• shiv vardhan singh

माया ने यूं बिगाड़ा कांग्रेस का '2019 गेम'


नई दिल्ली 2019 के आम चुनावों से पहले बीजेपी को राज्यों में घेरने की रणनीति पर काम कर रही कांग्रेस को झटका लगा है। यह झटका बहुजन समाज पार्टी की तरफ से आया है। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला लेते हुए विरोधी खेमे के अजीत जोगी के साथ जाने का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं, मायावती ने मध्य प्रदेश विधानसभा की 22 सीटों पर भी चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। आपको बता दें कि इस साल के अंत में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस के लिए इन राज्यों में जीत बहुत जरूरी है क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2019 से पहले ही पार्टी की संभावनाएं क्षीण हो जाएंगी। इस लिहाज से कांग्रेस ने इन राज्यों में गठबंधन के लिए भी खुद को ओपन किया था। खासकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की बातचीत बीएसपी के साथ चल रही थी। मायावती ने यूपी में महागठबंधन के साथ इन तीनों राज्यों में भी सम्मानजनक सीटों की मांग की थी। सीट शेयरिंग को लेकर कोई फॉर्म्युला नहीं बनने की वजह से मायावती ने अजीत जोगी के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया। यह झटका उस समय लगा है जब कांग्रेस की स्थानीय लीडरशिप मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, दोनों ही जगहों पर बीएसपी को अपने साथ मानकर चल रही थी।

बीएसपी ने मांग दी ज्यादा सीटें, इसलिए बिगड़ा खेल? रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएसपी ने मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में 50 और छत्तीसगढ़ की 90 सदस्यीय विधानसभा में 15 सीटों की मांग की थी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी के दबाव की वजह से मायावती ने ऐसी मांग रखी कि गठबंधन संभव ही न हो। उधर, राजस्थान कांग्रेस प्रदेश में किसी भी तरह का गठबंधन नहीं करने की वकालत की थी।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में बीएसपी के इस फैसले के मायने छत्तीसगढ़ के बाद अब अगर मध्य प्रदेश में भी मायावती कांग्रेस से अलग लड़ने का फैसला करती हैं तो यह ग्रैंड ओल्ड पार्टी के लिए तगड़ा झटका होगा। इन दोनों राज्यों में छोटा सा ही सही लेकिन बीएसपी का अपना वोट बैंक है। महीनों पहले से कांग्रेस-बीएसपी के संभावित गठबंधन का जिक्र कर कांग्रेस बीजेपी विरोधी वोटों को एकजुट करने की कोशिश में लगी थी। अब बीएसपी ने अपनी राह जुदा कर ली हैं तो यह कांग्रेस के लिए समस्या की बात है।

वोटों का पूरा खेल समझिए छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 41 फीसदी वोट मिले और 90 में से 49 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस को 40.3 फीसदी वोट मिले और उसके खाते में 39 सीटें आईं। वहीं बीएसपी को 4.3 फीसदी वोट मिले और पार्टी को एक सीट पर जीत मिली। यहां बीजेपी और कांग्रेस के वोट शेयर में एक फीसदी से भी कम का फासला था। अगर कांग्रेस को बीएसपी का साथ मिल जाता तो छत्तीसगढ़ में पार्टी की संभावना मजबूत होती।

मध्य प्रदेश: इसी तरह मध्य प्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 44.88 फीसदी वोट मिले थे। विधानसभा की कुल 230 सीटों में से 165 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस को 36.38 फीसदी वोट मिले जबकि 58 सीटों पर जीत मिली। बीएसपी को यहां 6.29 फीसदी वोट मिले और उसके खाते में 4 सीटें आईं। यानी बीएसपी मध्य प्रदेश में भी छोटा ही सही असर जरूर रखती है।

सत्ता विरोधी वोट बंट जाएगा? मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगातार 15 सालों से बीजेपी शासन में है। इस बार केंद्र और सूबे, दोनों में बीजेपी सरकार होने की वजह से कांग्रेस को उम्मीद है कि सत्ता विरोधी वोट उसे मिलेंगे। सत्ता विरोधी वोटों में बिखराव न आए इसलिए कांग्रेस बीएसपी से गठबंधन की चर्चा में शामिल थी। छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की मौजूदगी पहले से ही सत्ता विरोधी वोट में घुसपैठ की ताक में थी और अब उन्हें मायावती का भी साथ मिल गया है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि सत्ता विरोधी वोटों में सेंध जरूर लगेगी।

यूपी में महागठबंधन के सियासी भविष्य पर भी सवाल बीएसपी सुप्रीमो मायावती के इस पॉलिटिकल स्ट्रोक ने यूपी में महागठबंधन की कोशिशों में शामिल लोगों की नींद उड़ा दी है। यूपी की 80 लोकसभा सीटों पर बीजेपी का विजय रथ रोकने के लिए समाजवादी पार्टी, बीएसपी, कांग्रेस और आरएलडी के बीच महागठबंधन की कोशिशें हो रही हैं। एसपी मुखिया अखिलेश यादव ने तो यहां तक कहा है कि वह निजी नुकसान की शर्त पर भी महागठबंधन को बनने देखना चाहते हैं, लेकिन मायावती ऐसे किसी मूड में नजर नहीं आ रहीं।

पिछले दिनों मायावती ने साफ कर दिया कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो वह अकेले चुनाव में उतर जाएंगी। भले ही आज यूपी से मायावती के पास एक भी सांसद न हों या 2017 के विधानसभा चुनावों में उनका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा हो, पर बीएसपी को यूपी में कोई हल्के में नहीं ले सकता। बीएसपी के पास अपना कैडर वोट है जो मायावती के इशारे पर वोट करता है। इस लिहाज से मायावती महागठबंधन का अनिवार्य हिस्सा मानी जा रही हैं।

ऐसे में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मायावती के राजनीतिक कदम महागठबंधन के सियासी भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। 2014 के चुनावों में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को 72 सीटों पर जीत मिली थी। एक तरह से यूपी ने ही बीजेपी को केंद्र की राजनीति में बहुमत दिलाया। महागठबंधन की कवायद के बाद बीजेपी भी यूपी को लेकर चिंतित है। ऐसे में मायावती के यह पॉलिटिकल कदम बीजेपी को रास आ रहे होंगे, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।


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