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सीबीआई विवाद पर बोले ओवैसी, भ्रष्ट अफसर को क्यों बचा रहे पीएम मोदी ?


हैदराबाद सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले पर अब असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) पर निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि कोर्ट सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को राहत देगा। ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक भ्रष्ट अफसर को भी बचाने का आरोप लगाया है। बताते चलें कि सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच छिड़े विवाद के बीच दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया है। सीवीसी की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने यह सख्त फैसला लिया। इसी पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा, 'मैं जानना चाहता हूं कि सीवीसी ने किस धारा के तहत सीबीआई डायरेक्टर को हटाया। यह दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैबलिश्मेंट ऐक्ट की धारा 4 का उल्लंघन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक भ्रष्ट ऑफिसर को क्यों बचा रहे हैं? सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं को कम आंका जा रहा है।'

कैसे लिया गया फैसला, कब क्या हुआ? मंगलवार शाम 6 बजे सीवीसी ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को हटाने का फैसला किया। शाम 7 बजे सीवीसी ने अपने फैसले की जानकारी सरकार तक पहुंचाई। 7 बजे ही सरकार ने अनुशंसा पर विचार किया। वर्मा और अस्थाना को हटाने का आदेश तैयार किया गया। रात 12.30 बजे सीबीआई के अधिकारियों को यह आदेश जारी किया गया। तड़के दो बजे नागेश्वर राव ने सीबीआई के अंतरिम डायरेक्टर का कार्यभार संभाला। क्या है विवाद? विवाद के केंद्र में मीट कारोबारी मोइन कुरैशी है और दोनों छोर पर सीबीआई के 2 सबसे बड़े अफसर डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना हैं। दोनों अफसरों को सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है और अंतरिम डायरेक्टर के तौर पर एम. नागेश्वर राव को नियुक्त किया है। वर्मा और अस्थाना के रिश्ते तभी से तल्खी भरे हैं जब पहले ने दूसरे के स्पेशल डायरेक्टर पद पर नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी। बाद में अस्थाना ने कैबिनेट सेक्रटरी से वर्मा की शिकायत की और उनपर कुरैशी के करीबी सहयोगी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का भी आरोप लगाया। 15 अक्टूबर को सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप में केस दर्ज किया। खास बात यह है कि FIR में अस्थाना पर सतीश बाबू सना से 3 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। FIR के 4 दिन बाद अस्थाना ने सीवीसी को खत लिखकर वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बाद में अस्थाना ने FIR को रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी। इस बीच सीबीआई ने अस्थाना की टीम के माने जाने वाले अपने ही महकमे के डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया।


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