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जनरल कोटा बिल: राज्य सभा में बहस और हंगामा


नई दिल्ली जनरल कोटा बिल मंगलवार को लोकसभा से पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश किया गया। बहस शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभा में बिल का समर्थन करने वाली कांग्रेस ने उच्च सदन में सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाया। संसदीय कार्यमंत्री विजय गोयल ने बताया कि बिल पर सदन में 8 घंटे बहस होगी। हंगामे की वजह से दोपहर 12:40 बजे सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित हो गई। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर 124वें संविधान संशोधन बिल को राज्यसभा में पेश किया। उस दौरान, डीएमके सांसद कनीमोझी ने बिल को सिलेक्ट कमिटी को भेजे जाने की मांग की। आइए, देखते हैं- बहस में किसने क्या कहा।

पिछड़ों को 27 की जगह 54% दें आरक्षण: रामगोपाल यादव, एसपी समाजवादी पार्टी ने जनरल कोटा बिल का समर्थन किया लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल भी उठाए। एसपी सांसद रामगोपाल यादव ने कहा, 'जातिगत भेदभाव सच्चाई है, लेकिन यह कम हुई है। कथित छोटी जातियों के लोगों को अछूत समझा जाता था।...एक मुख्यमंत्री का बंगला तक धोया गया था।' सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'इस बिल के निशाने पर 2019 का चुनाव है। सरकार की मंशा ईमानदार नहीं है। लगभग 97-98 प्रतिशत लोग इस क्राइटीरिया के तहत आ रहे हैं। इसका मतलब है कि 98 प्रतिशत गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण और 2 प्रतिशत अमीरों को 40 प्रतिशत आरक्षण। यह कैसी समता है। इससे लोगों को कोई लाभ नहीं होगा। गरीबों को दिक्कत यह होगा कि उनका कट ऑफ जनरल कैटिगरी से भी ऊंचा होगा।' रामगोपाल ने कहा कि इससे सवर्णों को मूर्ख नहीं बनाया जा सकेगा। उन्होंने कहा, 'लोगों को आपकी सरकार की बुद्धि पर तरस आता है कि हम लोगों को, पिछड़ों को, आदिवासियों को आसानी से घुमाया जा सकता है, लेकिन जो सबको घुमाते हैं, उनको कैसे घुमा लेंगे।' रामगोपाल यादव ने सरकार से पिछड़े वर्ग के आरक्षण को 27 से बढ़ाकर 54 प्रतिशत करने की मांग की क्योंकि अब सरकार ने 50 प्रतिशत आरक्षण का बैरियर तोड़ दिया है। एसपी नेता ने कहा कि आरक्षण के बावजूद अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जब नौकरियां ही नहीं हैं तो आरक्षण का क्या मतलब। यादव ने कहा कि नोटबंदी से एक झटके में लाखों नौकरियां खत्म हो गईं। बेरोजगारी की स्थिति को बताते हुए उन्होंने कहा कि पहले खोजने पर मुश्किल से मजदूर मिलते थे, लेकिन अगर आज लेबर चौक पर आप एक मजदूर को चुनते हैं तो 4 और आ जाते हैं कि साहब हमें ले चलिए।

नौकरियां ही खत्म कर रहे हैं तो आरक्षण का क्या लाभ: आनंद शर्मा, कांग्रेस कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि जवाहर लाल नेहरू ने इस तरह के आरक्षण के लिए 1946 में ही प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा कि यह कहना और यह दिखाना कि पहले कभी कुछ नहीं हुआ, सत्ता पक्ष को इस मानसिकता को छोड़ना होगा। शर्मा ने कहा, 'देश में आरक्षण का इतिहास क्या है, यह जानना जरूरी है। संविधान सभा ने विस्तृत चर्चा की थी जिन लोगों के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ है, उन्हें संरक्षण की जरूरत है और यह आरक्षण के रूप में मिलना चाहिए।...23 दिसंबर 1946 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आजादी से पहले ऑब्जेटिव्स रेजॉलूशन रखा था। उन्होंने कहा था कि देश के सभी नागरिकों को सामाजिक और आर्थिक न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने साथ में यह भी कहा था कि अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यकों को भी संरक्षण की जरूरत है।' उन्होंने बिल को अचानक लाए जाने पर सवाल उठाया। शर्मा ने कहा, 'हम इसलिए भी इसका समर्थन करते हैं कि हमने 2014 के मैनिफेस्टो में इसका जिक्र किया था। लेकिन 4 साल 7 महीने तक क्या करते रहे कि आखिरी सत्र में लाए हैं। सच्चाई यह है कि 3 राज्यों- एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इनकी (बीजेपी) हार हुई, 5-0 से हारे। यह ऐसी सरकार द्वारा लाया गया है जिसकी विदाई का समय आ गया है।' आनंद शर्मा ने कहा, '8 लाख सालाना आमदनी की शर्त के तहत 98 से 99 प्रतिशत आबादी कवर हो रही है। देश में रोजगार नहीं बन रहा है, न निजी क्षेत्र में न सार्वजनिक क्षेत्र में। हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया था लेकिन 2018 में 1 करोड़ 10 लाख रोजगार खत्म हुए। 34 लाख रोजगार केंद्र सरकार ने दिया, पिछले 3 साल में 95 हजार नौकरियां सरकार ने दी है। पीएसयू में 2016-2017 में रोजगार घटकर 11.85 लाख से घटकर 11.31 हजार हो गया। 3 साल में केंद्र ने 95 हजार रोजगार दिए और पीएसयू के 97 हजार रोजगार खत्म कर दिए गए। जिस गति से नौकरियां दी जा रही हैं, उस गति से तो आज के युवाओं को नौकरी देने में 800 साल लगेंगे।' कांग्रेस नेता ने बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी तेजी महिला आरक्षण के लिए क्यों नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि आप बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देते हैं लेकिन क्या नारों से ही विकास होगा। महिला आरक्षण बिल क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने कहा कि देश की जनता मूर्ख नहीं है, जनता आपसे हिसाब मांग रही है, आपको हिसाब देना होगा, यह हिसाब देने का समय है।

