• संवाददाता, दिल्ली

शेयर बाजार में को क्यों मचा हाहाकार


नई दिल्ली बिकवाली का दबाव में वृद्धि ने शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक को बड़ी गिरावट की ओर धकेल दिया। सोमवार को सेंसेक्स 505.13 पॉइंट जबकि निफ्टी 137.45 पॉइंट टूटकर क्रमशः 37,585.51 और 11,377.7 अंक पर बंद हुए + । दरअसल, वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध (ग्लोबल ट्रेड वॉर) को लेकर पैदा हुए तनाव से निवेशकों में खलबली मचा दी। वहीं, पिछले सप्ताह सरकार ने गिरते रुपये को थामने और चालू खाता घाटे को पाटने के मकसद से कई कदमों की घोषणा की थी, जो निवेशकों को आश्वस्त करने में असफल रहे। सोमवार को मार्केट में खलबली मचने के ये पांच प्रमुख कारण हैं...

चीनी सामानों पर ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सोमवार को नए टैरिफ्स की घोषणा कर सकते हैं। चीन के सत्ताधारी दल चाइनीज कम्यूनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, 'अमेरिका के लिए तनाव बढ़ाने की कोशिश करना कोई नई बात नहीं है ताकि समझौते के टेबल पर ज्यादा-से-ज्यादा हित साधा जा सके। अमेरिका के एकतरफा और दादागिरी भरे इन कदमों को चीन से मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।' अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढ़ने की आशंका में चीन, हॉन्ग कॉन्ग, कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई शेयर बाजार अब तक 1.5 प्रतिशत तक टूट चुके हैं।

असफल रही सरकारी की पांच सूत्री योजना मोदी सरकार ने इसी सप्ताह देश के आर्थिक हालात का विश्लेषण किया और चालू खाता घाटा को नियंत्रण में रखने और पूंजी आकर्षित करने के लिए एक पांच सूत्री अजेंडा की घोषणा की। हालांकि, निर्मल बांग इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज जैसे ब्रोकरेजेज का मानना है कि इसमें कोई बड़ी घोषणा नहीं है और जो भी कदम उठाए गए, उनका फोकस सिर्फ पूंजी आकर्षित करने के लिए नीतियों में बदलाव पर है। डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता रुपया भारतीय लोगों और निवेशकों में डर का माहौल पैदा कर रहा है। ग्लोबल ट्रेड वॉर और चालू घाटे में बढ़ोतरी की वजह से रुपया फिसलकर 72 तक पहुंच गया। हालांकि, इस माहौल में भी मुनाफा कमाने का मौका है, लेकिन इसके लिए इंटरनैशनल म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना होगा।रुपये में लगातार होती गिरावट को देखते हुए आप अपना पैसा इंटरनैशनल म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। इसमें पैसा विदेशी बाजार में लगता है, जिसमें कारोबार डॉलर में होता है। ऐसे में रुपये की कीमत कम होने पर आपको फायदा और उसमें सुधार होने पर आपको नुकसान का चांस है।एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाल के सालों में अमेरिकी बाजार आधारित फंड्स ने डॉलर की मजबूती का फायदा लिया है। इसमें मोतीवाल ओसवाल (100 ETF), कोटक यूएस इक्विटी स्टैंडर्ड आदि के उदाहरण मौजूद हैं।विदेशी बाजार में निवेश करने का लंबे वक्त में भी फायदा दहै। इससे आपका पोर्टफोलियो भौगोलिक विविधीकरण वाला हो जाता है, जिससे घरेलू मार्केट का इसपर उतना असर नहीं रह जाता। ऐसे में आगे भी जब घरेलू मार्केट या अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजरेगी तब आपको स्थिरता मिलने की उम्मीद है।विदेशी फंड से होनेवाले मुनाफे पर टैक्स देनदारी भी बहुत ज्यादा नहीं होती। फिलहाल घरेलू इक्विटी से होनेवाले कैपिटल गेन पर 10 प्रतिशत टैक्स (एक साल होने पर बाद) देना होता है। वहीं, इंटरनैशनल फंड में निवेश पर भी काफी ज्यादा टैक्स देनदारी नहीं बनती। अगर इंटरनैशनल म्यूचुअल फंड्स में निवेश तीन साल से ज्यादा रहा तब आपको कैपिटल गेन पर 20% टैक्स देना होता है।सीधा हिसाब है कि अगर रुपया कमजोर होगा तो भविष्य में विदेशी पढ़ाई और घूमने का खर्च बढ़ जाएगा। इसलिए अगर आप भविष्य में अपने बच्चे को विदेश में पढ़ने भेजना चाहते हैं या फिर विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं तो भी इंटरनैशनल म्यूचुअल फंड्स ठीक रहेंगे। एक्सपर्ट फिलहाल यूएस मार्केट बेस्ड इंटरनैशनल म्यूचुअल फंड्स में निवेश की सलाह दे रहे हैं, बाकी में नुकसान होने का अंदेशा ज्यादा है। साथ ही इसमें भी आपको घरेलू निवेश की तरह नजर बनाए रखनी होगी। (सोर्स-इकनॉमिक टाइम्स)

रुपया भी गिरा सोमवार को रुपये में बड़ी गिरावट आई। रुपया आज शुरुआती कारोबार में 81 पैसे टूटकर 72.65 पर आ गया । इससे स्पष्ट हो गया कि मसाला बॉन्ड्स पर विदहोल्डिंग टैक्स हटाने, फॉरन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंस् (FPIs) को राहत देने, चालू खाता घाटे को नियंत्रण में रखने और रुपये में गिरावट थामने के लिए गैर-जरूरी सामानों के आयात में कटौती जैसे सरकारी प्रयास भी रुपये को मजबूती देने में असफल रहे।

विदेशी पूंजी की निकासी रुपये में गिरावट से विदेशी निवेशकों का मिजाज बिगाड़ दिया। नतीजतन, वे भारतीय बाजार से पैसे निकालने लगे। आंकड़ों के मुताबिक, फॉरन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने 3 से 14 सितंबर के बीच 4,318 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए और डेट मार्केट से उन्होंने 5,088 करोड़ रुपये निकाल लिए। इस तरह, कुल मिलाकर इस महीने 9,406 करोड़ रुपये निकल चुके हैं।

डरा रहा है टेक्निकल चार्ट बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि साप्ताहिक पैमाने पर हैमर कैंडल सकारात्मक संकेत दे रहा था जबतक कि इंडेक्स 11,600 के नीचे के स्तर पर रहा था, लेकिन अब उथल-पुथल बढ़ सकती है। लोअर टॉप्स और बॉटम्स का नेगेटिव सेक्वेंस इंटैक्ट है।


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