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मस्जिद में नमाज पर 'सुप्रीम' फैसला, पक्षकार बोले- अब आपसी सहमति से अयोध्या विवाद का भी जल्द


अयोध्या सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में नमाज इस्लाम में अनिवार्य नहीं बताने वाले अपने पूर्व के फैसले को बरकरार रखते हुए इसे बड़ी बेंच में भेजने से इनकार कर दिया है। 1994 के इस्माइल फारूकी के केस की पुनर्विचार याचिका को लार्जर बेंच को सौंपने से इनकार कर खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अयोध्या में दोनों पक्षों ने स्वागत किया है। साथ ही उम्मीद जताई है कि अब आपसी सहमति से राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का भी जल्द हल निकलेगा। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास और बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि अब जल्द ही अयोध्या विवाद का भी हल निकलेगा। वहीं बाबरी मस्जिद के दूसरे पक्षकार हाजी महबूब ने भी इसे बेहतर फैसला बताते हुए कहा कि आपसी सुलह से ही मामला सुलझेगा। महबूब ने कहा कि अब पीएम नरेन्द्र मोदी को दोनों पक्षों को बुलाकर समझौते का प्रयास करना चाहिए , इससे हल निकल सकता है।

अब जल्द मंदिर निर्माण: नृत्य गोपाल दास श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा, ' मंदिर निर्माण होकर रहेगा, यह धीरे-धीरे मजबूत होता जा रहा है।' वहीं जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राम विलास वेदांती ने कहा, 'कोर्ट ने सही फैसला दिया है। इससे साफ हो गया है कि राम मंदिर पर फैसला जल्द ही होगा। अब 2019 के पहले राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा।' वेदांती ने कहा कि सबसे बेहतर होगा जब दोनों पक्षों में आपसी सहमति बन जाए। इसके लिए वह प्रयास कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति का फार्मूला वे पीएम मोदी तथा संघ के नेताओं के निर्देश पर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर के पक्ष में फैसला भी कोर्ट जल्द ही करेगा।

'फैसले का स्वागत, नमाज के लिए मस्जिद जरूरी नहीं' अयोध्या के आम लोग भी फैसले को जल्द सुनने के लिए आतुर दिखे। बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी ने अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद का होना जरूरी नहीं। नमाज तों जंगल में भी अता की जा सकती है। मस्जिद तो एक बेहतर स्थान मात्र ही है। कोर्ट के फैसले से मंदिर-मस्जिद के टाइटल सूट पर फैसला लंबा नहीं खिचेंगा। जो भी फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा, उसे हम मानेंगे। हमारे अब्बा मरहूम हाशिम अंसारी भी यही चाहते थे कि विवाद पर फैसला जल्द हो।'

जल्द निकले रामजन्मभूमि विवाद का हल- योगी उधर, इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामजन्मभूमि विवाद का हल जल्दी से जल्दी निकलना चाहिए और देश की जनता भी यही चाहती है। वहीं इस फैसले पर मुस्लिम पक्षकारों ने एकमत होकर कहा है कि इस फैसले से हमें कोई निराशा नहीं हुई है और न ही मुख्य मुकदमे में इस फैसले से कोई फर्क पड़ेगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया स्वागत ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि अयोध्या मामले की सुनवाई आस्था की बुनियाद पर बिल्कुल नहीं होगी। बोर्ड कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य मौलाना रशीद ने कहा कि अदालत के फैसले का हम सब सम्मान करते हैं। हालांकि हम चाहते थे कि इस्माइल फारूकी वाले मामले को संवैधानिक पीठ के सामने रखा जाए, ताकि मसला हमेशा के लिये हल हो जाए। मौलाना ने कहा कि अब 29 अक्टूबर से अयोध्या मामले की सुनवाई का ऐलान किया गया है, जिससे उम्मीद जगी है कि मामले की अंतिम सुनवाई जल्द से जल्द हो जाएगी।

मस्जिद में नमाज पढ़ना धार्मिक रिवाज, पर फैसले का स्वागत हालांकि बाबरी मस्जिद के दूसरे पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि वह इस बात से समहत नहीं हैं कि नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद का होना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां जहां मस्जिद हो वहां नमाज पढ़ने का धार्मिक रिवाज है, लेकिन कोर्ट के फैसले को हम मानते हैं। आगे जो होगा उसका भी आदर करेंगे।

इस फैसले के बाद वीएचपी बनाएगी रणनीति इस फैसले के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) 5 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाली संत उच्चाधिकार समिति की बैठक मंथन कर रणनीति बनाएगी। वीएचपी केंद्रीय सलाहकार सदस्य पुरूषोत्तम नारायण सिंह ने कहा मस्जिद में नमाज कोई आवश्यक नहीं है। कहीं भी जब पढ़ी जा सकती है तो श्रीराम जन्मभूमि को विवादास्पद बनाना मुस्लिमों के हित में उचित नहीं है। यह निर्णय भविष्य को बल प्रदान करने वाला साबित होगा। वीएचपी के प्रान्तीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि फैसले से मंदिर निर्माण को बल मिलेगा। मंदिर निर्माण और न्यायालय से आए इस फैसले के प्रत्येक पहलुओं पर अब 5 अक्टूबर को दिल्ली मे संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में नए सिरे से संत महंत मंथन कर अपनी व्यापक रणनीति बनाएगी।


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