• Umesh Singh,Delhi

टैक्स में कटौती बिना सरकार कम कर सकती है पेट्रोल-डीजल के दाम, ये हैं तरीके


नई दिल्ली सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें नए रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 80.73 रुपये और डीजल 72.83 रुपये में बिक रहा है। बता दें कि टैक्स कम होने की वजह से दिल्ली की तेल कीमत मेट्रो शहरों और कई राज्यों की राजधानियों के मुकाबले कम है। वहीं, पिछले 4 साल में पेट्रो प्रॉडक्ट पर एक्साइज ड्यूटी दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 2014-15 में यह 99,184 करोड़ रुपये थी जो 2017-18 में 2,29,019 करोड़ रुपये हो गई है। वहीं राज्यों की VAT से होने वाली कमाई में भी इस दौरान वृद्धि हुई है। सरकार चाहे तो कुछ नीतियों के जरिए बिना टैक्स में कटौती किए पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम कर सकती है।

जीएसटी पेट्रोल और डीजल के खुदरा मूल्य में लगभग आधा टैक्स होता है। वर्तमान में GST में 28 फीसदी टैक्स स्लैब सबसे ज्यादा है। अगर सरकार पेट्रोल-डीजल का स्लैब 40 फीसदी भी रखती है, तब भी इसकी कीमत में कमी आएगी।

रिटेलर्स को मिले सस्ता क्रूड तेल की बढ़ती कीमतों से ओएनजीसी का भी फायदा बढ़ गया है। ONGC 20 फीसदी कच्चे तेल का सप्लायर है। रिटेलर को सस्ती दरों में भी कच्चा तेल दिया जा सकता है। इसके बदले में सरकार कंपनी से कम फायदा ले सकती है।

​रुपया मजबूत पर डॉलर के सामने क्यों बेदम? डॉलर के मुकाबले रुपया रेकॉर्ड निचले स्तर पर है। अमेरिकी डॉलर के सामने रुपया इस साल 12 फीसदी कमजोर होकर 72 के पार चला गया है। सरकार इसके लिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि सहित बाहरी कारणों को जिम्मेदार बता रही है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में रुपया दूसरे कई देशों की करंसी के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है। आइए रुपये की कमजोरी और मजबूती के कारणों पर डालें नजर

रेकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, 72.50 के पार

​रुपया मजबूत पर डॉलर के सामने क्यों बेदम? डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आई है, लेकिन यह सबसे कमजोर नहीं है। यदि पिछले 5 साल का डेटा देखें तो पता चलता है कि रुपया दूसरी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है। हालांकि, अन्य करंसी के मुकाबले डॉलर का प्रभाव अधिक होता है, क्योंकि अधिकतर अंतरराष्ट्रीय सौदे डॉलर में ही होते हैं। इस बीच डॉलर अधिकतर देशों की करंसी के मुकाबले मजबूत हो रहा है।

​रुपया मजबूत पर डॉलर के सामने क्यों बेदम? अमेरिका के कई घरेलू कारणों ने दूसरी कंरसी के मुकाबले डॉलर को मजबूत बनाया है। 2008 के वित्तीय संकट से उबरने के बाद अमेरिकन फेडरल रिजर्व (सेंट्रल बैंक) ने महंगी मौद्रिक नीति को खत्म कर दिया है। करंसी की सप्लाई में कमी से डिमांड बढ़ी और डॉलर मजबूत होने लगा। इसके अलावा, अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में वृद्धि की और यूरोपियन केंद्रीय बैंक ने कटौती की। इसका मतलब है कि डॉलर डिपॉजिट पर यूरो के मुकाबले अधिक रिटर्न मिलेगा। इस वजह से भी डॉलर की डिमांड बढ़ी।

​रुपया मजबूत पर डॉलर के सामने क्यों बेदम? यह आमतौर पर डिमांड और सप्लाई से यह तय होता है। लगभग सभी देश अपनी करंसी की वैल्यू तय करने के लिए फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट तय करते हैं। मूल रूप से इसका मतलब है कि मुद्रा उस मूल्य के लायक है जो एक खरीदार इसके लिए भुगतान करने को तैयार है। इसका भाव बाजार की ताकतों द्वारा निर्धारित किया जाता है और आर्थिक स्थिरता, मुद्रास्फीति, विदेशी व्यापार जैसे कारकों पर निर्भर करता है।

​रुपया मजबूत पर डॉलर के सामने क्यों बेदम? अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण करंसियों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए इसका प्रयोग बहुत ज्यादा होता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी भूमिका को देखते हुए अधिकतर देश विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर रखते हैं, इस वजह से डॉलर के विनिमय दर में वृद्धि होती है।

​रुपया मजबूत पर डॉलर के सामने क्यों बेदम? 2013 और 2018 के आंकड़ों की तुलना करें तो रुपया ऑस्ट्रेलियन डॉलर, कैनेडियन डॉलर, मलयेशियाई रिंग्गित, ब्रिटिश पाउंड, यूरो, चाइनीज युआन के खिलाफ मजबूत हुआ है, लेकिन अमेरिकी डॉलर के अलावा सिंगापुर डॉलर, स्विस फ्रैंक के मुकाबले भी मामूली गिरावट आई है।

​रुपया मजबूत पर डॉलर के सामने क्यों बेदम? अमेरिकी डॉलर दुनिया की दूसरी करंसियों के मुकाबले मजबूत हो रहा है।

फ्यूचर ट्रेडिंग कुछ वित्तीय अनुबंध होते हैं जो पहले से निर्धारित तारीख पर तेल को बेचने या खरीदने के लिए किए जाते हैं। मौजूदा कीमतों पर भविष्य में तेल या अन्य सामग्री खरीदने का यह भी एक तरीका है। इससे ग्राहकों को कीमतों के बढ़ने के बावजूद कम कीमत में जरूरत पड़ने पर तेल मिल सकता है। मंत्रालय ने इसे मंजूरी दे दी है लेकिन सेबी से अनुमति मिलनी बाकी है।

क्रूड डिस्काउंट OPEC पश्चिमी देशों के मुकाबले एशिया के देशों को ऊंची कीमतों में तेल बेचता है। सरकार OPEC पर दबाव बनाने के लिए दूसरे देशों से संपर्क कर रही है, ताकि उन्हें भी डिस्काउंट मिल सके।


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