विधेयक आया तो सब अवाक रह गए: प्रभात झा, बीजेपी बीजेपी सांसद प्रभात झा ने कहा, 'मई का महीना था और साल 2014। प्रधानमंत्री जी संसद में आए थे और अपना माथा इसकी सीढ़ियों पर झुकाया था। सेन्ट्रल हॉल में दिए अपने पहले भाषण में पीएम ने कहा कि उनकी सरकार गरीबों के लिए काम करेगी। साढ़े 4 साल तक गरीबों के लिए काम करने वाली सरकार का नाम है नरेंद्र मोदी सरकार।' उन्होंने कहा, 'सामान्य वर्ग के गरीब लोग आरक्षण कब पाएंगे, इसका लंबे वक्त से इंतजार था। प्रधानमंत्री मोदी ने यह कर दिखाया। विरोध के लिए विरोध मत करिए।' झा ने कहा, 'यह विधेयक आया तो सब अवाक रह गए थे। सभी दलों के घोषणापत्र में यह कहा गया था। भारत में देश का पहला प्रधानमंत्री है, जिन्होंने सिर्फ अपने ही मैनिफेस्टो नहीं, सभी के मैनिफेस्टो की कद्र करते हुए इस दिशा में कदम उठाया। बहुत संवेदनशील मामला है, सदन का एक-एक व्यक्ति चाहता है कि यह बिल पास हो।' उन्होंने कहा कि यह 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे की भावना के अनुकूल है। उन्होंने अटलजी की कविता का हवाला देते हुए विपक्ष से बड़ा दिल दिखाने का आह्वान किया।

यह बिल आधी रात की डकैती: मनोज झा, आरजेडी आरजेडी सांसद ने बिल का विरोध करते हुए इसे संविधान के बुनियादी ढांचे के साथ छेड़छाड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह एससी-एसटी और ओबीसी के हकों पर डाका है।

बिल पेश करते हुए थावरचंद गहलोत बिल पेश करते हुए गहलोत ने कहा, 'इस ऐतिहासिक बिल को लोकसभा ने पारित किया है और इसे आज यहां पेश किया हूं। इसे पास करने की आवश्यकता है। यह बिल आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए है। यह विधेयक सामान्य वर्ग के गरीबों के शैक्षणिक और रोजगार संबंधी सशक्तीकरण के लिए लाया गया है।' असम से कांग्रेस सांसद भुवनेश्वर कालिता ने गहलोत के भाषण के बीच में ही एनआरसी मुद्दे पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बयान की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री विजय गोयल ने कहा कि पूर्वोत्तर के मुद्दे पर गृह मंत्री 2 बजे सदन में बयान दे सकते हैं। (बाद में गृह मंत्री ने 2 बजे नागरिकता संशोधन बिल और खासकर पूर्वोत्तर राज्यों के संदर्भ में इस पर अपना बयान दिया और कहा कि इसे लेकर कुछ भ्रांतियां फैलाने की कोशिश की गई।) विजय गोयल के इस स्पष्टीकरण के बाद बाद गहलोत ने जनरल कोटा पर फिर से भाषण शुरू किया। हालांकि, इस दौरान विपक्ष की टोका-टाकी, नारेबाजी जारी रही। गहलोत ने कहा कि आर्टिकल 15 में एक सब आर्टिकल 6 जोड़ा जा रहा है। इसी तरह आर्टिकल 16 में भी एक अतिरिक्त सब-आर्टिकल जोड़ा जा रहा है। इसके पहले भी कई सरकारों ने समय-समय पर इसकी कोशिश की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज किया। इसकी वजह यह थी कि संविधान में आर्थक आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं था। अब संशोधन के जरिए पहली बार इसका प्रावधान किया गया।

बिल का समर्थन लेकिन गलत तरीके से बढ़ाया सत्र: आनंद शर्मा, कांग्रेस कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी बिल के समर्थन में है, लेकिन जिस तरीके से सत्र को बढ़ाया गया, वह गलत है। शर्मा ने कहा कि पौने 5 साल बाद सरकार की नींद टूटी है और वह श्रेय लेने की कोशिश न करे। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार राजनीति कर रही है और वह देश को गुमराह करने की कोशिश मत करे।


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