• Umesh Singh,Delhi

मुंबई धमाकों के बाद राजनीति का अपराधिकरण सबसे ज्यादा महसूस किया गया: सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली राजनीति के अपराधिकरण को सबसे ज्यादा 1993 के मुंबई बम धमाकों के दौरान महसूस किया गया। एनएन वोहरा कमिटी की रिपोर्ट में राजनीति के अपराधिकरण का अध्ययन किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमिटी ने कई सरकारी एजेंसियों के ऑब्जर्वेशन के हवाले से कहा था कि क्रिमिनल नेटवर्क के समांतर सरकार चला रहा है। कमिटी ने कई ऐसे गैंग का जिक्र भी किया था, जो राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के संरक्षण में चल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात उस दौरान कही जब उसने आदेश दिया कि सभी उम्मीदवारों को चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी भी चुनाव आयोग को देनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि वोहरा कमिटी ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई थी कि कई अपराधी स्थानीय निकायों, विधानसभाओं और संसद के लिए भी चुने जाते हैं। सीजेआई दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। सीजेआई ने यह भी कहा, 'भारतीय राजनीति के लिए राजनीति का अपराधिकरण कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसे सबसे ज्यादा 1993 के मुंबई धमाकों के दौरान महसूस किया गया।'

बेंच ने कहा, 'इन धमाकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, इसके बाद वोहरा कमिटी को इस पर काम करने का जिम्मा सौंपा गया। इसमें अपराधियों, नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के बीच संबंधों पर भी अध्ययन करना शामिल था।'

अक्टूबर 1993 को दाखिल की गई रिपोर्ट में कहा गया है, 'बड़े शहरों में इसकी आमदनी का बड़ा जरिए रियल एस्टेट है, बलपूर्वक जमीन और बिल्डिंगों पर कब्जा, बेहद सस्ते दाम पर जमीन खरीदकर महंगे दाम पर बेचना आदि। समय के साथ-साथ बड़े नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के साथ संबंध बनाने के लिए पैसे का इस्तेमाल किया जाने लगा। इसके अलावा बाहुबल तैयार करने के लिए पैसे का इस्तेमाल हुआ और उसका इस्तेमाल चुनावों में होने लगा।'

सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं को चुनाव लड़ने से तो नहीं रोका लेकिन काफी सख्ती जरूर दिखाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन कैंडिडेट के खिलाफ क्रिमिनल केस पेंडिंग हो, वह नामांकन के वक्त हलफनामा जब दाखिल करें तो क्रिमिनल केस के बारे में बोल्ड अक्षरों में लिखें। वोटर को इस बात का पूरा अधिकार है कि वह जाने कि कैंडिडेट का क्रिमिनल रिकॉर्ड क्या है। अदालत ने कहा कि अगर कोई कैंडिडेट चुनाव के लिए खड़ा होता है तो पॉलिटिकल पार्टी उसके क्रिमिनल रिकॉर्ड के बारे में मीडिया के जरिये विस्तार से लोगों को बताए। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक सभी प्रकार के विज्ञापनों में इसकी जानकारी देने को कहा गया है।


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