• संवाददाता

इस भारतीय ने छीन लिया भारत से गोल्ड मेडल


जकार्ता शैलजा जैन की चाहत खुद को कबड्डी का सर्वश्रेष्ठ कोच साबित करने की थी और आखिर उन्होंने ईरान की महिला टीम के साथ कर दिखाया। उनकी इस कामयाबी की कीमत भारत को सोना गंवाकर चुकानी पड़ी। जैन, महाराष्ट्र के नासिक की रहने वाली हैं। करीब 18 महीने पहले वह ईरानी टीम के साथ जुड़ी। तब से लेकर एशियन गेम्स चैंपियन तक उन्होंने टीम के साथ काफी लंबा सफर तय किया। ईरान ने एशियन गेम्स में कबड्डी में भारत के दबदबे को समाप्त किया। ईरानी महिला टीम ने भारत को फाइनल में 27-24 से हराकर पहली बार खिताब अपने नाम किया। शैलजा ने कहा, 'जब मैं अपना पद संभालने पहली बार ईरान पहुंची तो मैंने स्वयं से कहा था, खुद को सर्वश्रेष्ठ कोच साबित करने के लिए एशियन गेम्स ही मेरा लक्ष्य है। और अब नतीजा सबके सामने है।' जीत के बाद शैलजा ने कहा, 'हमारा डिफेंस शुरुआती 5 मिनटों में काफी कड़ा था, जो जीत में महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा हमारे तीन रेडर्स ने भी अच्छा खेल दिखाया।' जैन ने कहा कि शुरुआत में उन्हें खिलाड़ियों से बातचीत में परेशानी हुई और इसके बाद उन्होंने स्थानीय भाषा सीखने का फैसला किया। एशियन गेम्स-2018 इंडोनेशिया में हो रहा है। प्रतियोगिता में भारत को पहला मेडल शूटिंग में मिला, जबकि उसके लिए पहला गोल्ड मेडल रेसलर बजरंग पूनिया ने जीता। आइए जानें, किस खिलाड़ी ने किस खेल में भारत के लिए पदक जीता है... 18वें एशियन गेम्स के पहले दिन शूटर अपूर्वी चंदेला और रवि कुमार ने 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। प्रतियोगित में यह भारत का पहला मेडल रहा। कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट भारतीय स्टार रेसलर बजरंग पूनिया ने पुरुषों की 65 किग्रा स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में जापान के ताकातानी दाइचि को 11-8 से हराते हुए भारत को गोल्ड मेडल दिलाया। प्रतियोगिता में यह भारत का पहला गोल्ड मेडल रहा। दीपक कुमार ने निशानेबाजी स्पर्धा की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। दीपक 18वें शॉट तक पदक की दौड़ में नहीं थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने 10.9 का परफेक्ट स्कोर करके 247.7 अंक के साथ सिल्वर मेडल जीता। इस स्पर्धा का गोल्ड चीन के गत चैंपियन यांग हाओरान ने जीता, जबकि ब्रॉन्ज मेडल चीनी ताइपै के लू शाओचुआन को मिला। पुरुष ट्रैप इवेंट में लक्ष्य शेरॉन ने सिल्वर मेडल जीता। 19 साल के लक्ष्य ने 45 में से 39 निशाने सही लगाए, जिससे वह पोडियम में दूसरे स्थान पर रहे। ताईपे के कुनपी यांग ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, साथ ही उन्होंने 48 अंक से खेलों के रेकॉर्ड की भी बराबरी की। वहीं कोरिया के डाएमयियोंग अहन ने जेएससी शूटिंग रेंज में 30 अंक से कांस्य पदक प्राप्त किया। विनेश फोगाट ने एशियाई खेलों में इतिहास रचते हुए 50 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के साथ वह पहली भारतीय महिला पहलवान बनी हैं, जिन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया हो। विनेश ने जापान की इरी युकी को 6-2 से हराकर गोल्ड जीता। 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में अभिषेक वर्मा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 219.3 अंकों के साथ इस इवेंट में वह तीसरे स्थान पर रहे। जापान के तोमोयुकी मतसुदा, जो लंबे समय तक आगे चल रहे थे, ने 239.7 अंकों के साथ सिल्वर मेडल जीता। वहीं भारत के सौरभ चौधरी ने इस इवेंट में गोल्ड जीता था। 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में ही भारत के सौरभ चौधरी ( 240.7 अंक) ने गोल्ड जीता। 16 साल की उम्र में उन्होंने जापान के तोमोयुकी मतसुदा को हरा दिया। चौधरी 10मीटर एयर पिस्टर इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले निशानेबाज भी हैं। निशानेबाज संजीव राजपूत ने 50 मीटर राइफल-3 पोजिशन स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 452.7 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। भारतीय निशानेबाज संजीव का यह एशियाई खेलों में इस स्पर्धा में जीता गया पहला पदक है। महिला कुश्ती के 68 किलो भारवर्ग में दिव्या काकरान ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। दिव्या ने 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज और हाल में नई दिल्ली में हुए एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था। निशानेबाज राही सरनोबत ने 25 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीता। उन्होंने थाइलैंड की यांगपाइबून नफसवण को हराकर यह गोल्ड जीता है। नाओरेम रोशिबिना देवी ने सांडा 60kg महिला वर्ग में ब्रॉन्ज अपने नाम किया। भारत के नरेंद्र ग्रेवाल ने सांडा में 65kg भारवर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। संतोष कुमार ने 56kg भार वर्ग में यह पदक अपने नाम कियाय़ सैंडा के 60kg पुरुष भारवर्ग में सूर्य भानू प्रताप सिंह ने दूसरा मेडल दिलाया। अंकिता रैना ने महिला एकल टेनिस में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। अंकिता का लक्ष्य फाइनल में पहुंचकर गोल्ड के लिए मुकाबला करने का था, लेकिन चीन की शुआई जैंग के खिलाफ उन्हें सेमीफाइनल में हारकर ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा। यूं तो भारत पुरुष कबड्डी में भारत की अजेय छाप है। लेकिन इस बार ईरान की टीम ने उसे सेमीफाइनल में मात दी और भारत को ब्रॉन्ज से ही संतोष करना पड़ा। इस बार लीग स्टेज में भी भारत को कोरिया की टीम ने मात दी थी। 15 वर्षीय शार्दुल विहान ने पुरुष डबल ट्रैप शूटिंग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। मेरठ के इस निशनेबाज ने स्पर्धा के फाइनल राउंड में 73 अंक हासिल कर दूसरा स्थान हासिल किया। एशियन खेलों के छठे दिन गुरुवार को दुष्यंत चौहान ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 7:18.76 का समय निकालकर यह पदक अपने नाम किया। भारत को नौकायन की डबल स्पर्धा में भी रोहित और भगवान की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल दिलाया। इस स्पर्धा इस जोड़ी ने 7:04.61 का समय निकाल यह पदक अपने नाम किया। टेनिस पुरुष युगल में रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी ने कजाकिस्तान के एलेक्सांद्र बुबलिक डेनिस येवसेयेव को सीधे सेटों में 6-3, 6-4 से हराकर गोल्ड पर कब्जा जमाया। 10 मीटर एयर पिस्टल में हीना सिद्धू ने इस स्पर्धा में 219.2 का स्कोर हासिल किया।

