• शिव वर्धन सिंह

केरल बाढ़: कुदरत के कहर के आगे इंसान की बेबसी बयां करतीं दर्दभरी कहानियां


तिरुवनंतपुरम केरल में बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही अब जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती है। 100 साल की सबसे विनाशकारी बाढ़ ने केरल में सब कुछ तबाह कर दिया है। 8 अगस्त के बाद से मौतों का आंकड़ा सवा दो सौ को पार कर गया है, वहीं 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति बर्बाद होने का अनुमान है। बाढ़ का पानी खिसकने के साथ ही अब लोगों की दर्दभरी दास्तानें भी बाहर निकलकर आ रही हैं। बर्बादी का झटका झेल नहीं पाने पर खुदकुशी के मामले देखे जा रहे हैं, वहीं बच्चों को अब इस बात की फिक्र सता रही है कि कॉपी-किताबों के बगैर उनकी पढ़ाई कैसे आगे बढ़ेगी। कुदरत के कहर के आगे इंसान की बेबसी को बयां करतीं केरल की ये दर्दभरी कहानियां:

सर्टिफिकेट खराब होने पर सूइसाइड कोझिकोड जिले में बारिश और बाढ़ से 12वीं कक्षा का प्रमाणपत्र खराब होने से परेशान 19 वर्षीय कैलाश नाम के एक युवक ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया, 'कोझिकोड जिले के करंतूर में रहने वाले युवक कैलाश का घर पानी में डूब गया, जिसके बाद उसे परिवार सहित राहत शिविर में भेज दिया गया था।' कैलाश ने आईटीआई में एक कोर्स के लिए दाखिला लिया था और इसके लिए उसने नए कपड़े भी सिलवाए थे। बारिश थोड़ा थमने पर रविवार को जब वह अपने घर गया तो वहां पानी में भीगे प्रमाणत्र देखकर परेशान हो गया। कुनामंगलम थाने के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवक की मौत का पता उस वक्त चला जब उसके परिजन शाम को घर की साफ-सफाई करने आए। पुलिस ने बताया कि उसे लटका देख कर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए।

कोच्चि में एक घर के बाहर बिखरा पड़ा सामान

बर्बाद घर देखने के बाद की खुदकुशी कोथडू के कदमक्कुडी में 54 वर्षीय रॉकी ने अपने तहस-नहस हो चुके घर को देखकर बुधवार को आत्महत्या कर ली। सेंट अल्बर्ट कॉलेज के राहत शिविर से बाढ़ पीड़ित अपने परिवार के साथ मंगलवार को वह वापस घर लौटे थे। वे लोग अपने घर की साफ-सफाई करने आए थे। रॉकी के पड़ोसियों के मुताबिक, उनकी पत्नी और बच्चे तो उसी दिन वापस राहत शिविर लौट गए थे लेकिन रॉकी रात लगभग 9: 30 बजे पड़ोसियों से बातचीत करते देखे गए थे। बुधवार को लगभग सुबह 9 बजे रॉकी के रिश्तेदारों ने देखा कि उनके घर का दरवाजा अंदर से बंद है। किसी तरह से जब रिश्तेदारों ने अंदर देखा तो पाया कि रॉकी ने फांसी लगा ली थी। पुलिस ने कहा कि रॉकी अपने घर की हालत देखकर काफी परेशान हो गया था, इसलिए उसने यह कदम उठाया। वह डर रहा था, साथ ही उसे यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह फिर से अपना घर कैसे बनवाएगा। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, 'हमें इसके अलावा अब तक कोई ऐसी वजह नहीं मिली है, जिसके चलते रॉकी आत्महत्या कर ले।'

इडुक्की के गौतम का दर्द इडुक्की जिले के वेंदीपेरियार कस्बे के गौतम दसवीं के छात्र हैं। वह सेंट जोसेफ स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। बता दें कि इडुक्की जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है। बाढ़ के पानी में उनका घर भी डूब गया। उनकी किताबें-नोटबुक सब कुछ बाढ़ का पानी बहा ले गया।

