• संवाददाता

बाल विवाह और दहेज के खिलाफ विजेता लड़ रही लड़ाई


लखीमपुर शहर के मुहल्ला भटनागर कालोनी की विजेता गुप्ता बाल विवाह, असंगति विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ काम कर रही हैं। उन्होंने आशा ज्योति केंद्र में बतौर सुगमकर्ता दहेज प्रथा के कई मामले निस्तारित कराए हैं। बाल विवाह के दो मामले उनके संज्ञान में आए थे। जिनमें उन्हें एक में शिकायत फर्जी मिली और दूसरे का समय से जानकारी न हो पाने के कारण बाल विवाह नहीं रोक सकीं। विजेता इसके लिए लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं। घरेलू हिंसा के मामले में पुलिस के सहयोग से भी कई महिलाओं को न्याय दिलाया है। मिशन सिर्फ एक, पीड़ित महिलाओं की आवाज बनकर उन्हें इंसाफ दिलाना।पास्को के मामलों में पुलिस की रवैया भी नकारात्मक रहा है।हैदराबाद और रेहरिया के मामलों में पुलिस ने दुराचार की घटनाओं को मामूली छेड़छाड़ की घटना में दर्ज किया था।केंद्र को शिकायत मिली तो विजेता ने मौके पर जाकर पीड़िता से मुलाकात की और पड़ोसियों से जानकारी हासिल की।इन दोनों मामलो में पुलिस पीड़ित पर दवाब बनाकर सुलह कराने में लगी थी।विजेता के प्रयासों से एक प्रकरण में पुलिस धाराओं में संसोधन कर अभियुक्त को जेल भेज चुकी है।

दहेज उत्पीड़न के खिलाफ आवाज मंच दहेज उत्पीड़न के करीब 277 शिकायते आशा ज्योति केंद्र में दर्ज हुई है।इनमे से 77 मामले निपटाये जा चुके है। ससुराल से निकाली गई कई महिलाओं को पुन: उनके घर में आसरा दिलाया गया।समझौते के बाद पुनः दो मामलों में महिलाओं को घर से निकाले जाने का मामला प्रकाश में आया है।इसमे एक मामला पीलीभीत जिले का है।रामनगर की अंजली गुप्ता की शादी अख़बार के जरिये पीलीभीत के बीसलपुर से हुई थी।दहेज को लेकर अंजली को ससुरालीजन परेसान कर रहे है।दो माह पहले ही समझौते के बाद अंजली को ले गए थे।तीन दिन पहले ही फिर घर के बाहर छोड़ कर भाग गए।इसी प्रकार हिदायत नगर का एक मामला है।साठ साल से अधिक उम्र की रेशमा की शादी का मामला है।बेटी के जन्म के बाद रेशमा को मासिक में छोड़ दिया गया।

बाल विवाह का विरोध बाल विवाह आज भी बड़ी समस्या है। गरीब व ग्रामीण तबके के लोग कम उम्र में बेटियों का बेमेल विवाह करा देते हैं।आशा ज्योति केंद्र इसका कड़ा विरोध कर रही हैं। इसके खिलाफ जनजागरण कर रही हैं। बीते दिनों दो मामले संज्ञान में आये।इनमे जाँच के दौरान एक शिकायत गलत मिली ।

भ्रूणहत्या के खिलाफ अभियान विजेता भ्रूणहत्या के खिलाफ भी अभियान चला चुकी है।आशा ज्योति केंद्र से पहले विजेता गुप्ता एनआरएचएम में कार्य कर रही थी।उस दौरान समाज में सबको समान अधिकार दिलाने के लिए भ्रूणहत्या के खिलाफ व्यापक मुहिम चलाई थी।


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