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सबरीमाला पर जल्द फैसला तो राम मंदिर पर 70 साल क्यों: डॉ. कृष्ण गोपाल


लखनऊ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने राम मंदिर पर फैसले में देरी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब सबरीमाला व जलीकट्टू में कोर्ट इतनी जल्दी फैसली सुना सकता है तो रामजन्मभूमि का मामला 70 साल से क्यों विचाराधीन है? उत्तर प्रदेश पहुंचे डॉ. कृष्ण गोपाल ने लखनऊ के मल्हौर स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में आयोजित अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 15वें अधिवेशन के दूसरे दिन अपने संबोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि धर्म सत्य से ऊपर है इस बात का सभी खयाल रखना चाहिए। सभी मामलों में समान न्याय देकर न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कायम रखें। उन्होंने कहा कि न्याय और समाज भिन्न नहीं हैं। न्याय व्यवस्था का मौलिक तत्व दायित्व व कर्तव्यबोध में है। जब कर्तव्यबोध होता है तो समाज में अन्याय कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि देश के न्यायधीशों का भी न्यायपालिका के प्रति यह दायित्व है कि वे अपने आचरण से देश के सामने आदर्श स्थापित करें। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि चाहे न्यायमूर्ति हों या वकील उन्हें संविधान के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए।

सबसे ऊपर संविधान व कानून : जस्टिस ठाकुर अधिवेशन के तीसरे सत्र में आम आदमी को न्याय के विषय पर बोलते हुए शिमला हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और न्याय में सभी बराबर हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण है, आम आदमी के कहने पर श्रीराम द्वारा सीता का परित्याग। उन्होंने चर्वाक ऋषि का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में उनके जैसे नास्तिक को भी बोलने की आजादी दी गई और उन्हें ऋषि कहा गया।


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