• वन्दिता मिश्रा

एनएच 233 पर स्थिति तनावपूर्ण


दिनांक 6 दिसंबर 2018 को शायं 5:30 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 पर नहर मार्ग रानीपुर रजमों आजमगढ़ पर अंडरपास की मांग वाले स्थल पर स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गयी.मौके पर पीडी नेशनल हाईवे वाराणसी श्री एस बी सिंह ने मशीने लगवा कर जबर्दस्ती काम शुरू करा दिये.संवाददाता के अनुसार ग्रामवासियों के प्रतिनिधि एडवोकेट विनय शंकर मिश्र ने कहा कि हम सभी को अंडरपास के लिये जब हमे आदेश निर्देश के बावजूद निराश किया गया तो हमने इस मुद्दे के बाबत माननीय हाईकोर्ट इलाहाबाद में जनहित याचिका दाखिल की है.और हम ग्रामवासियों को उच्चन्यायालय पर पूरा विश्वास है कि हमें न्याय जरूर मिलेगा.अत: पीडी महोदय आप कुछ दिन रूक जायें.

लेकिन उन्होने कहा कि हाईकोर्ट जायें चाहे सुप्रीम कोर्ट हमें इससे मतलब नहीं. मौके पर उपस्थित लोंगों ने बहुत अनुनय विनय किया परंतु पीडी महोदय काम कराने पर अड़े रहे .

घबराए ग्रामवासियों जिनको नेशनल हाइवे के बनने से सीधे सीधे नुकसान की अनुभूति हो रही है ,क्योंकि इस हाइवे के बनने से उनके बच्चो की पढाई पर सीधा असर पड़ेगा और उनकी बाजार से कनेक्टिविटी पर भी विपरीत असर पड़ेगा,24 गांव के सैकड़ों प्रभावित लोगों ने कड़ा प्रतिरोध किया तो सबको धमकाते हुए की तुम सबके खिलाफ एफ आई आर करांऊगा. ग्रामीणों का कहना है कि हम काफी उम्मीद के साथ हाई कोर्ट गये हैं और माननीय हाई कोर्ट का जो भी फैसला होगा हम सब मांनेगे.यदि हमारे पक्ष में नहीं हुआ तो आप लोग रोड बना लीजियेगा.

लेकिन पीडी महोदय सहमत नही हुए.अत्यंत आश्चर्य जनक बात तो ये है नेशनल हाइवे के पीडी श्री एस बी सिंह जी पीएमओ ग्रीवांस pmopg/ e/n 2017/0384317 पर दिये निर्देश कि अंडरपास बनाया जाये को कतई मानने को तैयार नहीं हुए.जनता की आवाज को दबाने और उनकी सही मांग नही मानने के कारण ही जनहित याचिका दाखिल की गई हैं.ग्रामीणवासियों को लगता है कि नेशनल हाइवे पर तो बहुत सारे काम हैं पर ऐसी क्या वजह है कि प्रोजेक्ट निर्देशक हाइवे की विवादित लोकेशन पर ही काम करने को अमादा है,पहले ही हाइवे के निर्माण के समय बहुत से पेड़ कटे,पर्यावरण की धज्जियाँ तो ऐसे ही उडाई जा रही हैं,पर गाँव वालों को इस बात से भी कोई खास समस्या नहीं किसी ने कुछ कहा भी नहीं,पर अब कनेक्टिविटी की समस्या होने,जीविका से सम्बंधित समस्या होने,,शिक्षा दीक्षा से सम्बंधित समस्या के होने और सही उपाय नहीं मिलने से उन्हें इस बात की घबराहट है कि उनकी सरकार उन्ही की बात कैसे नहीं सुन रही है आखिरकार पी डी महोदय भी तो सरकार के ही आदमी है.एक ग्रामीण पुल्ली के अनुसार वो एक स्कूल में स्कूल वैन चलाते हैं,उनका कहना है कि अभी तो स्कूल के बच्चे आसानी से लाता हूँ और ले जाता हूँ,पर सुना है कि इस हाइवे के बन जाने से बच्चो को लाने में सदा भयभीत रहना होगा क्योंकि तेज गति से चलता हाइवे और स्कूल से सही जुडी सड़क नहीं मिलने के कारण मुझ पर सदा दबाव बना रहेगा कि बच्चो को सुरक्षित पहुंचा पाउँगा या नहीं,यदि अंडरपास बन जाता जो कि सबकी जरुरत की मांग है तो मेरी नौकरी बची रहेगी और अपने घर का पालन पोषण कर पाऊंगा.पुल्ली एक ड्राइवर है पर देश के विकास को समझते हैं,उनके अनुसार हाइवे तो बनते हैं ये जरुरी भी हैं पर स्कूली बच्चो और गाँववालो की ज़िन्दगी की कीमत पर बनेंगे तो हमारी सरकार किसलिए है.

