• राजेश तिवारी,मुंबई

महाराष्ट्र में आखिर क्यों सड़कों पर हैं मराठा, इस बार किससे भड़की 'आग'


मुंबई आरक्षण की मांग कर रहे एक प्रदर्शनकारी द्वारा नदी में कूदकर खुदकुशी की घटना के बाद महाराष्ट्र में शांतिपूर्ण चल रहा मराठा आरक्षण आंदोलन उग्र हो चुका है। मंगलवार को कुछ जगहों पर हिंसक प्रदर्शन हुए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 72 हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती में मराठों के लिए 16 प्रतिशत पद आरक्षित रखने का फैसला किया है लेकिन इससे भी आंदोलन की आग शांत नहीं हो रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में साल भर से भी कम वक्त है। इसके अलावा 2019 में ही राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में मराठा आंदोलन फडणवीस सरकार और बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। क्या है मराठा समुदाय की मांग मराठा समुदाय की मुख्य मांग सरकारी नौकरियों और शिक्षा में समुदाय के लिए आरक्षण है। 2014 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार ने मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। इसके लिए पहली बार 'इकनॉमिकली ऐंड बैकवर्ड कम्यूनिटी' की कैटेगिरी बनाई गई, इस तरह सूबे में कुल आरक्षण 51 प्रतिशत कोटा से ज्यादा हो गया था। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मराठा आरक्षण पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि मराठाओं को पिछड़े वर्ग में नहीं गिना जा सकता। अभी भी यह मामला अदालत में लंबित है और मराठा समुदाय चाहता है कि सरकार आरक्षण की ऐसी व्यवस्था करे, जिसे कोर्ट खारिज न कर पाए और तब तक 72 हजार सरकारी नौकरियों की भर्ती पर रोक लगे। बेहद प्रभावशाली है मराठा समुदाय महाराष्ट्र की कुल आबादी में करीब 33 प्रतिशत मराठा हैं। यह समुदाय राजनीतिक तौर पर भी काफी प्रभावशाली और ताकतवर है। 1960 में राज्य के गठन के बाद से महाराष्ट्र में बने 17 मुख्यमंत्रियों में से 10 इसी समुदाय से हैं। इतना ही नहीं, सूबे के गठन के बाद से ही यहां के आधे से अधिक विधायक मराठा समुदाय के ही चुनकर आते हैं। राज्य के करीब 50 प्रतिशत शैक्षिक संस्थाओं पर मराठा नेताओं का नियंत्रण है। महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था में चीनी मिलों का खास रोल है। सूबे के करीब 200 चीनी मिलों में से 168 पर मराठाओं का ही नियंत्रण है। इसी तरह करीब 70 प्रतिशत जिला सहकारी बैंकों पर मराठाओं का नियंत्रण है। पिछली बार कोपर्डी रेप कांड ने डाला था आग में घी, इस बार भी वही हालात मराठा क्रांति मोर्चा, संभाजी ब्रिगेड, मराठा सेवा संघ जैसे संगठन पिछले काफी वक्त से मराठा आरक्षण के लिए अभियान चला रहे हैं। शुरुआत में मराठा आरक्षण आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और शांत था। शहरों में समुदाय के लोग इकट्ठे होते थे और साफ-सफाई करते थे। सरकारी या निजी संपत्ति और परिवहन को नुकसान नहीं पहुंचाते थे। लेकिन 2016 में एक मराठा लड़की के गैंगरेप और मर्डर के बाद यह आंदोलन पूरे राज्य में फैल गया और हिंसक हो गया था। इस बार, आंदोलनकारी की खुदकुशी और मुख्यमंत्री फडणवीस के पंढरपुर में पूजा में हिस्सा न लेने से आंदोलन और भड़क गया है। सोमवार को औरंगाबाद जिले के सिल्लोड तहसील स्थित कायगांव टोक में काका साहेब दत्तात्रय शिंदे नाम के एक 28 साल के आंदोलनकारी ने गोदावरी नदी में छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पंढरपुर में सरकारी पूजा में मुख्यमंत्री के जाने की परंपरा टूटने से भी मराठा समुदाय नाराज है। मराठा नेताओं का आरोप है कि फडणवीस से मराठों को अपमानित करने के लिए ऐसा किया था। क्या है कोपर्डी कांड जुलाई 2016 में अहमदनगर के कोपर्डी में एक नाबालिग की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद मराठा समुदाय में जबरदस्त आक्रोश फैला, जिसके बाद लाखों की तादाद में लोग सड़कों पर उतरे। दरअसल 13-14 जुलाई को अहमदनगर जिले के कोपर्डी गांव में एक मराठा लड़की लापता हो गई थी। बाद में गांव के एक खेत में उसका शव मिला था। गैंगरेप के बाद लड़की को मार डाला गया था। इससे आक्रोशित लाखों मराठा आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी देने और एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून में बदलाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर गए।


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