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23 अपराधियों को दी लोकतंत्र सेनानी पेंशन, हाई कोर्ट ने डीएम से मांगा जवाब


पीलीभीत इलाहाबाद हाई कोर्ट नेअपराधियों को लोकतंत्र सेनानी पेंशन देने के मामले में पीलीभीत के डीएम से स्पष्टीकरण मांगा है। आरोप है कि यहां के डीएम अखिलेश कुमार मिश्रा ने जेल में बंद 23 कैदियों को लोकतंत्र सेनानी पेंशन दे दी। हाई कोर्ट ने पूछा है कि इमर्जेंसी के दौरान राजनीतिक कैदियों को हर महीने दी जाने वाली 20,000 रुपये की पेंशन जेल में विभिन्न आपराधिक मामलों में बंद कैदियों को क्यों दी गई? हाई कोर्ट ने नोटिस जारी करके डीएम को जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया है। हाई कोर्ट में दायर की गई एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर जस्टिस के अजीत और जस्टिस एपी शाही की बेंच सुनवाई कर रही थी। यह पीआईएल लोकतंत्र रक्षक सेनानी संगठन द्वारा दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि जिला प्रशासन ने जेल में विभिन्न आपराधिक मामलों में बंद 23 कैदियों को गैर कानूनी ढंग से लोकतंत्र सेनानी पेंशन दी है। याचिकाकर्ता के वकील मनमोहन सिंह ने बताया कि 2006 में समाजवादी पार्टी ने यह पेंशन योजना शुरू की थी। 2007 में मायावती की बीएसपी सरकार ने इसे खत्म कर दिया था। लेकिन 2016 में फिर से समाजवादी पार्टी की सरकार ने यह योजना शुरू कर दी। बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसी साल जून में पेंशन को 15,000 से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह कर दिया। यह पेंशन यूपी सरकार ऐसे राजनीतिक बंदियों को देती है जिन्होंने 25 जून 1975 से लेकर 21 मार्च 1977 तक इमर्जेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष किया और आपातकाल के विरोध में डीआईआर और मीसा व अन्य धाराओं में जेल में भेजे गए। याचिकाकर्ता विश्वमित्र ने कहा कि पीलीभीत के डीएम ने जिले में 150 लोगों को पेंशन जारी की। इनमें से 23 विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। उन लोगों ने डीएम, सीएम और राज्यपाल सहित प्रधानमंत्री को इसका ज्ञापन दिया था। ज्ञापन में इस आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों का नाम लोकतंत्र सेनानी पेंशन की लिस्ट से हटाने को कहा गया था लेकिन उन लोगों की सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पीलीभीत के सीओ धर्म सिंह मर्छल ने पाया कि कई अपराधी लोकतंत्र सेनानी पेंशन ले रहे हैं। उन्होंने इस मामले में जांच कराने के लिए एसपी को 31 दिसंबर 2017 को लिखा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।


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