• संवाददाता

बिहार: बागियों को जोड़कर ताकत बढ़ाने की कोशिश में कांग्रेस


नई दिल्ली आम चुनाव से पहले बिहार में भी कांग्रेस अपना आधार मजबूत करने में जुट गई है। दरअसल, पार्टी यूपीए में सीटों के बंटवारे में अपनी हिस्सेदारी अधिक चाहती है और इसी कोशिश में कांग्रेस अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में लगी है। इसके लिए पार्टी राज्य के छोटे-छोटे दलों के अलावा पुराने नेताओं के संपर्क में है। एसपी और बीएसपी के साथ गठबंधन नहीं होने और उत्तर प्रदेश में भी अलग चुनाव लड़ने के संकेत के बाद कांग्रेस बिहार में पूरा जोर लगा रही है। इसी क्रम में रविवार को सांसद पप्पू यादव के साथ बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल की मुलाकात हुई। इसके अलावा कांग्रेस ऐसे तमाम पुराने नेताओं के साथ भी संपर्क में है जो कभी पार्टी का हिस्सा थे। इसके अलवा बीजेपी के बागी नेताओं को अपने पाले में रखने की कोशिश में अभी से कांग्रेस जुट गई है। सूत्रों के अनुसार बीजेपी से निष्कासित सांसद कीर्ति आजाद को भी कांग्रेस आम चुनाव में पार्टी टिकट पर दरभंगा में उतार सकती है। 2014 में कीर्ति आजाद बीजेपी के टिकट पर इसी सीट से सांसद बने थे। इसके अलावा शत्रुघ्न सिन्हा को भी पार्टी पाटलिपुत्र सीट से उतार सकती है। हालांकि वह अभी भी बीजेपी से सांसद हैं लेकिन उनके बागी तेवर को देखते हुए उनको दोबारा टिकट मिलना बहुत कठिन होगा। पप्पू यादव से मुलाकत के बारे में कांग्रेस के राज्य प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि यह गैर राजनीतिक मीटिंग थी और इसका कोई खास मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। लेकिन पप्पू यादव ने एनबीटी से कहा कि वह राज्य में तमाम विकल्पों पर विचार कर रहे है। पप्पू यादव तेजस्वी यादव के धुर विरोधी रहे हैं तो ऐसे में कांग्रेस अगर पप्पू यादव को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती है तो आरजेडी की प्रतिक्रिया देखना दिलचस्प होगा। वहीं कांग्रेस से जुड़ने के सवाल पर कीर्ति आजाद ने कहा कि वह बहुत जल्द फैसला लेंगे और उनके सामने सारे विकल्प खुले हुए हैं। हाल ही में कांग्रेस ने मदन मोहन झा को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पहले ही संकेत दे दिया कि वह पुराने संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश के तहत अपने पुराने वोट बैंक को लुभाने की कोशिश करेगी। कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य के कई नेता उनके संपर्क में हैं और आम चुनाव से पहले वे पार्टी में शामिल होंगे। जानकारों के अनुसार कांग्रेस आम चुनाव में राज्य की 40 सीटों में कम से कम 15 सीट चाहती है लेकिन आरजेडी पार्टी के 8 से अधिक सीट देने को तैयार नहीं है। गठबंधन में लेफ्ट, जीतनराम मांझी को भी हिस्सेदारी देनी होगी। यही कारण है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाकर बारगेन क्षमता बढ़ाना चाहती है।


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