संवाददाता के अनुसार पूरे हाइवे पर अभी काफी काम बाकी है परंतु जनहित याचिका दाखिल करने के कारण अब वे तुरंत केवल उसी डिमांडेड लोकेशन पर काम करने पर अडें है और पुलिस फोर्स के जरिये काम करने पर आमादा हैं,ऐसा लगता है जैसे लगता हो कि शांति पूर्ण चल रहे संघर्ष को उकसा रहे हों.

याचिकाकर्ता विनय शंकर मिश्र के अनुसार पूरी साइट पर बहुत काम बाकी है केवल यहीं पर काम करने की जिद से वो हाईकोर्ट में तथ्य को बदल कर पेश करना चाहते हैं,पहले का तथ्य यह था कि जो अंडरपास ग्रामीणों को देने का वचन दिया गया था उसके दोनों तरफ 300 मीटर इस आशय से खुद हाइवे ने और गायत्री प्रोजेक्ट ने छोड़ा था और ग्रामीण वासियों को आश्वासन दिया था कि अंडरपास बनाने के बाद ही हम इसे बनायेंगें.परन्तु अब का तथ्य ये कैसे हो गया कि पीडी महोदय केवल इसी लोकेशन पर पहले ही सब काम कर डालना चाहते हैं,ये तो धोखा देने जैसा हुआ? याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि हमें पूरा विश्वास है कि वहां अंडरपास के लिये आदेश जरूर मिलेगा परंतु फिर भी किसी कारणवश हम सफल नहीं हुये तो हम किसी भी प्रकार का विरोध नहीं करेंगें.ग्रामीणवासियों के छले हुए चेहरों और उनके क्रोध को समझा बुझा कर पुलिस ने मामले को शांत किया,देर रात तक पी डी महोदय के लुक छुप कर वहां रास्ते में बने ढांचे को तोड़ने की अचानक की कार्यवाही से क्रोधित भीड़ को पुलिस ने शांत किया और शांति भंग न होने की हिदायत भी दी.

याचिकाकर्ता कहते हैं कि समझ नहीं आता कि नेशनल हाइवे के अधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार क्यों नहीं हैं.आखिरकार ये मुद्दा किसी एक व्यक्ति विशेष का तो है नहीं एक बड़े समूह का मामला है.इतने बड़े समूह को नज़रंदाज़ तो नहीं किया जा सकता,

जनहित के मामले में ऐसा अवरोध क्यों ?वो भी जनहित याचिका माननीय उच्च न्यायालय दायर की जा चुकी है,सुनवाई भी जल्द होनी है तो फिर ये किस जल्दबाजी में है कि शांत संघर्ष को भंग करना चाहते हैं ऐसा तो पहले कभी ऐसा नहीं देखा गया?ग्रामीण वासियों के चेहरों पर बहुत प्रश्न हैं,पर न्याय की उम्मीद तो हमेशा रहती है.


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