• संवाददाता

मुलायम के मोदी को आशीर्वाद देने से अखिलेश की बढ़ेगी टेंशन ?


लखनऊ ऐसे समय में जब पूरा विपक्ष संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर था, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को खुलेआम मोदी के फिर पीएम बनने की कामना कर दी। 16वीं लोकसभा के संसद सत्र के आखिरी दिन मुलायम के इस बयान ने साफ गया कि उन्हें 'किंग ऑफ यू-टर्न' ऐसे ही नहीं कहा जाता है। इस प्रकरण के बाद विपक्ष में भी खलबली बढ़ गई है। आपको बता दें कि एसपी नेता मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा था कि मोदी ने सबके साथ मिलकर काम किया है और वह उनके फिर से प्रधानमंत्री बनने की कामना करते हैं। संसद के बजट सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने से पहले दलों के नेताओं के पारंपरिक संबोधन के दौरान मुलायम सिंह यादव ने यह भी कहा कि हमारी कामना है कि जितने सदस्य इस सदन में हैं, सबके सब एक बार फिर लौटकर आएं। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर खुशी जताई। मुलायम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सबके साथ मिलजुलकर काम किया है। सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को हमारी बधाई है और हमारी कामना है कि वह फिर से प्रधानमंत्री बनें। गौर करने वाली बात यह है कि मुलायम ने ये बातें एक से ज्यादा बार कहीं और इस दौरान सदन में उपस्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। पहलवान से नेता बने मुलायम के यह दांव चलने के बाद अब बीएसपी चीफ मायावती के अगले कदम को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है। इतना ही नहीं, एसपी के मुस्लिम मतदाताओं का रिऐक्शन क्या होगा, यह भी देखना काफी दिलचस्प होगा। गौरतलब है कि यादव के बाद मुस्लिम एसपी के कोर वोटबैंक माने जाते हैं। कांग्रेस से लेकर कम्युनिस्टों तक को अपने दांव से चित करने वाले मुलायम सिंह यादव के निशाने पर इस बार कोई और नहीं बल्कि उनके अपने बेटे और पार्टी चीफ अखिलेश यादव हैं। अखिलेश ने मोदी के खिलाफ 2019 में बड़ी राजनीतिक ताकत बनाने के लिए धुर विरोधी बीएसपी के साथ 25 साल पुरानी दुश्मनी भूलकर दोस्ती कर ली। हालांकि सार्वजनिक रूप से मुलायम के मोदी की तारीफ करने के बाद एसपी काडर पूरी तरह से कन्फ्यूज हो गया है। माना जा रहा है कि मुलायम द्वारा मोदी को सपॉर्ट किए जाने से मोदी और 'सांप्रदायिक ताकतों' के खिलाफ अखिलेश का कैंपेन कमजोर पड़ेगा और लखनऊ से लेकर कोलकाता तक एसपी के पार्टनरों के बीच एक संदेह पैदा होगा। मुलायम लोकसभा में मुस्कुराते हुए मोदी की तारीफ करते नहीं थके। उन्होंने कहा, 'जब भी मैंने कुछ काम कहा, उन्होंने (मोदी) तुरंत कर दिया।' मुलायम का बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक मतभेद 90 के दशक से रहा है लेकिन इनदिनों उनकी बीजेपी के नेताओं से नजदीकियां बढ़ी हैं। उन्होंने तेज प्रताप यादव की शादी में पीएम मोदी को भी आमंत्रित किया था लेकिन 17 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में और भी दिलचस्प नजारा देखने को मिला। दरअसल, मुलायम ऑडियंस में बैठे थे कि तभी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह वहां पहुंचे और उनका हाथ पकड़कर स्टेज पर ले आए। इसके बाद से मोदी पर मुलायम भी 'मुलायम' हो गए। उन्होंने मोदी के फैसलों की तारीफ भी की फिलहाल अखिलेश के सामने धर्मसंकट की स्थिति बन गई है। अगर वह अपने पिता के खिलाफ बोलते हैं तो मजाक उड़ाया जाएगा और अगर वह नहीं बोलते हैं तो पार्टी के तमाम नेताओं और कोर मुस्लिम वोटर्स में भ्रम की स्थिति बन जाएगी। आपको बता दें कि यू-टर्न लेने के कारण ही एक बार CPM नेता प्रकाश करात ने मुलायम को 'भारतीय राजनीति का सबसे अविश्वसनीय नेता' कहा था।


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