• संवाददाता

91000 करोड़ का यह लोन बम कहीं फट न जाए


नई दिल्ली इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लोन देनेवाली देश की दिग्गज कपंनी इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशल सर्विसेज लि. (IL&FS) अब खुद कर्ज नहीं चुका पा रही है जिसका सीधा असर देश के वित्तीय बाजारों पर पड़ रहा है। अब इसका डर सता रहा है कि IL&FS की समस्या कहीं पांव पसारना न शुरू कर दे। बहरहाल, आईएलऐंडएफएस समूह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) सहित कई नियामकों की जांच के घेरे में है। क्या है IL&FS का पूरा मामला, जानते हैं...

कहां चूक हुई? IL&FS ग्रुप पर 91 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसे अभी नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है। 91 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में सिर्फ IL&FS के खाते में करीब 35 हजार करोड़ रुपये जबकि इसकी फाइनैंशल सर्विसेज कंपनी पर 17 हजार करोड़ रुपये बकाया है। गौरतलब है कि 57 हजार करोड़ रुपये बैंकों का बकाया है और इसमें अधिकांश हिस्सेदारी सार्वजनिक बैंकों की है।

नकदी संकट का मतलब यह है कि ग्रुप पिछले कुछ महीनों से ईएमआई चुका नहीं पा रहा है। सोमवार को इस महीने यह तीसरी बार कमर्शल पेपर्स पर ब्याज चुकाने में असफल रहा। इसी महीने पता चला था कि IL&FS ग्रुप स्मॉल इंडस्ट्रीज डिवेलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) का 1,000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुका पाया जबकि उसकी एक सहायक कंपनी भी 500 करोड़ रुपये का लोन नहीं लौटा पाई। IL&FS को अगले छह महीनों में 3,600 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाना है।

ऐसे हुआ खुलासा नकदी संकट की समस्या में फंसे IL&FS ग्रुप के लिए नीम पर करेला चढ़ा दिया ब्लूमबर्ग न्यू एजेंसी की उस रिपोर्ट में जिसमें सिडबी बैंक के हवाले से कहा गया कि उसने IL&FS के खिलाफ कंपनी नैशनल लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) में इन्सॉल्वंसी ऐप्लिकेशन फाइल किया है।

इस्तीफों का दौर कंपनी के सीईओ रमेश सी बावा तथा कुछ प्रमुख बोर्ड सदस्यों ने IL&FS से कथित रूप से कर्ज भुगतान में असफल रहने और कामकाज संचालन के संकट के बीच इस्तीफा दे दिया। उनके अलावा, कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों- रेणु चाल्लू, सुरिंदर सिंह कोहली, शुभलक्ष्मी पानसे और उदय वेद के साथ-साथ गैर-कार्यकारी निदेशक वैभव कपूर ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। खबर यह भी आई कि एलआईसी के प्रबंध निदेशक हेमंत भार्गव ने IL&FS के गैर-कार्यकारी चेयरमैन पद से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। हालांकि वह उसके बोर्ड में निदेशक के तौर पर बने हैं।

IL&FS का दावा वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनी आईएलएंडएफएस ने दावा किया कि यदि प्राधिकरणों के पास फंसा 16 हजार करोड़ रुपया समय से जारी कर दिया गया होता तो मौजूदा संकट खड़ा नहीं होता। कंपनी ने कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में यह दावा किया है। इस पत्र में कंपनी ने कहा, 'हमारे मामले में प्राधिकरणों के पास फंसे पैसे जो कि करीब 16 हजार करोड़ रुपये हैं, का समय से भुगतान किया गया होता तो हम ऐसी स्थिति में कभी नहीं फंसते।'

LIC की मदद IL&FS के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की हुई आपात बैठक में कंपनी को मौजूदा नकदी संकट से उबारने के तौर तरीकों पर विचार किया गया। समझा जाता है कि उसके सबसे बड़े शेयरधारक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने कंपनी के आगामी राइट इशू में निवेश करने और कंपनी को कुछ कार्यशील पूंजी कर्ज देने पर सहमति जताई। IL&FS में एलआईसी की 25.34 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी को अपने शेयरधारकों से 3,000 करोड़ रुपये की त्वरित पूंजी की आवश्यकता है। IL&FS के प्रमुख शेयरधारकों, एलआईसी, स्टेट बैंक और एचडीएफसी ने कंपनी की इससे पहले हुई बैठक में शर्त रखी थी कि कंपनी में कोई भी नया धन देने से पहले कंपनी को अपनी संपत्तियों अथवा गैर-प्रमुख व्यवसाय के जरिए धन जुटाना होगा।


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