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राफेल: बीजेपी का आरोप, दुश्मन देशों को गोपनीय जानकारी देना चाहते हैं राहुल गांधी जेपीसी की मांग कर


नई दिल्ली राफेल डील को लेकर देश में मचा सियासी भूचाल अभी थमा नहीं है। सोमवार को भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार को घेरने की कोशिश की। इस बीच, बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी एक अनलोडेड एयरक्राफ्ट की कीमत की तुलना फुल लोडेड एयरक्राफ्ट से करके देश को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष जेपीसी की मांग कर विरोधी देशों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीसी की मांग का उद्देश्य रक्षा तैयारियों को लेकर गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक कराना है। उन्होंने कहा कि जिन देशों से हमें अपनी रक्षा की तैयारी करनी है, वे उन्हीं देशों को पूरी जानकारी पहुंचाना चाहते हैं। ऐसे में देश को सामरिक तौर पर कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। बीजेपी नेता ने कहा कि राफेल डील रद्द करने और वायु सेना के मनोबल को कम करने के लिए जो षड्‍यंत्र रचा जा रहा है, इन सबका मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाना है।

वाड्रा के दोस्त का नाम भी आया इसके बाद शेखावत ने मामले में नई जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी स्वहितों के लिए इस डील को कैंसल कराने में लगी हुई है। उन्होंने गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के दोस्त एवं दलाल संजय भंडारी का नाम सामने रखते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि संजय भंडारी, रॉबर्ट वाड्रा के टिकट बुक कराने से लेकर प्रॉपर्टी के बड़े साझेदार हैं। दोनों कई डिफेंस एक्सपो में साथ-साथ देखे गए हैं। शेखावत ने दावा किया कि तत्कालीन UPA सरकार चाहती थी कि वाड्रा के दोस्त की कंपनी के साथ मिलकर दसॉ राफेल डील करे और इसी कारण यह डील उस समय कैंसल हो गई थी।

उन्होंने बताया कि संजय भंडारी की कंपनी 2008 में बनी है और ऐसी डील में बिचौलिये का काम करती है। इस कंपनी को आज तक कोई बड़ी डील भी नहीं मिली है। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि संजय भंडारी की कंपनी और वाड्रा के व्यावसायिक हितों के चक्कर में देश के रक्षाहितों से समझौता किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय डील नहीं हुई और अब कांग्रेस दसॉ को सबक सिखाना चाहती है कि वे अब इस डील को होने नहीं देंगे। कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी नेता ने कहा कि UPA के शासनकाल के दौरान जो डील हुई थी उसके मुताबिक 18 एयरक्राफ्ट रेडी टु सर्व स्थिति में आयात किए जानेवाले थे, वे केवल एक फ्लाइंग मशीन मात्र थे। उन्होंने कहा कि कोई भी बेयर एयरक्राफ्ट इस स्थिति में आते हैं तो उसकी उपयोगिता ज्यादा नहीं रहती है। अब पूर्ण एयरक्राफ्ट से इसकी तुलना कर षड्यंत्र रचने की कोशिश की जा रही है।

बीजेपी नेता ने समझाया अंतर उन्होंने बताया कि बेयर और फुल एयरक्राफ्ट के रेट को लेकर कांग्रेस की ओर से भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई। UPA के समय में 526 करोड़ रुपये प्रति बेयर एयरक्राफ्ट की कीमत तय थी। उसके साथ महंगाई दर की शर्त भी जोड़ी गई थी। ऐसे में जब वह देश को मिलता तो उसकी तुलना में मोदी सरकार में हुई डील 9 फीसदी सस्ती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने फुली लोडेड वर्जन खरीदना तय किया है। UPA के समय में ऐसे वर्जन की डील जिस रेट पर हो रही थी कि उससे यह 20 फीसदी सस्ती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जवाब देना होगा कि वह किस मकसद से देश के सामने गलत जानकारी रख रही है।

शेखावत ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि HAL को कैंसल कर प्राइवेट कंपनी से डील की गई है। उन्होंने कहा कि क्या राहुल गांधी बताएंगे कि यूपीए के समय HAL के साथ इस तरह की डील फाइनल क्यों नहीं हुई? उन्होंने बताया कि दैसॉ और एचएएल के बीच निर्माण में भूमिका को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी। उपकरण को बनाने में जितना समय लगेगा उसके हिसाब से रेट तय होता।

देश की 70 कंपनियों के पास अब भी मौके बीजेपी नेता ने कहा कि यूपीए के समय ऑफसेट का कानून बना था। उसके अनुसार कोई भी कंपनी जो भारत में रक्षा उपकरण खरीद का समझौता करेगी, उसे 30 फीसदी भारत से खरीदना होगा। विदेशी कंपनी भारत में किससे खरीदे, यह स्पष्ट नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकारी कंपनी HAL के साथ डील यूपीए के शासनकाल में ही खत्म हो चुकी थी। अब तक डील 36 एयरक्राफ्ट की हुई है, ये फुली लोडेड होंगे। इसके अलावा 108 एयरक्राफ्ट का देश में निर्माण होना है, वह अब भी फाइनल नहीं हुआ है। देश की 70 कंपनियों के पास इसमें शामिल होने का विकल्प खुला हुआ है।


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