• Shiv Vardhan Singh, Kanpur

हादसे पर हादसे, केडीए ‘अनजान‘, खतरे में है ‘जान‘


केडीए सचिव केडी सिंह ने बतया कि कि केडीए से नक्शा पास है कंस्ट्रक्शन पास है निर्माण कार्य अवैध नही है। अवर अभियंता विपिन राय ने बताया कि सुरक्षा मानकों के विपरीत निर्माण कार्य करा रहा था जिसके लिए उसको एक हफ्ता पहले नोटिस दी जा चुकी है। कानपुर। फीलखाना इलाके में शुक्रवार को निर्माणाधीन बिल्डिंग की दीवार गिरने से हुई मजदूर की मौत के मामले ने एक बार फिर प्राधिकरण अफसरों को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। हालांकि, विभाग ने निर्माण का नक्शा स्वीकृत होने का तर्क देते हुए किनारा कर लिया। लेकिन, सवाल यहां खत्म नहीं होता। ‘बेसमेंट कल्चर‘ रिहायशी इलाकों के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। गहरी खुदाई से आसपास के मकानों की बुनियादें कमजोर हो रही हैं। रिहायशी इलाके, घनी आबादी वाले मोहल्लों में दनादन बेसमेंट के नक्शे पास हो रहे हैं। मोतीझील इलाके में बने केडीए दफ्तर से दो किलोमीटर के दायरे में ही दर्जनों बेसमेंट निर्माण चल रहे हैं। अशोक नगर, बेनाझाबर, रामबाग, पी रोड, गुमटी, लाजपत नगर जैसे पाॅश इलाकों के अलावा घनी आबादी वाले घुमनी बाजार, हरवंश मोहाल, मेस्टन रोड, लाटूश रोड, साउथ सिटी में गोविंद नगर, जुही, साकेत नगर, बर्रा आदि इलाकों में तेजी से गहरे बेसमेंट समेत निर्माण जारी हैं। इन निर्माणों में कितने प्रतिशत बेसमेंट स्वीकृत है, यह शायद एरिया जेई को भी ना मालूम हो। अमूमन 50 से 80 प्रतिशत तक एक निश्चित गहराई तक बेसमेंट बनाने के नियम हैं। कई जगहों पर रिहायशी आबादी में बगैर सेट बैक छोड़े बिल्डरों ने लगभग 100 प्रतिशत तक बेसमेंट कवर कर लिया है। भूकम्प जैसी प्राकृति आपदा में ऐसे खतरनाक निर्माण रिहायशी इलाकों में रह रही आम जनता के लिए जिंदगी-मौत का सवाल बन सकते हैं। प्राधिकरण में नक्शा पास करने के बाद प्रवर्तन विभाग के अभियंता मौके पर जाकर शायद ही दोबारा बेसमेंट आदि मानकों की जांच करें। इसमें मिलीभगत के खेल से भी इंकार नहीं किया जा सकता। सांठगांठ के सहारे बेसमेंट के नाम पर भारी-भरकम जगह लोग हथिया रहे हैं। पार्किंग के लिए बेसमेंट की अनुमति लेने के बाद मार्केट आदि खोल दी जाती हैं। जबकि, पार्किंग के लिए रोड का इस्तेमाल कर रहे हैं।


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