भारतीय महिला टीम ने कबड्डी में सिल्वर मेडल जीता। 2 बार की लगातार चैंपियन भारतीय टीम ईरान के हाथों हार गई जिसके बाद उसे रजत से संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा, 'बातचीत करना आसान नहीं था, तो मैंने फारसी सीखने का फैसला किया। मैच शुरू होने से पहले मैंने खिलाड़ियों से कहा कि मुझे गोल्ड मेडल के बिना भारत मत भेजना। उनमें से कुछ खिलाड़ियों ने आकर कहा, मैम हमने आपको वह दे दिया जो आप चाहती थीं।' उन्होंने कहा, 'फाइनल मैच में मेरे और टीम के लिए काफी महत्वपूर्ण था काफी समय के बाद ईरान ने गोल्ड मेडल जीता था। मुझमें भरोसा जताने के लिए मैं फेडरेशन की शुक्रगुजार हूं।' भारतीय होने के नाते उन्हें भारतीय टीम के लिए दुख है, लेकिन एक प्रफेशनल होने के नाते उन्होंने राष्ट्रीयता को अपने काम के बीच कभी नहीं आने दिया। उन्होंने कहा, 'मुझे भारत की हार का दुख है। किसी अन्य भारतीय की तरह मुझे भी अपने देश से प्यार है। लेकिन मुझे कबड्डी से भी प्यार है। ईरानी टीम की कोच होने के नाते मैंने सिर्फ उनके बारे में सोचा। कबड्डी भारत में काफी लोकप्रिय है। हमें कबड्डी के बारे में सब पता है। ईरान में भी सभी लोगों ने इस मैच को देखा।' जैन ने कहा कि उन्होंने ईरान की खिलाड़ियों की शारीरिक पहलू पर काम करने के बजाए रणनीति बनाने पर ध्यान दिया। उन सात महीनों में उन्होंने रणनीति और तरीकों को सीखा है। मुझे उनकी फिटनेस पर काम करने की जरूरत नहीं पड़ी वे पहले से ही शारीरिक रूप से काफी फिट हैं।


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