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ट्रेड वॉर से चीन पस्त, इकॉनमी में फूंकेगा नई जान


नई दिल्ली अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के कारण बदतर हुए आर्थिक हालात से निपटने के लिए चीन ने टैक्स में कटौती करने, खर्च बढ़ाने और निजी तथा छोटे उद्यमों को प्रचूर मात्रा में वित्तीय सहायता देने की योजना बनाई है। साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद चीन की अर्थव्यवस्था का यह अब तक का सबसे बुरा दौर है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने भरोसा जताया है कि वह एक स्थिर लेकिन लचीली मौद्रिक नीति को बरकरार रखते हुए चीन की मुद्रा युआन के मूल्य में कोई बदलाव नहीं आने देगा। सेंट्रल बैंक के डेप्युटी गवर्नर झू हेक्सिन ने देश के शीर्ष नेताओं द्वारा दिसंबर में एक बैठक में साल 2019 के लिए तय की गई योजनाओं के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देने के दौरान यह बात कही। अक्टूबर के अंत तक डॉलर के मुकाबले युआन गिरकर 10 वर्षों के निचले स्तर 6.9756 पर पहुंच गया था। हालांकि, तब से लेकर अब तक यह मजबूत होकर लगभग 6.7580 पर पहुंच गया है। अगर युआन में आगे और गिरावट आती है, तो अमेरिका को चीन के करेंसी कंट्रोल के बारे में शिकायत करने का मौका मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा बैंकों को अधिक से अधिक कर्ज बांटने का आदेश देने और पब्लिक वर्क्स कंस्ट्रक्शन पर होने वाले खर्च को बढ़ावा देने के बावजूद जुलाई-सितंबर में चीन की अर्थव्यवस्था महज 6.5 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ी। सरकार ने सोमवार को जानकारी दी कि दिसंबर में चीन का अमेरिका को निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है। निर्यात में यह गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा चीनी उत्पादों पर टैरिफ में बढ़ोतरी करने के कारण आई है। अमेरिका के साथ चीन का ट्रेड सरप्लस 2018 में बढ़कर 323.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पेइचिंग में संवाददाता सम्मेलन के बाद दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट आई, हालांकि मंगलवार को इसमें सुधार देखा गया। हांगकांग का हांग सेंग में 1.8 फीसदी की तेजी के साथ, जबकि शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 1.2 फीसदी उछलकर बंद हुआ।


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