• अजय नौटियाल, नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐक्टिव हुए केजरीवाल, सबसे पहले IAS अफसरों की पोस्टिंग पर फैसला


नई दिल्ली AAP सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों की जंग पर सुप्रीम फैसला आने के बाद केजरीवाल और उनके सहयोग ऐक्टिव मोड में आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्साहित होकर केजरीवाल ने मंगलवार शाम को कैबिनेट बैठक बुलाई। दिल्ली सीएम ने ट्वीट कर इस बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार के सभी विभागों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हिसाब से काम करने का आदेश दे दिया गया है। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में घर-घर जाकर राशन कार्ड बनवाने और सीसीटीवी लगाने के प्रस्तावों में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया है।

केजरीवाल सरकार ने आरोप लगाया था कि उपराज्यपाल इन जनकल्याण से जुड़े कामों में अडंगा डाल रहे हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर हमला बोला। सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार के सर्विसेज मामलोम का मंत्री होने के नाते मैंने आज यह आदेश दिया है कि अब IAS और DANICS अधिकारियों के तबादले व पोस्टिंग सीएम केजरीवाल की अनुमति से ही होंगे। आपको बता दें कि पिछले दिनों केजरीवाल सरकार और IAS अफसरों के बीच टकराव का मामला भी खुलकर सामने आया था।

'पीएम मोदी ने हमारे पास बस 10 फीसदी राज्य छोड़ा था' सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में मोदी सरकार पर खूब निशाना साधा। सिसोदिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सरकार को अब कोई भी फ़ाइल की मंजूरी के लिए LG के पास भेजने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'शीला दीक्षित की सरकार थी तो आधा-अधूरा ही सही उनके पास एक राज्य था, लेकिन मोदीजी ने हमारे लिए केवल 10 फीसदी राज्य छोड़ा था।'

सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल सरकार की बड़ी जीत

सिसोदिया ने संविधान का हवाल देते हुए कहा कि आर्टिकल 239 एए3 के मुताबिक दिल्ली विधानसभा के पास समवर्ती और राज्य सूची में केवल एंट्री 1, एंट्री 2 और एंट्री 18 को छोड़कर सारे विषयों पर कानून बनाने की शक्ति थी। सिसोदिया ने बताया, 'एंट्री 1 यानी पब्लिक ऑर्डर, एंट्री 2 पुलिस और एंट्री 18 लैंड को छोड़ दिल्ली विधानसभा सारे विषयों पर कानून बना सकती है। लेकिन मोदी सरकार ने एक नया आदेश करके चौथे सब्जेक्ट सर्विसेज को भी रिजर्व कर दिया।'

सिसोदिया ने आरोप लगाया कि संविधान में ऐसी व्यवस्था थी कि किसी फैसले पर मतभेद होने पर एलजी उसे केंद्र सरकार के पास भेजेंगे लेकिन उन्होंने इसकी गलत व्याख्या करते हुए सारे फैसलों में ही अड़ंगा डालना शुरू कर दिया। सिसोदिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उपराज्यपाल स्वतंत्र निर्णय नहीं लेंगे। सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पढ़कर सुनाते हुए कहा कि सर्वोच्च अदालत ने भी माना है कि उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के सामने अड़ंगे के तौर पर काम कर रहे थे। इससे पहले मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने अरविंद केजरीवाल के हाथों में बड़ी जीत दी। शीर्ष अदालत ने व्यवस्था दी है कि उपराज्यपाल अनिल बैजल को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार नहीं है और मंत्री परिषद की सहायता और सलाह पर वह काम करने को बाध्य हैं।

विपक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सराहा उच्चतम न्यायालय के फैसले का विपक्षी दलों ने भी स्वागत किया है। सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि अदालत के इस फैसले से राज्यपाल और उपराज्यपालों की भूमिका और इनके दुरुपयोग का मामला प्रकाश में आ गया है। कांग्रेस ने भी फैसले का स्वागत करते हुये दिल्ली के उपराज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाये हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को 'प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र के लिए जबरदस्त जीत' बताया। उन्होंने कहा कि इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत के लिए केंद्र सरकार में जो भी जिम्मेदार है, उसे जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

चिदंबरम ने अपने एक ट्वीट में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाला व्यक्ति बताते हुए कहा, 'उपराज्यपाल ने अपने राजनीतिक आकाओं द्वारा कानून के संदर्भ में खुद को क्यों गुमराह होने दिया।' आरजेडी के राज्यसभा सदस्य और प्रवक्ता मनोज झा ने इसे दिल्ली की जनता की जीत बताया।


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