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लोकसभा चुनाव: कैंपेन के लिए बीजेपी, कांग्रेस और 'आप' को मिला लंबा टाइम


नई दिल्ली 17वीं लोकसभा की तारीखों का ऐलान हो चुका है। 7 चरणों में चुनाव संपन्न होंगे, जिसमें जिल्ली का नंबर छठे चरण यानी 12 मई को आएगा। दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों के लिए वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, तीनों पार्टियां कोशिश में जुटी हुई हैं। दिल्ली के 1.38 करोड़ वोटर तय करेंगे कि किस सीट से कौन लोकसभा तक पहुंचेगा। बीजेपी अपना 2014 का प्रदर्शन दोहराने की कोशिश कर रही है, जब उसने सातों सीटों पर अच्छे मार्जिन से जीत हसिल की थी, वहीं AAP ने भी कमर कस ली है क्योंकि 2020 की शुरुआत में दिल्ली विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं। लोकसभा चुनावों के नतीजे दिल्ली में आम आदमी पार्टी के भविष्य पर खासा असर डाल सकते हैं। कांग्रेस की बात करें तो 2013 और 2015 के विधानसभा चुनान और 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद दिल्ली की इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में वापसी के लिए उसके लिए 'करो या मरो' की स्थिति हो गई है। दिल्ली से कांग्रेस का न कोई सांसद है और न ही विधानसभा में कोई कांग्रेस सदस्य है। दिल्ली में बीजेपी को शिकस्त देने के लिए आम आदमी पार्टी की कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिशें छिपी नहीं हैं। आप को डर है कि अगर वह और कांग्रेस अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरते हैं तो ऐंटी-बीजेपी वोट बंट जाएंगे और आखिरकार बीजेपी को ही फायदा होगा। कांग्रेस और आप दोनों को अल्पसंख्यक, अनऑथराइज्ड कॉलोनियों और जेजे क्लस्टरों समेत समाज के अन्य वर्गों से वोट मिलने का भरोसा है। यही वह वोट बैंक है, जिसके कारण 2015 विधानसभा चुनाव में आप को जबर्दस्त जीत मिली थी। ऐसे में कांग्रेस और आप के अलग-अलग लड़ने पर वोट बंट जाएंगे और बीजेपी फायदे में रहेगी। 2014 आम चुनाव में जब मोदी लहर का असर दिखा तब दिल्ली में आप का वोट शेयर 33.1 फीसदी रहा और कांग्रेस का 15.1 फीसदी रहा था। दोनों को मिलाकर देखें तो बीजेपी के वोट शेयर से यह 2 फीसदी ऊपर रहा था। 2017 के निगम चुनाव की बात की जाए तो उस समय आप को 26 फीसदी और कांग्रेस को 21 फीसदी वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के पक्ष में 37 फीसदी मतदान हुआ था। 2015 के चुनाव के बाद से आप का वोट शेयर गट रहा है लेकिन कांग्रेस का लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि आप गठबंधन करना चाहती है। वह चाहती है कि कांग्रेस और वह मिलकर चुनाव लड़ें। हालांकि कांग्रेस ने आप के ऑफर को अब तक स्वीकार नहीं किया है। हाल में हुए विधानसभा चुनावों में जीत से कांग्रेस मे जोश है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की जीत और दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में शीला दीक्षित की वापसी को लेकर पार्टी खुश है। पार्टी की दिल्ली इकाई का मानना है कि आप के साथ आने पर पार्टी की छवि पर बुरा असर पड़ सकता है और कहीं न कहीं विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है। बहरहाल, दिल्ली में लोकसभा चुनाव 12 मई को हैं, जिसमें अभी एक महीना बाकी है। दोनों पार्टियों के पास गठबंधन की संभावनाओं पर विचार करने के लिए लंबा वक्त है। बार-बार ऐसी खबरें आ रही हैं कि दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता लगातार गठबंधन को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं। शनिवार को सोनिया गांधी और शीला दीक्षित के बीच हुई मुलाकात के बाद से इस बारे में और चर्चाएं होने लगी हैं।


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