• संवाददाता

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद यूजर बेस्ड कंपनियां नया कानून चाहती हैं आधार वेरिफिकेशन पर


बेंगलुरु वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में काम करनेवाली कंपनियों से लेकर रेंट पर बाइक देनेवाली कंपनी और इनमें निवेश करनेवालों तक, सभी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से चिंतित हैं जिसमें देश की सर्वोच्च अदालत ने इन कंपनियों को आधार बेस्ड वेरिफिकेशन करने से रोक दिया है। कई कंपनियां सरकार का मनुहार करने में जुट गई हैं कि वह उन्हें आधार का इस्तेमाल जारी रखने का अधिकार देनेवाला कानून लाए। सरकार के पीछे पड़नेवाली लॉबी इंटरनेट ऐंड मोबाइल असोसिएशन ऑफ इंडिया में शामिल पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने अपने सदस्यों के साथ बैठक की ताकि केंद्र के सामने दिया जानेवाला प्रजेंटेशन तैयार किया जा सके। पीसीआई के चेयरमैन विश्वास पटेल ने इसकी पुष्टि टाइम्स ऑफ इंडिया से की। पेमेंट्स कंपनियों के संस्थापक और बड़े-बड़े आधिकारी आपस में विचार-विमर्श कर रहे हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि लॉबी ग्रुप ने उनसे अनौपचारिक बातचीत की और वे इंडस्ट्री की चिंताओं से वाकिफ हैं। पटेल ने कहा, 'अगर यह मुद्दा सुलझाया नहीं गया तो डिजिटल पेमेंट्स के सफर में हम कुछ वर्ष पीछे हो जाएंगे।' किराए पर बाइक देनेवाली बेंगलुरु की कंपनी मेट्रो बाइक्स अब यूजर की पहचान की पुष्टि के लिए आधार की मांग नहीं कर रही है। समस्या यह है कि किसी भी आरटीओ के पास ऑनलाइन डेटाबेस नहीं है, इसलिए ड्राइविंग लाइसेंस से किसी यूजर की पहचान की पुष्टि करना मुश्किल है। ऐसे में अब कंपनी को फिजिकल वेरिफिकेशन करना पड़ेगा जिससे उसका खर्च बढ़ जाएगा। साथ ही, उसके सामने जोखिम भी बढ़ जाएगा। मेट्रो बाइक्स को को-फाउंडर विवेकानंद एच आर ने कहा, 'अब हमें बाइक किराए पर देने से पहले मांगा जानेवाला डिपॉजिट अमाउंट बढ़ाना होगा।' स्टार्टअप इन्क्यूबेटर खोसला लैब्स के सीईओ और यूआईडीएआई के पूर्व टेक्नॉलजी हेड श्रीकांत नाधामुनी ने कहा कि इससे इनोवेशन पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'केवाइसी (नो योर कस्टमर) पर खर्च बढ़ेगा, व्यवस्था में विश्वास घटेगा और ट्रांजैक्शन की लागत बढ़ेगी। जीडीपी में मिलाजुलाकर 80 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राइवेट सेक्टर की है और इसमें छोटे एवं मध्यम आकार की कंपनियों की बड़ी भागीदारी है जो हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हें कठोर निजता प्रावधानों के साथ आधार वेरिफिकेशन की अनुमति मिलनी चाहिए।' आधार पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से वेंचर कैपिटल कम्यूनिटी की भी चिंता में है। एक वेंचर फर्म के पार्टनर ने पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर कहा, 'किसे पता था कि ऐसा होगा! ऑथ-ब्रिज (जो आईडी वेरिफिकेशन सर्विस प्रदान करती है) ने यूआईडीएआई और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से समझौता किया है। इको ने आधार आधारित ट्रांजैक्शन के लिए एनपीसीआई से समझौता किया है। हमने जिस स्टार्टअप में निवेश किया है, हम अब भी उसके नुकसान का आकलन करने में लगे हैं। पता नहीं, हम इससे जूझते हुए नुकसान की भरपाई कर भी पाएंगे।'


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