• संवाददाता, दिल्ली

सावधान! मेट्रो-बसों में 'हनीट्रैप' से मिनटों में साफ हो रहीं जेबें


नई दिल्ली दिल्ली में मेट्रो और बसों में सफर करने वाले लोग सावधान हो जाएं, खासतौर से अधेड़ उम्र के लोग। दरअसल आजकल महिलाओं के ऐसे कई गैंग सक्रिय हैं जो भीड़ के बीच यात्रियों को ‘हनीट्रैप’ करके उनका माल उड़ा ले जाती हैं। हाल में पकड़ी गई कुछ युवतियों ने पुलिस को यह जानकारी दी है।

पुलिस पूछताछ में गैंग की महिला सदस्यों ने बताया कि कई बार वे मेट्रो और बसों में भीड़भाड़ होने पर गैंग की यंग मेंबर्स को लोगों के आगे-पीछे लगा देती हैं। ये झुंड बनाकर इकट्ठा हो जाती हैं। चोर लड़कियां टारगेट से सटकर खड़ी हो जाती हैं। उन्हें अपने जाल में फंसाने की कोशिश करती हैं। इसी बीच गैंग की बाकी मेंबर धक्का-मुक्की करते हुए मौका मिलते ही उनके पर्स या मोबाइल फोन आसानी से निकाल लेती हैं। अगर पैसेंजर बैग लटकाकर खड़ा होता है तो गैंग मेंबर उसे भी खोलकर सामान चुरा लेती हैं।

उम्रदराज को बनाती हैं निशाना गैंग की जवान महिलाओं को अधेड़ उम्र के लोगों को टारगेट करने के लिए लगाया जाता है। वह अपने टारगेट के आगे-पीछे इस तरह से सटकर खड़ी हो जाती हैं कि टारगेट को पता ही नहीं लग पाता कि उसे फंसाया जा रहा है। एक तरह से उसे हनी ट्रैप में फंसाकर यह उसकी जेब या बैग पर हाथ साफ कर देती हैं। अधेड़ यही समझता रहता है कि बस या मेट्रो में भीड़ अधिक होने की वजह से बेचारी उससे चिपककर खड़ी हैं लेकिन महिला गैंग की हेड यह जानबूझकर कराती हैं, ताकि यंग महिलाओं के माध्यम से वह आसानी से अधेड़ उम्र के लोगों की जेब ढीली कर सकें।

भीड़ के बीच अधेड़ लोगों को चुनती हैं टारगेट हनीट्रैप से शिकार करने वाले गैंग की दो महिलाओं को हाल ही में संगम विहार थाने के एसएचओ उपेंद्र सिंह और उनकी टीम ने पकड़ा था। पुलिस पूछताछ में उन्होंने बताया था कि वे मेट्रो और बसों के अलावा मंदिरों में आने वाले भक्तों की भी जेब काटती थीं। उनका कहना था कि अधेड़ और ज्यादा उम्र वाले लोगों को टारगेट करना ज्यादा आसान रहता है। इसके लिए गैंग को अपनी यंग मेंबर्स को उनके आसपास लगाना होता है और कुछ ही सेकंड में ऐसे यात्रियों का माल उनके पास होता है। ये कुछ ही मिनटों में शिकार बना लेती हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो 2017 में सीआईएसएफ ने मेट्रो स्टेशनों से ऐसी 1,292 महिलाओं को बाहर निकाला था, जिन पर शक था कि वे मेट्रो के यात्रियों की जेब काट सकती हैं। माना जा रहा है कि इस साल अब तक ऐसी 500 संदिग्ध महिलाओं को मेट्रो स्टेशनों से बाहर का रास्ता दिखाया गया। यह तो केवल मेट्रो स्टेशनों की बात है। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे वगैरह तो अलग हैं।

गैंग की अधिकतर सदस्य यंग होती हैं गैंग की अधिकतर सदस्य यंग या मिडल ऐज ग्रुप की होती हैं। इनमें से किसी की भी गोदी में आमतौर पर बच्चा नहीं होता है। जिस तरह से कई चौराहों पर भीख मांगने वाली महिलाओं के पास बच्चे होते हैं, ये अपने साथ छोटा-सा कोई बैग लेकर चलती हैं। जिस भी बस में ये चढ़ती हैं आमतौर पर उस बस के ड्राइवर और कंडेक्टर को इनकी पहचान आसानी से हो जाती है। कई बार बस ड्राइवर और कंडेक्टर इन्हें अपनी बस में चढ़ने भी नहीं देते हैं। बताया जाता है कि इनके इलाके बंटे हुए हैं। जो गैंग जिस इलाके में वारदातें करता है, आमतौर पर उस इलाके में दूसरा गैंग नहीं घुसता है।

