• संवाददाता, दिल्ली

अगर किसी को फांसी दी जा रही हो, घर से निकाला जा रहो हो, ऐसे मामलों में ही अविलंब सुनवाई: चीफ जस्टिस


नई दिल्ली भारत के 46वें चीफ जस्टिस पद की शपथ लेते हुए जस्टिस रंजन गोगोई ने अविलंब सुनवाई की परंपरा में बड़ा बदलाव किया है। चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि केसों के अविलंब उल्लेख और सुनवाई के लिए 'मानदंड' तय किए जाएंगे। इसी क्रम में चीफ जस्टिस ने कहा कि जबतक किसी को फांसी पर न चढ़ाया जा रहा हो या घर से न निकाला जा रहा हो, कोई अन्य दूसरे मामले अविलंब सुनवाई के लिए मेंशन नहीं किए जा सकते। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई के शुरुआती 20 मिनट अविलंब सुनवाई के लिए रिजर्व रखे जाने की परपंरा है। शपथ लेने के तुरंत बाद चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि जब तक कुछ मानदंड तय नहीं कर लिये जाते, तब तक मामलों के अविलंब उल्लेख की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा, 'हम मानदंड तय करेंगे, उसके बाद देखेंगे कि कैसे मामलों का उल्लेख किया जाएगा।' चीफ जस्टिस ने कहा, 'अगर किसी को कल फांसी दी जा रही हो तब हम (अत्यावश्यकता को) समझ सकते हैं।' चीफ जस्टिस के इस घोषणा का पहला असर ऐडवोकेट मैथ्यूज नेदुमपरा पर देखने को मिला जो उन्हें बधाई देना चाहते थे। चीफ जस्टिस ने कहा कि चलिए आगे बढ़ते हैं, इसकी कोई जरूरत नहीं है। दूसरा असर ऐडवोकेट प्रशांत भूषण की याचिका पर पड़ा जिसमें वह रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को भारत से निकालने के मामले को अविलंब सुनवाई के लिए लिस्टेड कराना चाहते थे। चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि इस मामले में पहले याचिका दाखिल कीजिए, फिर देखा जाएगा। इस बीच पीएम मोदी ने बुधवार को जस्टिस रंजन गोगोई को प्रधान न्यायाधीश का पद संभालने पर बधाई दी। पीएम ने कहा कि उनके अनुभव और बुद्धिमत्ता से देश को लाभ होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार सुबह 63 वर्षीय न्यायमूर्ति गोगोई को शपथ दिलाई। उनका कार्यकाल लगभग तेरह महीने का होगा और वह 17 नवंबर, 2019 को सेवानिवृत्त होंगे।


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