• संवाददाता

भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर बढ़ सकता है तनाव


नई दिल्ली पाकिस्तान की वाणिज्यिक राजधानी कराची के पास महिलाओं और बच्चों को हर रोज पानी की तलाश में मीलों पैदल चलना पड़ता है। यह एक शहर या गांव की बात नहीं है, ऐसी ही तस्वीर पाकिस्तान के कई इलाकों में दिखाई देती है। सीमा के इस पार भारत में भी सरकारी रिसर्च से पता चला हैं कि तीन-चौथाई लोगों के पास घर पर पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है और देश का 70 फीसदी पानी प्रदूषित हो चुका है। नदियां सूख रही हैं, ऐसे में कट्टर प्रतिद्वंद्वी परमाणु शक्ति संपन्न भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर विवाद गहरा सकता है। दोनों देशों के बीच पिछले 71 वर्षों में तीन बड़े युद्ध लड़े जा चुके हैं। ब्लूमबर्ग ने विस्तार से इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। दोनों देश लगातार एक दूसरे पर सिंधु जल संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं। आपको बता दें कि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच जल पर एक समझौता हुआ था। इसे ही 1960 की सिंधु जल संधि कहते हैं। ताजा विवाद पनबिजली परियोजनाओं को लेकर है, जिसको लेकर भारत चिनाब नदी पर काम कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि यह संधि का उल्लंघन है और इससे पानी की आपूर्ति पर असर पड़ेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कल ही जांच अधिकारियों की एक टीम साइट पर भेज रहे हैं। इधर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्माण कार्य के जारी रहने की प्रतिबद्धता जताई है। अगले कुछ महीनों में चुनाव हैं और ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि गतिरोध का समाधान कैसे निकलेगा।

'संधि के कारण अब तक पानी को लेकर नहीं हुई जंग' ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन में वूड्रो विल्सन सेंटर में साउथ एशिया मामलों के सीनियर असोसिएट माइकल कुगेलमैन ने ईमेल से भेजे जवाब में कहा, 'पानी को लेकर तनाव बेशक बढ़ेगा और ऐसे में सिंधु जल संधि का यह सबसे बड़ा टेस्ट भी साबित होगा। इसी संधि के कारण अब तक दोनों देशों ने पानी को लेकर कोई जंग नहीं लड़ी है।' उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पानी जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को लेकर हालात बिगड़ने के बाद दक्षिण एशिया ही नहीं पूरी दुनिया पर असर पड़ सकता है। फिलहाल भारत और पाकिस्तान के रिश्ते स्थिर हैं और कुछ हद तक सकारात्मक भी दिख रहे हैं। छह महीने पहले पाकिस्तान की सत्ता पर काबिज हुए इमरान खान ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने की बात कही है। इमरान ने यह भी कहा है कि देश की शक्तिशाली सेना भी उनके इन प्रयासों के साथ है। हालांकि भारत को इस पर संदेह है।

2 बांध बनाने के लिए मदद मांग रहे इमरान इस विवाद से इतर इमरान खान खुद दो बड़े बांध बनाने के लिए 17 अरब डॉलर जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें से एक बांध पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बनाने की योजना है, जिसे भारत अपना क्षेत्र बताता है। ऐसे क्षेत्र में जहां दुनिया की एक चौथाई आबादी रहती है, अगर पानी की कमी का प्रबंधन करने में सरकारें असफल रहती हैं तो इसके खतरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं। पानी के मसले पर चर्चा के दौरान पिछले साल पाकिस्तानी फौज के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने पत्रकारों से कहा था, 'भविष्य में होने वाली जंग इन्हीं मुद्दों पर लड़ी जाएगी। हमें इस ओर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।' सितंबर 2016 में भारतीय सेना के कैंप पर आतंकी हमले के बाद से ही जल संधि को चुनौती मिलने लगी थी, उसी समय पीएम मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं और उन्होंने संधि की समीक्षा करने की बात कही थी। स्वीडन की उप्सला यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनैशनल वॉटर कोऑपरेशन के प्रफेसर अशोक स्वैन ने कहा, 'अगर नरेंद्र मोदी दोबारा चुने जाते हैं तो इस बात की संभावना है कि वह पाकिस्तान को घुटनों पर लाने के लिए पानी को टूल के तौर पर इस्तेमाल करेंगे। हालांकि वह सत्ता संभालने के फौरन बाद ऐसा नहीं करेंगे लेकिन अगर पाकिस्तान के साथ संबंध खराब हुए तो 2020-21 में इसकी संभावना है।'

क्या है सिंधु जल संधि संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे। 12 जनवरी 1961 से संधि की शर्तें लागू कर दी गईं थीं। संधि के तहत 6 नदियों के पानी का बंटवारा तय हुआ, जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं। 3 पूर्वी नदियों (रावी, व्यास और सतलज) के पानी पर भारत का पूरा हक दिया गया। बाकी 3 पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) के पानी के बहाव को बिना बाधा पाकिस्तान को देना था। संधि में तय मानकों के मुताबिक भारत में पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इनका करीब 20 फीसदी हिस्सा भारत के लिए है।


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