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इमरान खान: 'रिवर्स स्विंग' के किंग से सियासत के 'शिकारी' तक का सफर


इस्लामाबाद पश्तूनों के बुर्की कबीले की मां के बेटे इमरान के लिए करियर के तीन रास्ते एक तरह से खून में मिले थे। खेल, एजुकेशन और सेना। रिवर्स स्विंग के जनक माने जाने वाले पाकिस्तानी तेज गेंदबाज सरफराज नवाज का चेला बनकर दुनिया में 'रिवर्स स्विंग किंग' का खिताब हासिल कर और पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को वर्ल्ड चैंपियन बना इमरान ने अपने मातृपक्ष के बुर्की कबीले का नाम और आगे बढ़ाया। पर पिता के पक्ष से देखा जाए तो इमरान में पश्तूनों के 'नियाजी कबीले' का भी खून है। पाकिस्तान में एक नियाजी फेमस हुए लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी या जनरल नियाजी, जिन्हें टाइगर नियाजी के नाम से जाना जाता था। 1971 में भारत के खिलाफ मिली हार में जनरल नियाजी ने सरेंडर किया और उसके बाद उनके नाम से जनरल का सम्मान जाता रहा। जीत की ओर बढ़ रहे इमरान अगर पाकिस्तान के पीएम बने तो यह न केवल नियाजी कबीले के लिए फख्र की बात होगी बल्कि पश्तूनों का कोई पहला लड़का इस पद पर पहुंचेगा।

इमरान की कहानी पूरी फिल्मी है। बड़ा परिवार, स्टारडम, कंट्रोवर्सी और पॉलिटिक्स, इसमें सब शामिल है। फिलहाल पाकिस्तान में वोटों की गिनती चल रही है। इमरान की पार्टी 118 सीटों पर आगे चल रही है। बहुमत का आंकड़ा 137 है। पूरी उम्मीद है कि निर्दलियों का साथ लेकर इमरान पाक के अगले पीएम बन जाएंगे। तो आइए 10 बिंदुओं में जानते हैं रिवर्स स्विंग के किंग से सियासत के शिकारी तक का इमरान का सफर...

पाक में PM की कुर्सी के करीब इमरान

1- इमरान खान नियाजी का जन्म 5 अक्टूबर 1952 को लाहौर में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई लाहौर में हुई लेकिन बाद की पढ़ाई इंग्लैंड में पूरी हुई। 1975 में इमरान ने ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के केबल कॉलेज से दर्शनशास्त्र, राजनीति और इकनॉमिक्स में ग्रैजुएशन किया।

2- इमरान की मां शौकत खानम बुर्की परिवार से आती थीं, जिन्होंने पाकिस्तान को कई मशहूर खिलाड़ी दिए। इनमें जावेद बुकरी और माजिद खान जैसे नाम शामिल थे। इमरान ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। 16 साल की उम्र में उनका प्रफेशनल क्रिकेट करियर शुरू हुआ। 1968 में इमरान ने फर्स्ट क्लास डेब्यू किया। 1971 में इंग्लैंड के खिलाफ इमरान को टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला जबकि 1974 में इसी देश के खिलाफ उन्होंने वनडे डेब्यू किया।

3- 1982 में इमरान खान पाकिस्तान टीम के कप्तान बन गए। इमरान के रिवर्स स्विंग की ख्याति जगप्रसिद्ध हुई तो उनकी पहचान एक ऑलराउंडर के तौर भी हुई। 1987 में उनके नेतृत्व में पाकिस्तान को वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। इमरान ने संन्यास की घोषणा कर दी, लेकिन पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक के आग्रह पर वापस लौटे।

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4- इमरान की वापसी जोरदार रही। बतौर क्रिकेट उनके जीवन का सर्वश्रेष्ठ क्षण 1992 में आया। उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने 1992 में क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीता।

5- 1992 में 25 मार्च को इमरान ने इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी वनडे खेला। यानी इंग्लैंड के खिलाफ शुरू हुई कहानी इंग्लैंड के खिलाफ ही खत्म हुई। 1992 में ही इमरान खान ने क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी।

6- क्रिकेट की दुनिया में स्टारडम हासिल कर चुके इस शख्स ने अब अपने निजी जीवन पर ध्यान देना शुरू किया। क्रिकेट के दौरान इमरान की छवि क्लबों में जाने वाले एक हाइक्लास रोमियो की बन चुकी थी। 1995 में इमरान ने ब्रिटिश जर्नलिस्ट जेमिमा गोल्डस्मिथ के साथ निकाह किया। यह रिश्ता 9 सालों तक चला और 2004 में तलाक हो गया।

7- 2014 में इमरान खान ने दूसरी शादी की। टीवी ऐंकर रेहम खान इमरान की दूसरी बेगम बनीं। फिलहाल रेहम खान काफी चर्चा में हैं। उन्होंने मात्र 10 महीने चल पाई अपनी शादी के दौरान इमरान खान पर यौन शोषण तक के आरोप लगाए हैं। रेहम ने एक किताब लिखी है, जिसमें इमरान को लेकर तमाम खुलासों का दावा किया गया है।

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8- इमरान खान ने फरवरी 2018 में तीसरी शादी की। इस बार उन्होंने बुशरा मानिका से निकाह किया। बुशरा मानिका इमरान की धार्मिक गुरु मानी जाती थीं। बुशरा ने इमरान से शादी से पहले ही कहा था कि उनके प्रधानमंत्री बनने के लिए तीसरी शादी जरूरी है। अब लगता है कि बतौर धार्मिक गुरु बुशरा की भविष्यवाणी इमरान की पत्नी बनने के बाद सही साबित होने जा रही है।

9- इमरान खान का राजनीतिक सफर 1996 में तहरीक-ए-इंसाफ नाम की पार्टी बनाने से शुरू हुआ। 1997 में वह अपना पहला चुनाव हार गए। फिर उन्होंने 2002 का चुनाव लड़ा। उनकी पार्टी की तरफ से बस उन्हें ही जीत मिली। नवंबर 2007 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशरर्फ ने आपातकाल की घोषणा की तो इमरान को भी जेल जाना पड़ा। इमरान खान ने 2008 के चुनावों का बहिष्कार किया।

10- इमरान खान ने 2013 में 'नया पाकिस्तान' का नारा दिया। इमरान ने पाकिस्तान के ताकतवर राजनीतिक परिवारों शरीफ और भुट्टो परिवार के खिलाफ आक्रामक प्रचार किया। पनामा लीक्स में नाम आने पर इमरान के निशाने पर नवाज शरीफ और उनकी पार्टी पीएमएल नवाज रही। अब अगर इमरान पीएम बने तो एक तरह से यह शरीफ और भुट्टो परिवार के बाद अब नियाजी परिवारी की सियासत का दौर होगा।


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