• shiv vardhan singh

लगातार बढ़ रहा समुद्र स्तर, बैंकॉक पर मंडराया डूबने का खतरा


नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन इन दिनों एक जाना-पहचाना शब्द बन गया है और पूरी दुनिया इससे पीड़ित दिख रही है। ताजा भविष्यवाणी, थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक के लिए हुई है। जानकारों का मानना है कि जिस तरह से समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है उससे आने वाले 12-13 सालों में बैंकॉक का बड़ा हिस्सा बाढ़ में डूब जाएगा। इन दिनों बैंकॉक जलवायु परिवर्तन पर होने वाली यूएन कॉन्फ्रेंस की तैयारियों में लगा हुआ है। वह कॉन्फ्रेंस साल 2018 के अंत में पॉलैंड में होनी है। दरअसल, मौसम में आनेवाले बदलावों की वजह से तापमान घट-बढ़ रहा है। जिसकी वजह से चक्रवात, बारिश, सूखा और बाढ़ सब पहले से ज्यादा भयानक हो गए हैं। ऐसे में बाकी देशों के साथ थाइलैंड पर भी दबाव है कि वह 2015 में पैरिस में हुए समझौते के दौरान जिन नियमों को लागू करने की बात हुई थी उनपर जल्द कोई फैसला ले।

बैंकॉक को क्यों है खतरा दरअसल, बैंकॉक ऐसी जगह पर बना हुआ है जहां की जमीन दलदल वाली है। फिलहाल यह समुद्र तट से सिर्फ 1.5 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। यह उन शहरी जगहों में शामिल है जिनपर निकट भविष्य में जलवायु परिवर्तन का असर ज्यादा होगा। बैंकॉक के साथ-साथ जकार्ता और मनीला के लिए भी खतरे की घंटी बज रही है।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, बैंकॉक का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा 2030 तक डूब जाएगा। यह सब भारी बारिश और मौसम के बदलावों की वजह से होगा। वहीं, ग्रीनपीस से जुड़े एक कार्यकर्ता के मुताबिक, बैंकॉक फिलहाल हर साल लगभग दो सेंटीमीटर डूब रहा है और आनेवाले वक्त में स्थिति और खतरनाक होगी। कुछ कार्यकर्ता मानते हैं कि यह पहले से समुद्र तट के काफी नीचे आ चुका है।

पहले भी देखा है खौफनाक मंजर 2011 के मॉनसून में बैंकॉक जलवायु परिवर्तन का खौफनाक मंजर देख चुका है। जब दशकों बाद बहुत ज्यादा बारिश आई थी। तब शहर का पांचवा हिस्सा डूब गया था। जानकारों के अनुसार, शहरीकरण और तटीय क्षेत्रों का खिसकना आगे बड़ी समस्या पैदा कर सकता है। वहां पहले कुछ नहरें मौजूद थीं, जिनपर अब सड़क बना दी गई है, जिससे पानी निकलने की जगह ही नहीं बची। उन नहरों की वजह से बैंकॉक को 'ईस्ट का वेनिस' कहा जाता था।

हालांकि, अब सरकार ने सुध ली है। जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए अब नहरों के नेटवर्क को 2600 किलोमीटर तक बढ़ाया जा रहा है, जिससे पानी को बाहर निकाला जा सके। साथ ही वहां की यूनिवर्सिटी ने भी 2017 में एक 11 एकड़ का पार्क बनाया था। उसकी मदद से लाखों लीटर पानी की निकासी हो सकती है, जिससे आसपास के इलाके ना प्रभावित हों।


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