• वन्दिता मिश्रा

गंगा के किनारे बसे शहरों में स्वच्छता-आशा की लहर


लखनऊ गंगा के किनारे बसे हुए 18 नगर निकायों में अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की बहुचर्चित (अंबिकापुर मॉडल तकनीक)अपशिष्ट प्रबंधन तकनीक को अपनाया जायेगा इसके लिए शुक्रवार से लखनऊ में दो दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की गई।इस कार्यशाला में,चयनित नगर निकायों के प्रतिनिधियों को कार्यशाला के माध्यम से अंबिकापुर मॉडल की जानकारी दी गई। अंबिकापुर मॉडल को हस्तिनापुर, बिजनौर, गढ़-मुक्तेश्वर, अनूपशहर, नरौरा, बबराला, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, गंगाघाट, झूंसी, मिर्जापुर, चुनार, रामनगर, मुगलसराय, सैदपुर, गाजीपुर जैसे 18 नगर निकायों में अपनाये जाने का प्लान है,परन्तु नगर निगम वाराणसी, इलाहाबाद और कानपुर को इसमें शामिल नहीं किया गया है।कार्यशाला में शामिल प्रतिनिधियों को इसके सम्बन्ध में जानकारी देने के लिए शहरी निकाय निदेशालय में,नगर विकास मंत्री ने दो दिवसीय कार्यशाला का और साथ ही साथ राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की वेबसाइट का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह, विशेष सचिव हरिप्रसाद शाही तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। भारत सरकार द्वारा नामित किये गए स्वच्छ भारत मिशन की ओर से आये सलाहकार श्रीनिवास ने प्रतिनिधियों को “ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल” की जानकारी दी। कार्यशाला में आये हुए चयनित निकायों के प्रतिनिधियों को देश के उन सभी स्थानों के भ्रमण का मौका मिलेगा जहाँ जहाँ इस मॉडल को क्रियान्वित किया गया है. क्या है अंबिकापुर मॉडल (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल)

यह मॉडल डोर टू डोर कचरा संग्रहण की तकनीक है,कचरे को डोर टू डोर संगृहित करने के बाद एसएलआरएम केन्द्रों में कचरे की छंटाई की जाती है.कचरे से निकले कबाड़ को बेच दिया जाता है.गीले कचरे से कम्पोस्ट खाद बनायीं जाती है.तालाबों में बत्तखों को भी पाला जाता है,जिससे तालाबों की सफाई होती है,उससे सम्बंधित अन्य व्यवसाय भी ग्रामीणों को लाभ पहुँचाने की क्षमता रखते हैं.

इस मॉडल में करीब 2500 घरों का एक कलस्टर बनेगा। इस कलस्टर पर एक कंपोस्टिंग यूनिट स्थापित की जाएगी। एक केंद्र पर करीब 650 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत पड़ेगी। योजना के तहत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन तथा एसएलआरएम केंद्र और खाद उत्पादन केंद्र बनाये जायेंगे और उनका संचालन स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जाएगा। समूहों के सदस्यों की संख्या 10 से 20 व्यक्ति प्रति समूह होगी। समूह के सदस्यों को स्वच्छता मणि के नाम से जाना जाएगा। चयनित स्वच्छता मणि द्वारा प्रत्येक पारस केंद्र के लिए एक कोर सदस्य का चयन किया जाएगा।


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