• शम्भू पंवार पत्रकार एवं लेखक

रक्षाबंधन: विश्वास और स्नेह का प्रतीक


भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के अटूट विश्वाश व स्नेह का प्रतीक है ।किसी भी रिश्ते की प्रगाढ़ता विश्वास की बुनियाद पर टिकी होती है,यही रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है।

भाई बहन के प्यार,स्नेह और विश्वाश का ये रक्षाबंधन का पर्व कहने को तो एक रेशम की डोर का है।लेकिन ये बंधन बहुत मजबूत और जमन जन्मांतर का होता है। रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर ,उनकी लंबी आयु और कामयाबी की कामना करती है ।भाई भी अपनी बहन से राखी बंधवाकर बहन को रक्षा करने का वचन देता है ।। भाई बहन के इस अटूट विश्वास ओर स्नेह की डोर से रिस्ते में ओर मजबूती आती है।

इस दिन विवाहित बहने कितनी भी दूर क्यों ना हो,फिर भी रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधने को बेताब रहती है।उस दिन को लेकर मन में एक अलग ही उमंग ओर ओर उत्साह का भाव होता है।

ओर एक माह पहले से ही मायके जाने की तैयारियां सुरु कर देती है।

रक्षाबंधन का त्योहार पर मायके जाने की भावना उनको बच्चपन में लेजाती है।और वो बालपन स्मृतियां आंखों के सामने आने लगती है।बचपन में भाई - बहन के प्यार और स्नेह,नोक झोंक,अठखेलिया, माता - पिता की डांट ओर प्यार सभी बाते ताजा हो जाती है। ओर ये सब बातें ओर अधिक उत्सुकता पैदा कर देती है।बहने रक्षाबंधन के दिन गिनने लगती है कि उस दिन मुझे जाना है और भाई की कलाई पर राखी बांधनी है।उपहार लेना है।

मायके में बचपन की सहेलियों ओर परिवारजनों से मिलने की उत्सुकता से मन ख़ुशी से झूम उठता है। और वो दिन आते ही बहने भाई के पास पहुच जाती है। रक्षाबंधन के दिन बहने सुंदर सुंदर राखी खरीदकर लाती है ।और भाई की कलाई पर बांधती है।मिठाई ओर फल ,नारियल भेट करती है। भाई भी बहन से राखी बंधवाकर आशीर्वाद,स्नेह और नकद राशि देता है।

रक्षाबंधन का ये त्योहार भाई बहन के पवित्र प्यार व स्नेह का त्योहार है ।ये प्यार भाई बहन के रिश्ते में अटूट विश्वाश ओर प्यार ,स्नेह की मिठास भर देता है। जहाँ बहन को भाई पर गर्व होता है। तो भाई को भी बहन पर नाज होता है।

यह त्योहार जाति, महजब ओर धर्म से परे है।हिन्दू बहने दूसरे धर्म के भाई को राखी बांधती है ।तो दूसरे धर्म के भाई हिन्दू बहनो से राखी बंधवाते है। यह भाई बहन के पवित्र प्यार व स्नेह का अटूट रिश्ता है।

राष्ट्रीय पत्रिका के संपादक एवं साहित्यिकार डॉ ओमप्रकाश प्रजापति का कहना है:-

रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है। इस त्योहार का प्रचलन सदियों पुराना है। पौराणिक कथा के अनुसार इस त्योहार की परंपरा उन बहनों ने रखी जो सगी बहनें नहीं थी। महाभारत में जब भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी अंगुली में चोट आ गई। द्रौपदी ने अपनी साड़ी को फाड़कर उनकी अंगुली पर पट्टी बांध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। भगवान श्रीकृष्ण ने इस उपकार का बदला चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाकर चुकाया।

भाई-बहन का यह त्‍योहार सुरक्षा का वचन लेकर आता है। एक ओर जहां बहन अपने भाई को प्‍यार और विश्‍वास से राखी बांधती है वहीं, भाई अपनी बहन को सारी उम्र सुरक्षा का वचन देता है। रक्षाबंधन के दिन बहन भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसके दीर्घायु होने की कामना करती है। कहते हैं इस धागे का संबंध अटूट होता है। जब तक जीवन की डोर और श्वांसों का आवागमन रहता है एक भाई अपनी बहन के लिए और उसकी सुरक्षा तथा खुशी के लिए दृढ़ संकल्पित रहता है।

देश की जानी मानी साहित्यकार,संपादक,लेखक डॉ पूनम माटिया का कहना है:-

भारतीय संस्कृति में रक्षा बंधन का पर्व बहिन-भाई के पवित्र रिश्ते का प्रतीक यह पर्व भारत में ही नहीं विदेश में भी पूर्ण भव्यता और उल्लास से मनाया जाता है । सरल ,सादा सी डोरी-मौली। से लेकर विभिन्न साज-सज्जा से बनी राखियाँ बाज़ार की शोभा बढ़ाती हैं।

साथ ही चाँदी की राखियाँ भी यहाँ वहाँ दिखती हैं

बहिने सज-संवर कर फल- मिठाई ले भाई के पहुँचती हैं। भाई भी प्रतीक्षा में आँखें बिछाए रहते हैं।

भाभियों की विशेष राखियाँ उपलब्ध रहती हैं।

बहिन की राखी , भाई का उपहार , साथ ही हंसी-ठिठोली , चुहल इस पर्व को ख़ास बना देता है।

भाई बहिन की रक्षा का संकल्प लेता है और बहिन भी तिलक कर उसकी लंबी आयु की कामना करती है।सभी को पावन पर्व की शुभकामनाएं।

कवयित्री शोभा सचान कहती है:-

रक्षाबंधन का त्योहार भाई बहन के स्नेह का प्रतीक है।ये पर्व भाई बहन के पवित्र रिश्ते को ओर मधुर ओर प्रगाढ़ बना देता है।

यद्यपि आधुनिकता की बयार में त्योहारों की रौनक ओर परम्पराओ की आस्था जनमानस में फीकी नजर आने लगी है।हिन्दू संस्कृति के रीति रिवाजों का स्वरूप बदलने लगा है।अब परम्पराओ के नाम पर केवल

रस्म अदायगी ही रह गई है।

आज की युवा पीढ़ी का तो परम्पराओ में रुचि ही नही है।

लेकिन रक्षाबंधन के पावन पर्व के प्रति आज भी आस्था और विश्वाश कायम है।


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