनेवाले पर्रिकर की सादगी, लेकिन तकनीक और विज्ञान के लिए दिलचस्पी ने उन्हें देशभर के युवाओं का फैन बना दिया। मनोहर पर्रिकर की पत्नी की भी 2001 में कैंसर से लड़ते हुए मौत हो गई थी। उस वक्त पर्रिकर गोवा के सीएम भी थे। हालांकि, इस निजी त्रासदी से ऊबरकर न सिर्फ उन्होंने बतौर सीएम अपना दायित्व निभाया, बल्कि दोनों युवा बेटों की परवरिश भी शानदार तरीके से अकेले ही की। मनोहर पर्रिकर को देश में राजनीति के भविष्य के संकेतों को समझनेवाले के तौर पर भी देखा जाएगा। 2013 में पर्रिकर बीजेपी के पहले अग्रणी नेताओं में से थे जिन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी का नाम उस वक्त बीजेपी के पीएम कैंडिडेट के तौर पर आगे किया था। गोवा में बीजेपी की सत्ता में वापसी कराने और गठबंधन के साथ सरकार चलाने के लिए भी बीजेपी आलाकमान ने पर्रिकर पर ही भरोसा किया। 2017 में गोवा चुनाव के बाद बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, लेकिन पर्रिकर दिल्ली से गोवा पहुंचे और आखिरकार जोड़तोड़ के बाद सरकार बनाने में कामयाब रहे। प्रधानमंत्री मोदी जिन नेताओं पर खासा विश्वास करते थे, उनमें एक मनोहर पर्रिकर भी रहे। पर्रिकर और मोदी के बीच के रिश्तों का समीकरण इससे समझा जा सकता है कि पर्रिकर न सिर्फ उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने पीएम पद के लिए मोदी का नाम बढ़ाया था। वह लगातार राफेल डील को लेकर पीएम का बचाव करते रहे। मनोहर पर्रिकर के बारे में दिलचस्प बात है कि छात्र जीवन से संघ से जुड़े रहे और ईसाई बहुल राज्य गोवा के सीएम की कुर्सी तक पहुंचे। गोवा के लोगों के बीच पर्रिकर को 'मैन विद प्लान' के नाम से लोकप्रिय हुए। पर्रिकर जब प्रदेश के विपक्ष के नेता थे तो उनके भाषण न्यू गोवा के सपनों के साथ कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार पर कठोर तंज कसनेवाले थे। बतौर विपक्षी नेता उनके भाषणों में दूरदर्शिता और जोश था और इसने उन्हें प्रदेश में लोकप्रिय बनाया। सीएम बनने के बाद उन्होंने गोवा में फैले भ्रष्टाचार, अवैध माइनिंग के आरोप में कई कांग्रेसी नेताओं पर कार्रवाई की और इसने उन्हें जनता के बीच फैसले लेनेवाला सीएम के तौर पर स्थापित किया।


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