• संवाददाता

इंस्‍पेक्‍टर सुबोध की हत्‍या में सेना का जवान एक आरोपी है और हत्‍या से उसका सीधा संबंध अभी साबित नही


बुलंदशहर मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि बुलंदशहर में बवाल के दौरान सेना के एक जवान जीतू ने स्‍याना के पुलिस इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार सिंह को गोली मारी थी। एडीजी प्रशांत कुमार ने शुक्रवार को कहा कि इंस्‍पेक्‍टर सुबोध की हत्‍या में सेना का जवान एक आरोपी है और हत्‍या से उसका सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है। इससे पहले मीडिया में आई खबरों में एसआईटी और एसटीएफ की जांच के हवाले से दावा किया गया था कि शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को जम्मू में तैनात जीतू उर्फ फौजी ने गोली मारी थी। फौजी अपने गांव में छुट्टी पर आया हुआ था। इंस्पेक्टर को उसी की अवैध पिस्टल से गोली लगी है। घटना के बाद फौजी जम्मू भाग गया। मेरठ जोन के एडीजी ने इस खबर को खारिज कर दिया। एडीजी ने कहा, 'जीतू का नाम एफआईआर में दर्ज है और उसे पकड़ने टीमें जम्‍मू भेज दी गई है। जीतू सेना में है और जम्‍मू में तैनात है। वह 27 नामजद लोगों में से एक है। वह महाव गांव का रहने वाला है। सभी नामजद लोगों के खिलाफ जांच चल रही है।' पुलिस ने सेना से जीतू को अरेस्‍ट करने की अनुमति मांगी है। उधर, जीतू की मां ने कहा है कि अगर उनके बेटे ने इंस्‍पेक्‍टर को गोली मारी है तो उसे भी गोली मार दो। उन्‍होंने आरोप लगाया कि उनकी बहू का जेवर लूट लिया गया है और बेइज्‍जती हुई है। वह केस करेंगी। उन्‍होंने बताया कि मांस के बारे में अभी जांच चल रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि मांस किस चीज का था। इस बीच अन्‍य पुलिस अधिकारियों ने भी जीतू के पुलिस इंस्‍पेक्‍टर की हत्‍या में सीधे शामिल होने के दावे को खारिज कर दिया है। वहीं बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज की गिरफ्तारी को लेकर भी कई जगह बीतीरात दबिश दी गई है। बता दें कि यूपी के बुलंदशहर में कथित गोकशी के शक में हुई हिंसा में शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के मामले में एक और खुलासा हुआ है। घटना के तीन महीने पहले एक स्थानीय हिंदू नेता ने शासन को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर सुबोध की शिकायत की थी। इस पत्र में उन्होंने लिखा था कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों में बाधा डालने की आदत है। इस कारण हिंदू समाज में उनके लिए गुस्सा है। सोमवार को बुलंदशहर में गोकशी के आरोप के बाद हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में स्याना इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना के तीन महीने पहले लिखे गए दो पैराग्राफ के इस पत्र में कहा गया था, 'उन्हें (इंस्पेक्टर सुबोध) और कुछ और दूसरे पुलिसवालों को यहां से तत्काल ट्रांसफर कर देना चाहिए। उनके खिलाफ विभागीय जांच कराई जाए।' इस पत्र के अंत में यह भी लिखा गया था कि यह मांग बीजेपी के सभी स्थानीय नेताओं की है।


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