आप रहें सावधान मेट्रो, बसों और मंदिरों में जाने वाले लोग सावधान हो जाएं! अगर आपके चारों ओर अचानक पांच-सात महिलाएं इकट्ठी होकर धक्का-मुक्की जैसा दिखावा करती हैं, तो आप अपनी जेब और मोबाइल फोन पर खास नजर रखें क्योंकि महिलाओं का यह ग्रुप किसी भीड़ का हिस्सा नहीं, बल्कि चोरनी गैंग हो सकता है, जो आपकी जेब और बैग में रखे माल पर हाथ साफ कर सकता है। दिल्ली में इस तरह से आए दिन कितने ही लोग चोरनी गैंग के शिकार हो रहे हैं।

हाल में अरेस्ट हुई थीं 3 चोरनियां बताया जाता है मेट्रो और रेलवे स्टेशनों से तो कई बार इन्हें संदेह के आधार पर स्टेशनों से बाहर कर भी दिया जाता है, तो कई बार यह जेबतराशी की वारदात को अंजाम देते रंगे हाथों पकड़ी भी गई हैं। अभी तीन-चार दिन पहले ही मेट्रो पुलिस ने मेट्रो में चोरी करने वाली तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया था। तीनों नागपुर, महाराष्ट्र की रहने वाली थी। इनके पकड़े जाने से चोरी और जेबतराशी के पांच मामलों का खुलासा हुआ था। यह गैंग अक्षरधाम मंदिर और इसके आसपास वाली मेट्रो स्टेशनों पर सक्रिय था। इसी तरह से 9 अगस्त को साउथ दिल्ली के संगम विहार थाना पुलिस ने मंदिरों में चोरी करने वाली दो चोरनियों को गिरफ्तार किया था। यह भीड़भाड़ वाले मंदिरों में जाकर वहां दर्शन करने आने वाले भक्तों की जेबों और अन्य सामान पर हाथ साफ करती थीं जबकि इसी दौरान साउथ-वेस्ट दिल्ली की साउथ कैंपस थाना पुलिस ने भी एक महिला को घरों में सेंधमारी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस महिला ने नाबालिगों का अपना गैंग बनाया हुआ था, जिनके साथ मिलकर ये घरों में चोरियां करती थीं।

पिछले साल सितंबर में वेस्ट दिल्ली की तिलक नगर थाना पुलिस ने चोरी, लूट और झपटमारी की वारदातों को अन्जाम देने वाली 13 महिलाओं के गैंग को पकड़ा था। ये सब मध्यप्रदेश के राजगढ़ की रहने वाली थीं। इनकी गिरफ्तारी से चोरी, लूट और झपटमारी के 100 से अधिक मामलों का खुलासा हुआ था। यह गैंग शादी और पार्टियों में भी जाकर वारदात करता था। पिछले साल ही अगस्त महीने में रोहिणी जिले की समयपुर बादली थाना पुलिस ने सीरसपुर गांव में एक जनरल स्टोर पर चोरी करने की योजना में 13 चोरनियों को पकड़ा गया था। यह सब भलस्वा डेरी कलंदर कॉलोनी की रहने वाली थी। इसी तरह से दिल्ली के लगभग हर कोने में महिला गैंग वारदातें कर रहा है।

कैसे करती हैं वारदातें आमतौर पर महिला गैंग में जेबतराशी करते वक्त कम से कम पांच महिलाएं होती हैं। पांच से सात या आठ महिलाओं का यह गैंग टारगेट की पहचान करके उसे चारों ओर से इस तरह से घेरने लगता है, जैसे मानो अधिक भीड़ हो जाने से कोई उसमें फंस जाता है। भीड़भाड़ वाली बसों और मेट्रो में यह टारगेट के साथ ब्रेक लगने के साथ ही धीरे-धीरे इस तरह से धक्का-मुक्की करने लगते हैं जैसे कि उन्हें ब्रेक लगने या अचानक से बस तेज चलने से झटका लगा हो। टारगेट की हुई महिला या पुरुष जब तक यह बात समझता है, तब तक यह उसकी जेब से पर्स या मोबाइल फोन पर हाथ साफ कर देती हैं या उसके पास अगर कोई बैग वगैरह होता है, तो उसे भी खोलकर उसमें से सामान निकाल लेती हैं। इसी तरह से मंदिरों में भी यह भक्तों की भीड़ में शामिल होकर लोगों के माल पर हाथ साफ कर देती हैं।

कहां-कहां करती हैं वारदातें वैसे तो महिला गैंग दिल्ली के लगभग हर कोने में वारदातें कर रहे हैं, लेकिन भीड़भाड़ वाले बसों के रूट और मेट्रो में यह अधिक वारदातें करती हैं। खासतौर से महिला गैंग रूठ नंबर- 405, 429, 502, 423, 425, 729, 901, 214 और 213 पर चलने वाली डीटीसी और क्लस्टर बसों में सवारियों की जेब काटती हैं जबकि मेट्रो के हर उस रूट पर यह अपनी हाथ की सफाई दिखा रही हैं, जिन-जिन रूटों पर भीड़ बहुत अधिक होती है। खासतौर से पीक आवर्स में। मेट्रो में यह महिला डिब्बों में भी वारदातें करती हैं जबकि नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, सराय रोहिल्ला और आनंद विहार रेलवे स्टेशनों पर भी ये वारदातें करती हैं।


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