• संवाददाता

कश्मीर: इस महीने 32 आतंकियों का सफाया


नई दिल्ली कश्मीर में इसी महीने सुरक्षा बलों ने 32 आतंकियों को मार गिराया है। आतंकियों के खिलाफ इस कार्रवाई को सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस सफलता के पीछे आतंकियों के खिलाफ लगातार मिल रहे पुख्ता इनपुट्स हैं। सेना के सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से खुफिया जानाकारी मिलने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। पहले सिर्फ छोटे आतंकियों के खिलाफ ही खुफिया जानकारी मिलती थी, लेकिन अब आतंक के आकाओं के खिलाफ भी पुख्ता जानकारियां मिल रही हैं। साथ ही सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता यह भी है कि कश्मीर के आम लोंगों की तरफ से सुरक्षाबलों को ये जानकारियां मिल रही हैं। सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पहले जो जानकारी मिलती थी, उनमें ज्यादातर इस तरह की होती थी कि कुछ आतंकी हमले की फिराक में हैं, लेकिन कुछ समय से आतंक के सरगनाओं के खिलाफ भी पुख्ता जानकारी मिल रही है। लोग अब उनके हर मूवमेंट के बारे में पता चलने पर सिक्योरिटी एजेंसियों को आगाह कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव की एक बड़ी वजह यह है कि जबसे आतंकियों ने लोकल लोगों को निशाना बनाना और डराना शुरू किया है तबसे लोगों में भी उनके खिलाफ गुस्सा दिखने लगा है। अब वह आतंकियों के डर से बाहर निकलकर उनके सरगनाओं के बारे में भी जानकारी मिलने पर इसे सिक्यॉरिटी एजेंसियों के साथ साझा कर रहे हैं। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, जिस तरह से आतंकी अब आईएसआई की तरह लोगों को मारकर उसका विडियो प्रसारित कर रहे हैं, उससे उनकी व्याकुलता दिख रही है। सेना के अधिकारी का कहना है कि अगर लोग आतंकियों को सपोर्ट कर रहे होते तो हमारे पास इतना इंटेलिजिंस इनपुट नहीं आ रहा होता। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने जिस तरह छुट्टी पर जा रहे फौजियों या एसपीओ को निशाना बनाना शुरू किया है और उसके बाद उनके बारे में लोग खुलकर जानकारी साझा कर रहे हैं। लोगों की तरफ से आ रही जानकारी से साफ जाहिर है कि स्थानीय लोग भी उनसे तंग आ रहे हैं और उनके खिलाफ सुरक्षा बलों को जानकारी दे रहे हैं। सुरक्षा बलों ने इस महीने अभी तक 32 आतंकियों का सफाया किया है। अक्टूबर में 28, सितंबर में 29, अगस्त में 28 और जुलाई में 11 आतंकी मार गिराए। इस साल अब तक 226 आतंकी मारे गए हैं। पिछले साल 213 आतंकियों का और 2016 में 141 आतंकियों का सफाया किया था। घाटी और एलओसी में इस साल हमारे 56 सैनिक शहीद हुए हैं। हालांकि आतंकियों के मरने के साथ ही उनके रिक्रूटमेंट का सिलसिला भी जारी है। इस साल अब तक करीब 178 स्थानीय युवाओं ने आतंक की राह पकड़ी है। जबकि पिछले साल 128 युवा आतंकियों के साथ हो लिए थे।


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