• संवाददाता

2019: मायावती की दो टूक- कांग्रेस से सीटों की भीख नहीं मांगेंगे, अकेले लड़ सकते हैं


नई दिल्ली 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन को लेकर चल रही कवायद को बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती के बयान से झटका लगा है। मंगलवार को बीएसपी सुप्रीमो ने साफ किया कि 2019 में संतोषजनक सीटें न मिलने की सूरत में पार्टी कांग्रेस से सीटों की भीख मांगने के बजाए अकेले चुनाव लड़ना पसंद करेगी।

'कांग्रेस से सीटों की भीख नहीं मांगेंगे' यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने कहा कि किसी गठबंधन में सीटों की भीख मांगने की बजाए उनकी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। बीएसपी अध्यक्ष का बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले हफ्ते ही उन्होंने कांग्रेस के साथ तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान) में होने वाले विधानसभा चुनाव में गठबंधन न करने का फैसला किया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस के साथ बीएसपी की मन मुताबिक सीटों पर सहमति नहीं बनी। कांग्रेस और बीजेपी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा, 'वास्तव में बीजेपी ऐंड कंपनी का घृणा हिंसा का अपराध अब सर चढ़कर बोलने लगा है। इन दोनों पार्टियों (कांग्रेस और बीजेपी) की सरकारों द्वारा फैलाई जा रही घृणा और हिंसा के खिलाफ लड़ते हुए बीएसपी दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, मुसलमानों, दूसरे अल्पसंख्यकों और अगड़ी जातियों के आत्मसम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।'

'सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो अकेले लड़ेंगे' बयान में कहा गया है कि मायावती ने कहा कि किसी चुनावी गठबंधन पर अमल करने से पहले बीएसपी ने सम्मानजनक संख्या में सीटें दिए जाने की शर्त रखी है। मायावती ने कहा, 'इसका साफ मतलब है कि बीएसपी किसी गठबंधन में सीटों की भीख नहीं मांगेगी। अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलती हैं तो पार्टी अपने बलबूते पर चुनाव मैदान में उतरेगी।' बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर मायावती ने कहा कि न तो कांग्रेस और न ही बीजेपी अपर कास्ट, गरीब और बाकी लोगों के हित में काम करती है। बीएसपी अध्यक्ष ने साथ ही कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। मायावती ने बीजेपी सरकार को जातिवादी, सांप्रदायिक, घमंडी, दुर्भावनापूर्ण और संकरी सोच वाला करार दिया। एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ उच्च जातियों के समूहों द्वारा चलाए जा रहे प्रदर्शन पर मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी कानून के दुरुपयोग का समर्थन नहीं करती है। बीएसपी ने उत्तर प्रदेश में अपने पिछले 4 कार्यकालों के दौरान यह सुनिश्चित किया था कि इस ऐक्ट का गलत इस्तेमाल न किया जाए।

3 उपचुनाव में एसपी-बीएसपी ने बीजेपी को हराया बीएसपी और समाजवादी पार्टी का गठबंधन होने की सूरत में बीजेपी को यूपी में झटका लग सकता है। यहां लोकसभा की 80 सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य की 71 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं, इस साल यूपी में 3 लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में एसपी-बीएसपी के साथ ने बीजेपी को करारी शिकस्त झेलने पर मजबूर कर दिया था। जानकारों का मानना है कि अगर बीएसपी अकेले चुनाव लड़ती है, तो बीजेपी 2019 में भी राज्य में अच्छा प्रदर्शन दोहराएगी।

गुजरात हिंसा पर यह बोलीं माया वहीं गुजरात में उत्तर भारतीयों के खिलाफ हिंसा पर माया ने कहा, 'जिस किसी ने भी गलत काम किया है उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन उसकी आड़ में यूपी और बिहार के गरीबों, मजदूरों और कारीगरों के परिवारों को हिंसा का शिकार बनाना घोर निंदनीय है। इस प्रकार के भेदभाव से क्षेत्रवाद बढ़ता है और देश कमजोर होता है।'मायावती ने आगे कहा, 'उत्तर भारत के लोगों ने इस प्रकार का भेदभाव कभी भी किसी के साथ नहीं किया है। यहां तक कि गुजरात से ताल्लुक रखने वाले नरेंद्र मोदी को वाराणसी से सांसद चुनकर लोकसभा में भेजा है। वह देश के प्रधानमंत्री हैं। इस मामले में उन्हें तत्काल अपनी बात देश के सामने रखनी चाहिए और इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए कि उनकी बातों का क्या असर वहां के लोगों पर पड़ेगा।


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