• आकांशा त्रिपाठी

तीन तलाक बिल पर दी अध्यादेश को मंजूरी


नई दिल्ली केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में लटके तीन तलाक + (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने वाले बिल को कानूनी रूप देने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल के अहम पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस बिल से मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिलेगा। जानिए तीन तलाक कानून में मुस्लिम महिलाओं को क्या पावर दी गई है...

कब दर्ज होगा 3 तलाक का केस केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है।

समझौते कि लिए क्या है शर्त केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए है। कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है। पत्नी की पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मैजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ।

बेल के लिए क्या है शर्त कानून के तहत मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है, लेकिन पत्नी का पक्ष सुनने के बाद। केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह पति-पत्नी के बीच का निजी मामला है। पत्नी ने गुहार लगाई है, इसलिए उसका पक्ष सुना जाना जरूरी होगा।

तीन तलाक अध्यादेश को मोदी सरकार ने दी मंजूरी

गुजारे के लिए क्या है प्रावधान तीन तलाक पर कानून में छोटे बच्चों की कस्टडी मां को दिए जाने का प्रावधान है। पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार मैजिस्ट्रेट तय करेंगे, जिसे पति को देना होगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट + की संवैधानिक बेंच ने तीन तलाक बिल को निरस्त किया था। दो जजों ने इसे असंवैधानिक कहा था, एक जज ने पाप बताया था। इसके बाद दो जजों ने इस पर संसद को कानून बनाने को कहा था। संसद में यह बिल लोकसभा से तो पास हुआ, लेकिन राज्यसभा में अटक गया। इसके बाद इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए सरकार ने अध्यादेश का रास्ता चुना है। हालांकि 6 महीने के अंदर इस पर संसद की मुहर लगनी जरूरी है। सरकार के लिए यह फिर बड़ी चुनौती होगी।

सरकार ने बताए 3 तलाक के आंकड़े सरकार ने अध्यादेश पर जानकारी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब तक तीन तलाक के आंकड़े भी जारी किए। प्रसाद ने बताया कि जनवरी 2017 से 13 सितंबर 2018 तक 430 तीन तलाक की घटनाएं मिली हैं। इनमें से 229 सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से पहले के हैं, जबकि 201 जजमेंट के बाद के हैं। 3 तलाक के सबसे ज्यादा मामले यूपी में आए। यूपी में जनवरी 17 से पहले 126 केस आए। फैसले के बाद 120 केस सामने आए।


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