• संवाददाता

बिहार में 13 सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस करेगी बीजेपी, कैंडिडेट चुनना भी होगा चुनौती


नई दिल्ली बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की शनिवार को दिल्ली में लोकसभा चुनाव को लेकर अहम मीटिंग होने वाली है। इस दौरान बीजेपी के लिए बिहार में उम्मीदवारों का चयन भी बड़ी चुनौती होगी। पार्टी के ही आंतरिक सूत्रों का कहना है कि बीजेपी उन 13 सीटों पर लड़ने के लिए सहयोगियों पर दबाव बना सकती है, जिन पर पिछले चुनावों में उसकी स्थिति काफी बेहतर हुई है। यही नहीं इन सीटों पर कड़ी होड़ होने के चलते उम्मीदवारों का चयन भी कठिन होगा। 2014 में बीजेपी ने बिहार में 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 22 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि इस चुनाव में पार्टी ने अपने खाते में 17 सीटें रखी हैं और इतनी ही सीटें जेडीयू को दी हैं। इसके अलावा बाकी बची 6 सीटें एलजेपी को दी गई हैं। ऐसे में पार्टी के लिए अपने कई मौजूदा सांसदों को किनारे कर चुनाव लड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। ऐसे में बीजेपी के सामने दो विकल्प नजर आते हैं, पहला यह कि जीती हुई 17 सीटों को बरकरार रखना या फिर उन सीटों पर दांव लगाना, जहां वह पिछले कुछ चुनावों में बेहतर परफॉर्म करती रही है। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी उन सीटों पर उतरने का फैसला ले सकती है, जिन पर बीते तीन चुनावों में उसने सबसे ज्यादा मार्जिन से जीत हासिल की है। ऐसी कम से कम 13 सीटें हैं और बाकी 4 पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और एलजेपी से मशविरे के बाद फैसला होगा। बिहार में बीजेपी ने भले ही पिछले चुनाव में 22 पर जीत हासिल की थी, लेकिन 5 जीती हुई सीटें छोड़कर 17 पर ही लड़ने का फैसला लेकर उसने एक तरह से सहयोगियों के लिए बड़ा त्याग किया है। पिछली बार जीते 22 सांसदों में से 4 अब बीजेपी की लिस्ट से ही बाहर हैं। पटना से जीते शत्रुघ्न अब बागी हैं, दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, बेगूसराय के सांसद भोला सिंह का निधन हो चुका है और मधुबनी के हुकुमदेव नारायण सिंह पहले ही चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। इसके बाद भी पार्टी ऐसे कुछ सांसदों के टिकट काटने का विचार कर रही है, जिनके खिलाफ ऐंटी-इन्कम्बैंसी ज्यादा है। इसके अलावा बीजेपी को एलजेपी और जेडीयू के साथ कुछ सीटों का फेरबदल भी करना पड़ा सकता है, जिससे उसके सांसद नाराज हो सकते हैं।\ माना जा रहा है कि बीजेपी मौजूदा सांसदों वाली सीटों के बजाय उन पर लड़ने को अहमियत देगी, जहां वह बीते कई चुनावों से मजबूत स्थिति में रही है। 2004 और 2009 के आम चुनाव बीजेपी और जेडीयू ने साथ मिलकर लड़े थे। 2004 से 2014 तक लड़ी गई सीटों में से सबसे ज्यादा समर्थन वाली 13 सीटों पर बीजेपी लड़ने की योजना बना रही है। ये 13 सीटें हैं- पश्चिम चंपारण, पूर्व चंपारण, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, पटना साहिब, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बक्सर, नवादा और गया।


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