• संवाददाता

फर्जी पते से चल रही थी कंपनी, जमा किए 3,178 करोड़ रुपये


हैदराबाद हैदराबाद की एक कंपनी इन दिनों सरकार के निशाने पर है। नोटबंदी के बाद इस कंपनी ने 3,178 करोड़ रुपये का लेनदेन किया, जिसकी जांच अब सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा की जा रही है। इस कंपनी ने जो पता अपने रजिस्ट्रेशन में दिया है, वहां जाने पर पता चला कि वहां से ऐसी कोई कंपनी संचालित ही नहीं हो रही है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया ने जब कंपनी ड्रीमलाइन मैनपावर सल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड के ठिकाने की ग्राउंड रियलिटी जाननी चाही तो चौंकाने वाली बात सामने आई। कंपनी ने जिस एन. सिद्दप्पा निलयम का पता अपनी कंपनी के रजिस्टर्ड पते के तौर पर दे रखा था, वह असल में एक रेजिडेंशल इमारत है। पड़ोसियों ने भी बताया कि उन्हें ऐसी किसी कंपनी के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

नोटबंदी के एक साल बाद मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने 15 नवंबर 2017 को एक आदेश दिया था जिसके तहत SFIO को करीब 18 कंपनियों के लेनदेन की जांच करनी थी। एक अधिकारी ने बताया, 'बैंकों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने नोटिस किया कि इन 18 कंपनियों में नोटबंदी के बाद 100 करोड़ से ज्यादा रुपए जमा किए और करीब इतनी ही धनराशि अकाउंट से निकाली भी गई।' कंपनी पर है 1700 करोड़ का कर्ज मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि ड्रीमलाइन मैनपावर सल्यूशन्स (अब नित्यांक इंफ्रापावर ऐंड मल्टिवेंचर्स लिमिटेड) समेत कुछ कंपनियों के खिलाफ जांच चल रही है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रेकॉर्ड्स के मुताबिक, कंपनी का रजिस्टर्ड अड्रेस वही एर्रागड्डा एरिया है जहां कंपनी का कोई अता-पता नहीं मिला। सूरज कुमार यादव और हितेश मनोहर इस कंपनी के रजिस्टर्ड डायरेक्टर हैं। कंपनी मुख्यत: टैक्स कंसल्टेंसी, लीगल सर्विसेज, बुक कीपिंग, मार्केट रिसर्च और ऑडिटिंग जैसी सेवाएं देती है। कंपनी के ऊपर करीब 1700 करोड़ का कर्ज है और उसका अधिकांश हिस्सा यस बैंक से है।


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