• Umesh Singh,Delhi

ममता का पलटवार, जिन्होंने कल सत्ता दी उन्हें आज बनाया शरणार्थी


नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने असम में नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) में करीब 40 लाख लोगों के नाम न होने को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। ममता ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने पहले बीजेपी की सरकार बनाने के लिए वोट किया था आज उन्हें ही शरणार्थी कैसे बना दिया गया। ममता ने कहा कि वह बंगाल में ऐसा नहीं होने देंगी। एनआरसी के मुद्दे पर कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'असम में यह क्या चल रहा है? एनआरसी समस्या। ये सिर्फ बंगाली नहीं हैं, ये अल्पसंख्यक हैं, ये बंगाली हैं और ये बिहारी हैं। 40 लाख से ज्यादा लोगों ने कल रूलिंग पार्टी के लिए वोट किया था और आज अचानक अपने ही देश में उन्हें शरणार्थी बना दिया गया है।' ममता ने कहा, 'मैं अपनी मातृभूमि को ऐसी हालत में नहीं देखना चाहती, मैं मातृभूमि को बंटते हुए नहीं देखना चाहती।' पश्चिम बंगाल सीएम ने कहा, 'हम बंगाल में ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि हम वहां हैं। आज ये लोग वोट भी नहीं कर सकते।' उन्होंने कहा कि अगर बंगाली कहेंगे कि बिहारी बंगाल में नहीं रह सकते, दक्षिण भारतीय कहेंगे कि उत्तर भारतीय वहां नहीं रह सकते और उत्तर भारतीय कहें कि दक्षिण भारतीय वहां नहीं रह सकते तो देश की स्थिति क्या होगी? हमारा देश एक परिवार है और हम साथ हैं।' ममता ने कहा, 'मैं हैरान हूं कि हमारे पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के लोगों का नाम एनआरसी असम में नहीं है। इससे ज्यादा मैं क्या कहूं? ऐसे कई लोग हैं जिनके नाम रजिस्टर में नहीं हैं।' उन्होंने बीजेपी सरकार को घेरते हुए कहा, 'केवल चुनाव जीतने के मकसद से लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता। क्या आपको नहीं लगता कि जिन लोगों के नाम लिस्ट में नहीं हैं वे अपनी पहचान का एक हिस्सा खो देंगे?' ममता ने कहा, 'हमें समझना होगा कि भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश विभाजन से पहले एक थे। मार्च, 1971 तक जो भी बांग्लादेश से भारत आए थे, वे भारतीय नागरिक ही हैं।' आप जानतो होंगे कि बीजेपी शरणार्थियों के मुद्दे पर ममता बनर्जी को घेरती रही है। बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी ममता पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह बांग्लादेशियों की मौसी हैं और बांग्लादेशी उनकी शह पर बांग्लादेश आते हैं। बता दें, नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट सोमवार को असम में जारी कर दिया गया। इस लिस्ट में 2.89 करोड़ लोगों को नागरिकता के योग्य पाया गया, वहीं करीब 40 लाख लोगों के नाम इससे बाहर रखे गए हैं। बता दें कि एनआरसी का पहला ड्राफ्ट 31 दिसंबर 2017 को जारी किया गया था जिसमें कुल 3.29 करोड़ आवेदनों में से 1.9 करोड़ लोगों का नाम शामिल किया गया था।


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