• संवाददाता

पाक से वापस लिया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा


नई दिल्ली पुलवामा में सीआरपीफ पर आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक वार के साथ ही कारोबारी झटका देते हुए उससे 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा वापस ले लिया है। आखिर यह एमएफएन का दर्जा होता क्या है और इसे वापस लिए जाने से पाकिस्तान पर क्या हो सकता है असर। आइए जानते हैं ऐसे ही कई अहम सवालों के जवाब...वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन में शामिल वे देश जो उसके जनरल अग्रीमेंट ऑन टैरिफ्स ऐंड ट्रेड का हिस्सा हैं, एक दूसरे को कस्टम ड्यूटी में राहत के लिहाज से यह दर्जा देते हैं। इस शब्दावली से ऐसा लगता है कि जैसे यह दर्जा मित्र देशों को दिया जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से कारोबार से जुड़ा मसला है और इसका आपसी संबंधों से कोई लेना-देना नहीं है। निश्चित तौर पर मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस लिए जाने से पाकिस्तान को थोड़ा झटका लगेगा। इस स्टेटस को वापस लिए जाने का अर्थ यह है कि पाक से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी को भारत अब किसी भी स्तर तक बढ़ा सकता है। पाकिस्तान से भारत सीमेंट, लेदर, केमिकल्स, फलों और मसालों का आयात करता है। हालांकि भारत यदि पाकिस्तान से आने वाले सामानों पर बहुत अधिक ड्यूटी लगाता है, तब भी उस पर ज्यादा असर नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि दोनों देशों के बीच कारोबार ही काफी कम है। भारत और पाक के बीच 37 अरब डॉलर तक के कारोबार की क्षमता है, लेकिन दोनों देशों के बीच सिर्फ 2 अरब डॉलर का ही व्यापार है। भारत के इस ऐक्शन के जवाब में पाकिस्तान के पास करने के लिए बहुत कुछ नहीं है। इसकी वजह यह है कि पाक ने भारत को कभी मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा ही नहीं दिया। पाकिस्तान ने 1,209 आइटम्स के भारत से आयात पर पहले ही रोक लगा रखी है। अटारी-वाघा रूट के जरिए सिर्फ 138 चीजें ही भारत से पाक तक जाती हैं। मुख्य तौर पर भारत पाकिस्तान को कॉटन, डाई, केमिकल्स, सब्जियां, लोहा और इस्पात का आयात करता है।


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