• संवाददाता

पति की शहादत के बाद पहनी वर्दी


नई दिल्ली उनकी आंखों में भी एक परफेक्ट फैमिली के साथ खुशहाल जिंदगी जीने के सपने थे लेकिन उन्हें मिली अपने पति की शहादत की खबर। कोई आम औरत होती तो शायद टूट जाती लेकिन एक आर्मी अफसर की पत्नी किसी और ही मिट्टी की बनी होती है। ऐसी एक नहीं कई कहानियां हैं जिनमें पति की शहादत के बाद उनकी पत्नियों ने खुद हिम्मत दिखाकर वर्दी पहनी और एक साथ देश और परिवार दोनों के प्रति अपना कर्तव्य निभा रही हैं। हर साल शहीद फौजियों की पत्नियां फौज में शामिल हो रही हैं और दिखा रही हैं कि वे कुछ भी कर सकती हैं। हाल में गौरी महादिक ने एसएसबी की तरफ से शहीदों की विधवाओं के लिए आयोजित होने वाली विशेष परीक्षा में टॉप रैंक हासिल किया है। वह अब सेना में अफसर बनेंगी। गौरी के पति मेजर प्रसाद दिसंबर 2017 में उग्रवादियों के हमले में शहीद हुए। गौरी कहती हैं कि 'मेरे पति हमेशा मुझे खुश और हंसता हुआ देखना चाहते थे। मैं उनके लिए कुछ करना चाहती थी और इसी वजह से मैंने आर्मी में जाना चुना।' गौरी अब सेना की वर्दी पहनकर देश का झंडा बुलंद करने के लिए तैयार हैं। गौरी ने बताया, 'पति की शहादत के 10 दिनों के बाद मैं सोच रही थी कि अब क्या करूं। फिर मैंने प्रसाद के लिए कुछ करने को सोचा और सेना जॉइन करने को ही अपना लक्ष्य बना लिया।' गौरी ने कहा कि मैंने यह तय कर लिया था कि पति की ही यूनिफॉर्म और स्टार्स को पहनूंगी। यह अब हम दोनों का यूनिफॉर्म होगा। गौरी अब चेन्नै की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी में ट्रेनिंग के बाद अगले साल आर्मी में बतौर लेफ्टिनेंट जॉइन करेंगी। मेजर प्रसाद महादिक और गौरी की शादी को दो साल हुए थे, जब वह शहीद हो गए। कैप्टन शालिनी सिंह (रिटायर्ड) बताती हैं कि उनकी 19 साल में शादी हो गई थी। उन्होंने बताया, 'मैं इसलिए बेहद खुश थी क्योंकि मैं ज्यादा महत्वाकांक्षी नहीं थी और बस शादी करके सेटल होना चाहती थी। एक हैंडसम आर्मी ऑफिसर से शादी हो रही थी तो मुझे और कुछ नहीं चाहिए था।' वह कहती हैं कि 2001 की वह सुबह मुझे आज भी याद है जब मेरा दो साल का बेटा मेरी गोद में था और मुझे कहा गया कि मुझे लखनऊ जाना है अपने पति से मिलने। मुझे तब बताया गया कि वह घायल हैं लेकिन जब मैं वहां पहुंची तो मैं एक कॉफिन के सामने थी। वह दो दिन पहले ही शहीद हो गए थे। तब मेरे सामने सवाल था कि मैं कैसे सर्वाइव करूंगी। सोचा खुद को खत्म कर लूं और इसकी कोशिश भी की लेकिन तब लगा कि जिंदगी से हारना और खत्म करना जिंदगी जीने से कहीं ज्यादा मुश्किल हैं। तब मैंने तय किया कि मैं खुद वर्दी पहनूंगी। शालिनी बताती हैं कि किस तरह पति की शहादत के तीन महीने पर उस एग्जाम में बैठीं जो सबसे टफ एग्जाम माना जाता है। उन्होंने एग्जाम पास किया और अकैडमी पहुंचीं। वह याद करती हैं कि किस तरह अकैडमी में दिन में पसीने से तर रहती थीं और रात को आंसुओं से, लेकिन हिम्मत नहीं हारीं। उन्होंने कहा, वहां हमें साबित करना होता है कि हम यूनिफॉर्म के काबिल हैं। वह कहती हैं कि तब मोबाइल फोन भी नहीं थे और मैं अपने दो साल के बेटे को पीछे छोड़कर आई थी। पति की शहादत के एक साल बाद मैं खुद आर्मी ऑफिसर बन गई थी और पति की देश के प्रति जिम्मेदारी को आगे बढ़ा रही थी। वह कहती हैं कि जिंदगी हर कदम पर चुनौती देती है लेकिन हमें उस चुनौती के लिए खुद को फिट रखना होता है और उस चुनौती से पार पाते हुए जिंदगी को चुनना होता है। शालिनी ने कहा, 'पहले जहां मैं पिता, पति या बेटे से बाहर अपना अस्तित्व ही नहीं देखती थी वहीं फिर चुनौतियों से निपटते हुए मैंने सीखा कि किस तरह अपनी जिंदगी जीनी है। लोग क्या कह रहे हैं उसकी परवाह किए बिना अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीती हूं।' वह कहती हैं, लड़ाई हर रोज लड़नी होती है और हर रोज जीतने की कोशिश मैं करती हूं। शालिनी 2017 में मिसेज इंडिया भी बनीं।


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