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विजय माल्या मामले पर SBI की सफाई, हमारी तरफ से नहीं हुई ढील


नई दिल्ली शराब कारोबारी विजय माल्या के हालिया बयानों पर हुए विवाद के बीच भारत के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अपनी सफाई पेश की है। एसबीआई द्वारा जारी बयान में कहा गया कि किंगफिशर से जुड़े लोन डिफॉल्ट केस से निपटने के लिए उनकी तरफ से कोई ढील नहीं हुई है। दरअसल, माल्या ने कुछ वक्त पहले एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने लोन देने के मामले में बैंकों को भी दोषी बताया था। बैंक के बयान के आने से पहले यह बात भी सामने आई थी, कि एसबीआई ने फरवरी 2016 में बाकी सभी बैंकों (जिनसे माल्या ने कर्ज लिया हुआ है) को सलाह दी थी कि वह माल्या के देश छोड़ने से पहले सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लें। लेकिन उस वक्त बैंकों ने एसबीआई की नहीं सुनी। इसके बाद माल्या ने 2 मार्च 2016 को भारत छोड़ दिया तब उसके 4 दिन बाद 13 बैंक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

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अब जारी बयान में एसबीआई ने कहा, 'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यह साफ करता है कि हमारी ओर से लोन डिफॉल्ट के किसी मामले से निपटने के लिए कोई ढील नहीं बरती गई, चाहे वह किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़ा मामला ही क्यों न हो। बैंक डिफॉल्ट लोन को रिकवर करने के लिए हरसंभव कोशिश करता रहा है।' माल्या पर 13 से ज्यादा बैंकों का 9 हजार करोड़ रुपये कर्ज है। इस कर्ज में सबसे ज्यादा पैसा एसबीआई से ही लिया गया है।

बता दें कि इससे पहले माल्या ने खत लिखकर अपना बचाव किया था। खत में माल्या ने लिखा था, 'एसबीआई और अन्य बैंकों को उनकी कंपनी की हालत का अंदाजा था, बावजूद उसके वह उसे कर्ज देते रहे। माल्या ने आगे कहा था कि उसे बैंक घोटालों का पोस्टर ब्वॉय बना दिया गया जबकि मामले में बैंकों काभी दोष हैं।'

बैंकों द्वारा दी गई अर्जी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि, 'कंपनी की हालत जानते हुए उन्होंने लोन पास क्यों किए थे। जबकि उस वक्त तक माल्या लोन डिफॉल्टर सूची में आ चुके थे और कानूनी प्रक्रियाओं का भी सामना कर रहे थे।'

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पहले ही कह चुके थे देश छोड़ने की बात माल्या जाने से पहले ही भारत छोड़कर यूके शिफ्ट होने की बात कह चुके थे। यह बयान उन्होंने यूनाइटेड स्प्रिट्स के चैयरमेन पद से इस्तीफा देने के दौरान कही थी। तब उन्होंने यूके की डियागो को यह कंपनी बेच दी थी। इस डील से माल्या को 515 करोड़ रुपये मिले थे। उस वक्त एसबीआई ने माल्या को डील से मिले पैसों पर अपना हक जताया था। हालांकि वह मामला अभी लंबित है।


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