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बैंकरप्सी कानून: 3.6 लाख करोड़ का कर्ज लेनेवाली 70 कंपनियों की समयसीमा खत्म


नई दिल्ली बैंकरप्सी से बचने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सेट की गई डेडलाइन सोमवार को खत्म हो रही है। इसके बाद 70 कंपनियां जिन्होंने 3.6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया हुआ है उनके खिलाफ बैंकरप्सी प्रॉसीडिंग शुरू हो जाएगी और उनपर दिवालिया होने की तलवार लटकेगी। आरबीआई ने फरवरी में बैंकरप्सी से जुड़े नए नियम लागू किए थे। इसमें बैंकों को लोन रीकास्ट करने के लिए 180 दिन की टाइमलाइन दी गई थी। नए नियम से पहले कोई तय लिमिट थी ही नहीं। ऐसे में अब दोषी कंपनियों को दिया वक्त सोमवार को खत्म हो रहा है। इसके बाद देनदार इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत कोर्ट का रुख करेंगे। मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय बैंकों की बैलेंस शीट के अनुसार उनपर 14.70 लाख करोड़ रुपये का स्ट्रेस्ड लोन है। आरबीआई पहले भी 40 बड़े डिफॉल्टर्स को कोर्ट में घसीटने की सलाह दे चुका है। मई में इसी कानून की वजह से लेनदारों को 35 हजार करोड़ रुपये वापस मिले थे। तब टाटा स्टील ने भूषण स्टील का अधिग्रहण कर लिया था। बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की दृष्टि से भारत में बैड लोन का अनुपात काफी चिंताजनक है। अनुमान के मुताबिक, यह मार्च 2019 तक 12.2 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। जबकि यह बढ़त पिछले साल 11.6 प्रतिशत थी। सिर्फ 70 बड़ी कंपनियों ने करीब 3.6 लाख करोड़ का लोन लिया हुआ है, जिसके बैंकरप्सी कोर्ट में जाने की संभावना जताई गई है। इसमें से कुछ केसों को सुलझाने के लिए बैंक भी पूरा जोर लगा रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) भी 11 डिफॉल्ट केसों के समाधान के लिए पूरा जोर लगा रहा है। इन पर करीब 62 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है।


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