• संवाददाता

अपना बकाया भुगतान करने के लिए तैयार हूं-माल्या


लंदन अरबों रुपये के लोन पर डिफॉल्ट करने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या ने लंदन की वेस्टमिन्सटर कोर्ट में सुनवाई के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने किसी भी दया याचिका के लिए अप्लाई नहीं किया है। इस दौरान माल्या ने यह भी कहा कि वह 2015 से ही अपना बकाया भुगतान करने के लिए तैयार हैं। माल्या ने कहा कि उन पर लगे मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोप झूठे हैं। कोर्ट ने विजय माल्या को प्रत्यपर्ण मामले में जमानत दे दी है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 सितंबर की तारीख तय की है। बता दें कि माल्या भारत में धोखाधड़ी के आरोपों में वांछित हैं। किंगफिशर एयरलाइन के पूर्व मालिक माल्या ने धोखाधड़ी और तकरीबन 9000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में प्रत्यर्पण के भारत के प्रयासों को चुनौती दी है। वह पिछले साल अप्रैल में गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा हैं। माल्या अपने बेटे सिद्धार्थ के साथ अदालत पहुंचे। सुनवाई से पहले पत्रकारों से बात करते हुए माल्या ने कहा, 'अंतत: अदालत ही फैसला करेगी।' 27 अप्रैल को पिछली सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को उस समय बड़ी सफलता मिली थी, जब जज आरबथनॉट ने इस बात की पुष्टि की थी कि भारतीय अधिकारियों ने जो साक्ष्य सौंपे हैं, वो मामले में स्वीकार्य होंगे। सीबीआई ने ब्रिटेन की अदालत को ढेर सारे दस्तावेज सौंपे थे, जिनमें आईडीबीआई बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक बी के बत्रा के खिलाफ साजिश का मामला भी शामिल है। बत्रा का अदालत में मामले में नए ‘खलनायक’ के तौर पर उल्लेख किया गया है। भारतीय अधिकारियों ने साजिश का जो मामला पेश किया है, उसके अनुसार बत्रा ने कथित तौर पर माल्या से साठगांठ कर अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलायंस को बिना उचित सावधानी बरते कुछ ऋण की मंजूरी दिलाई। अगर न्यायाधीश भारत सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हैं तो अलग प्रत्यर्पण कार्यवाही में ब्रिटेन के गृह मंत्री को दो महीने के भीतर माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर करना होगा। हालांकि, दोनों पक्षों के पास मैजिस्ट्रेट अदालत के फैसले के खिलाफ ब्रिटेन में ऊपरी अदालतों में अपील दायर करने का मौका होगा। माल्या के बचाव दल का नेतृत्व बैरिस्टर क्लेयर मांटगोमरी कर रहे हैं। उन्होंने माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों का खंडन किया है और ब्रिटेन के कारा विशेषज्ञ डॉ. एलन मिशेल की तरफ से लिखित सामग्री सौंपी है, जिसमें ऑर्थर रोड स्थित मुंबई के केंद्रीय कारागार की बैरक संख्या 12 की कुछ तस्वीरों को चुनौती दी गई है। अगर माल्या का ब्रिटेन से प्रत्यर्पण होता है तो माल्या को उसी जेल में रखा जाएगा। बैरिस्टर मार्क समर्स के नेतृत्व वाली सीपीएस टीम ने अतिरिक्त सामग्री को भारतीय अधिकारियों द्वारा प्रदान की गई सूचना की ‘आलोचना का प्रयास’ करार दिया है। माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर मुकदमा पिछले साल चार दिसंबर को लंदन की अदालत में शुरू हुआ था। इसका लक्ष्य माल्या के खिलाफ पहली नजर में धोखाधड़ी का मामला बनाना है।


                                           KarmKasauti

                            Kanpur Uttar Pradesh

          Email: karmkasauti@gmail.com

   Copyright 2018. All Rights Reserved.