इ़डुक्की में घर के अंदर घुसे बाढ़ के पानी में किताबें ढूंढते गौतम

पानी घटने पर घर पहुंचे गौतम को यह नहीं सूझ रहा कि अब वह पढ़ाई कहां से शुरू करें। बेबस गौतम घर में घुसे पानी में अपनी किताबें ढूंढ रहे हैं। गौतम ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, 'हम एक राहत कैंप से 15 दिन बाद घर लौटे हैं। मुझे मेरी किताबें कहीं नहीं दिखाई दे रही हैं। मुझे नहीं पता कि मैं अपनी आगे की पढ़ाई कैसे जारी रख पाऊंगा।'

शिमना ने लगाई मदद की गुहार केरल की एक बेटी को अपनी पढ़ाई की च‍िंता सता रही है। श‍िमना नाम की छात्रा जो स्‍नातक अंत‍िम वर्ष में हैं, उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। वह परेशान हैं क‍ि बाढ़ के बाद जब उनकी कॉपी और क‍िताबें खराब हो गई हैं, तो वह एग्जाम की तैयारी कैसे करेंगी। इडुक्की के वेंदीपेरियार की श‍िमना का कहना है क‍ि उनके द्वारा तैयार नोट नष्ट हो चुके हैं।

वेंदीपेरियार की शिमना को अब आगे की पढ़ाई की चिंता

बाढ़ के पानी में डूबकर उनकी कॉपी-क‍िताबें गल चुकी हैं। अब वे पढ़ाई में इस्तेमाल नहीं हो सकतीं। शिमना का कहना है, 'मेरी ज्यादातर किताबें बर्बाद हो गई हैं। उनमें से कुछ खो भी चुकी हैं। मुझे नहीं पता कि आने वाली परीक्षाओं की तैयारी मैं कैसे करूंगी। अगर सरकार हमारी मदद करती है, तो मैं आभारी रहूंगी।'

बाढ़ की विभीषिका में अब तक 231 की मौत भयंकर बारिश और भीषण बाढ़ की त्रासदी झेलने के बाद केरल सरकार अब उन तमाम जगहों की सफाई के मुश्किल काम में जुट गई है, जहां से बाढ़ का पानी उतर गया है। देश के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित इस राज्य में बाढ़ की त्रासदी ने 231 लोगों की जान ली है और बड़े पैमाने पर (20 हजार करोड़ से ज्यादा) धनहानि पहुंचाई है।

पेरावूर में बाढ़ से बर्बाद घर के बाहर बैठी बच्ची

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद मकानों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य जगहों पर जमा मलबे की सफाई के लिहाज से एक नियंत्रण कक्ष बनाया है। इसका लक्ष्य पूरे राज्य में सफाई प्रक्रिया की निगरानी करना है। सफाई की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को सौंपी गयी है। कचरा प्रबंधन, ऑर्गेनिक कृषि और जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाला हरित केरल मिशन भी इस सफाई प्रक्रिया में सहायता करेगा। मिशन शुक्रवार से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 50 पम्प सेट लगाएगा।

3520 राहत शिविरों में 13.43 लाख पीड़ित अधिकारियों ने बताया कि राज्य की ओर से तैनात कर्मचारियों के अलावा 50,000 स्वयंसेवक भी मकानों और सार्वजनिक जगहों पर जमा बाढ़ का कचरा साफ करने में मदद करेंगे। पानी उतरने के बाद लोग अपने-अपने घरों को लौटना शुरू हो गए हैं लेकिन अब भी 13.43 लाख से ज्यादा लोग 3,520 राहत शिविरों में रह रहे हैं।

चेंगनूर जिले में बाढ़ के बाद बर्बाद घर की सफाई करता एक शख्स

आपदा के दौरान लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे और राहत कार्यों की स्वयं निगरानी करते रहे मुख्यमंत्री पिनरई विजयन राज्य के विभिन्न राहत शिविरों का दौरा कर रहे हैं। जल संसाधन मंत्री मैथ्यू टी. थॉमस ने बताया कि केरल जल संसाधन प्राधिकरण ने प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान 1,089 जलापूर्ति लाइनें प्रभावित हुई थीं। इनमें से 800 से ज्यादा को सुधार लिया गया है जबकि अन्य को जल्दी ही ठीक कर लिया जाएगा।


0 व्यूज

                                           KarmKasauti

                            Kanpur Uttar Pradesh

          Email: karmkasauti@gmail.com

   Copyright 2018. All Rights Reserved.