• संवाददाता, कानपुर

इंसुलिन इंजेक्शन डे पर विशेषज्ञों ने मधुमेह के बेहतर प्रबंधन के लिये इंसुलिन इंजेक्शन लगाने की सही त


कानपुर

मधुमेह भारत में एक महामारी बन चुका है, जिसके 72.9 मिलियन से अधिक रोगी हैं। नवंबर 2018 में लैंसेट डायबीटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार विश्वभर में टाइप 2 डायबीटीज से पीड़ित वयस्कों की संख्या वर्ष 2018 में 406 मिलियन थी, जो एक बटा पाँच की दर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 511 मिलियन हो जाएगी। यह अध्ययन बताता है कि वर्ष 2030 तक भारत में लगभग 98 मिलियन लोग टाइप 2 डायबीटीज के शिकार हो सकते हैं। मधुमेह और उसके प्रबंधन में इंसुलिन और उसके इंजेक्शन की सही तकनीक महत्वपूर्ण है। मधुमेह के प्रबंधन के महत्व को समझते हुए एक अग्रणी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी बीडी-इंडिया ने एक जागरूकता अभियान का आयोजन किया, जो इंसुलिन इंजेक्शन की सही तकनीक पर केन्द्रित था। इस अभियान में अग्रणी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स और मधुमेह शिक्षाविदों ने भाग लिया और मधुमेह के बेहतर प्रबंधन के लिये इंसुलिन इंजेक्शन तकनीक पर जोर दिया। डॉ. ऋषि शुक्ला, सेंटर फॉर डायबीटीज एंड एंडोक्राइन डिजीज और हेड ऑफ द डीपार्टमेन्ट, एंडोक्राइनोलॉजी, रीजेंसी हॉस्पिटल लिमिटेड ने कहा, ‘‘रोगी इंसुलिन नहीं लेना चाहते, क्योंकि वह सुई से डरते हैं और सोचते हैं कि जीवन भर इसी पर आश्रित रहना होगा। कई चिकित्सक भी अपने रोगियों को इंसुलिन थेरैपी पर रखने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह भय उनके रोगी के आत्मविश्वास को तोड़ सकता है। हालांकि इंसुलिन लगाने की सही तकनीक पर जागरूकता से लोग उपचार अपनाएंगे, अनुपालन करेंगे और मधुमेह का बेहतर प्रबंधन होगा। मैंने देखा है कि लगभग 75 प्रतिशत लोग इंसुलिन इंजेक्शन से डरते हैं और यह उनके उपचार में बाधा हो जाता है। मैं बीडी-इंडिया के साथ काम करते हुए खुश हूँ और शिक्षाविदों तथा विशेषज्ञों की मेरी टीम ने रोगियों को सही इंजेक्शन तकनीक पर शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे वह उन जटिलताओं से बच सकेंगे, जो गलत तकनीक से उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे लिपोहाइपरट्रोफी और ब्लड ग्लूकोस वैरियेशन।’’जटिलताओं से बचने के लिये इंसुलिन इंजेक्शन लगाने की सही तकनीक आवश्यक है। इस संदर्भ में, फोरम फॉर इंजेक्शन टेक्निक एंड थेरैपी एक्सपर्ट रीकमेन्डेशंस (एफआईटीटीईआर) इंडिया 2017 ने कई अनिवार्य बातों पर जोर दिया, जैसे इंसुलिन इंजेक्शन थेरैपी और रोकथामपरक उपचारों की बाधाओं समेत अच्छे इंजेक्शन अभ्यासों का महत्व, यंत्र विशिष्टता अनुशंसाएं, घर पर इंसुलिन इंजेक्शन अभ्यास, गलत तकनीकों के सुरक्षा सम्बंधी विपरीत परिणाम और एचसीपी तथा रोगियों के बीच अच्छे इंजेक्शन अभ्यासों की जागरूकता बढ़ाने के तरीके। मधुमेह चिकित्सा में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए बीडी इंडिया एवं साउथ एशिया के प्रबंध निदेशक पवन मोचेरला ने कहा, ‘‘मधुमेह के प्रभावी प्रबंधन में इंसुलिन आपूर्ति तकनीक की शिक्षा महत्वपूर्ण है। बीडी मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिये इंजेक्शन के अनुभव में सुधार के लिये प्रतिबद्ध है। जिसके लिये रोगियों को शिक्षित किया जाता है और उच्च गुणवत्ता की प्रौद्योगिकी का नवोन्मेष किया जाता है, ताकि बदलाव हो। हम पिछले लगभग 95 सालों से डायबीटीज इंजेक्श्न डिवाइसेज में अग्रणी रहे हैं। इंसुलिन इंजेक्शलन डे हमारे लिये इंसुलिन थैरेपी के प्रबंधन में सर्वश्रेष्ठउ तरीकों के बारे में बात करने के लिये प्रोत्सा्हित करने के लिये हमारे लिये बिल्कुिल उपयुक्तस अवसर है। हमें पूरा भरोसा है कि सही इंसुलिन इंजेक्श न तकनीक पर जागरूकता फैलाने के इस तरह के सहयोगी प्रयासों से हम भविष्यर में मरीजों को बेहतर परिणाम प्रदान करने में सक्षम हो पायेंगे।'' बीडी द्वारा लंबे समय से कई खोजपरक पहल की जाती रही हैं। इनमें 1924 में पहली इंसुलिन सिरिंज, 1999 में पहले 5एमएम के पेन नीडल और दुनिया के पहले 4एमएम पेन नीडल शामिल हैं। इनके द्वारा अब इंसुलिन का इंजेक्शिन लेने एवं देने की अच्छीे तकनीकों के बारे में डॉक्टएरों और मरीजों को शिक्षित किया जा रहा है।


1 व्यू

                                           KarmKasauti

                            Kanpur Uttar Pradesh

          Email: karmkasauti@gmail.com

   Copyright 2018. All Rights Reserved.