• अजय नौटियाल, नई दिल्ली

जानें, क्यों जानलेवा बनते जा रहे हैं वॉट्सऐप फॉरवर्ड


नई दिल्ली वॉट्सऐप से एक मेसेज फॉरवर्ड होता है कि बच्चा चोरों का एक गैंग किसी खास इलाके में पहुंच गया है और उसका असर ऐसा होता है कि भीड़ उसे अंतिम सत्य मानकर किसी भी अनजान निर्दोष को मार डालती है। फेसबुक पर कोई तस्वीर गलत तरीके से फोटोशॉप कर पोस्ट होती है और लोग उसे सच मानकर इलाके को दंगे की आग में झुलसाने के लिए पेट्रोल छिड़क देते हैं। यह हाल है देश और समाज का जो अभी सोशल मीडिया के भयावह और मारक रूप से रूबरू हो रहा है। जिस सोशल मीडिया को समाज में बेहतर संवाद करने और लोगों को जोड़े रखने के लिए बढ़िया माध्यम माना जा रहा था, आज उसके उलट रूप से न सिर्फ समाज में डर-हिंसा-अफवाह-नफरत पैदा की जा रही है बल्कि सरकार भी हैरान-परेशान है कि इसे किस तरह रोका जाए। बच्चा चोर गैंग की अफवाह वॉट्सऐप पर फैलाकर देश में दो महीने के अंदर 29 लोगों की जान भीड़ के हाथों ली जा चुकी है। इसी के बाद सरकारी तंत्र इन अफवाहों को रोकने की कवायद में लगा है। सरकार ने हाल के दिनों में घटी घटनाओं के बाद 23 जुलाई को वॉट्सऐप, फेसबुक सहित सभी सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों को मीटिंग के लिए दिल्ली में बुलाया है ताकि इसके मारक असर पर किस तरह काबू पाया जा सके, इस पर विचार हो।

वॉट्सऐप ही क्यों? हाल के सरकारी आंकड़ों को देखें तो अफवाह फैलाने या गलत जानकारी को वायरल करने में सबसे बड़ी भूमिका वॉट्सऐप की ही रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि इसमें अफवाह किसने शुरू की, उसे पकड़ पाना सबसे कठिन होता है। अगर बच्चा चोर वाली अफवाह की ही बात करें तो इसमें अलग-अलग लगभग एक दर्जन संदेश बनाए गए हैं और सभी के साथ विडियो भी जोड़े गए हैं, जिसमें बच्चा चोरी करते दिखाया जा रहा है। हैरान करने वाली बात है कि सारे विडियो विदेश के हैं और उन्हें एडिट कर तैयार किया गया है।

हालांकि यह किसी इलाके तक कैसे पहुंचता है, उसका पता लगाना मुश्किल होता है। झारखंड में ऐसे ही मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने एनबीटी से बातचीत में कहा कि उन्होंने वॉट्सऐप संदेश के शुरुआती पॉइंट तक पहुंचने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। उन्होंने बताया कि हमने लगभग 1000 फॉरवर्ड तक ट्रैक किया लेकिन कहां से यह चला, इसे साबित नहीं कर पाए। दरअसल, वॉट्सऐप की नीति भी है कि एक बार संदेश कहीं से निकला तो फिर उसके शुरुआती पॉइंट का डेटा कंपनी नहीं रखती। इसी खामी का फायदा अफवाह फैलाने वाले उठाते हैं और यही वजह है कि वॉट्सऐप अफवाह फैलाने का सबसे कारगर मीडियम बन गया है। इसके उलट फेसबुक या दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर सोर्स का पता लगाना अपेक्षाकृत आसान होता है।

सरकार के आंकड़े डराते हैं खुद सरकार के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि पिछले दो साल में वॉट्सऐप अफवाह का प्राइमरी सोर्स बनकर उभरा है। नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि नफरत फैलाकर दंगा भड़काने में सबसे बड़ा फैक्टर स्थानीय स्तर पर अफवाह फैलाना होता है। सोशल मीडिया एक ऐसा प्लैटफॉर्म है, जहां अफवाह तकनीक के माध्यम से रियल टाइम में एकसाथ तमाम जगहों पर पहुंचती है। पिछले दो सालों में इसी कारण ऐसे संवेदनशील मामलों में 23 शहरों में इंटरनेट तक बंद करना पड़ा। गोरक्षा के नाम पर विजिलेंट ग्रुप ने भी इसका खूब इस्तेमाल किया और लोगों को अपने साथ जोड़ा। आधे से अधिक मामले अफवाह के कारण हुए। कई मामलों की जांच में पता लगा कि हिंसा भड़कने से पहले इन ग्रुप्स ने लोगों को वॉट्सऐप की मदद से ही घटनास्थल पर बुलाया था।

किस तरह बनता जा रहा है मौत का फॉरवर्ड संदेश - अभी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अफवाह के सोर्स तक पहुंचना और इन्हें काबू में करना है। वॉट्सऐप ने सरकार की चिंता से सहमति जताते हुए कई कदम उठाने की बात भी कही है। - वॉट्सऐप एक बार निकले संदेश का रिकॉर्ड स्टोर नहीं रखता लेकिन कंपनी ने संकेत दिया है कि वह 30 दिनों तक का डेटा रखने की शुरुआत कर सकती है। समूह में भेजे जाने वाले संदेश और फॉरवर्ड मैसेज को ट्रैक करने की सुविधा देने का रास्ता भी निकाला जा रहा है। - अधिकतर मेसेज वॉट्सऐप ग्रुप से ही निकलते हैं। ऐसे में इसके ऐडमिन को जिम्मेदार बनाने की पहल की गई है। साथ ही ऐडमिन को यह भी अधिकार दिया जा सकता है कि कौन सा मेसेज पोस्ट हो, यह वही तय करे। इससे अफवाह या ऐसे भड़काऊ मेसेज पोस्ट करना आसान नहीं होगा। - हर जिले में तमाम वॉट्सऐप ग्रुप के ऐडमिन का डेटाबेस बनाने की पहल की जा रही है। इससे पुलिस-प्रशासन को इन तक पहुंचने में आसानी रहेगी। - 23 जुलाई को सोशल मीडिया कंपनियों के साथ मीटिंग में आगे का रास्ता तय किया जा सकेगा। दरअसल, ऐसी चिंता सिर्फ भारत की नहीं है। विश्व के दूसरे देशों में भी वॉट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के कुप्रभाव पर चिंता जताई जा रही है। यही कारण है कि कुछ देशों ने तो इसके उपयोग पर टैक्स तक लगाने की पहल कर दी है।

वॉट्सऐप ने सरकार से अपनी चिंता साझा की बुधवार को एक बार फिर वॉट्सऐप ने फर्जी खबरों के प्रसार और इस कारण हो रही हिंसक घटनाओं पर चिंता जताते हुए हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया। आईटी मिनिस्ट्री को दिए गए जवाब में वॉट्सऐप ने कहा कि हाल के दिनों में हुई हिंसा की घटनाएं भयावह हैं। कंपनी ने सरकार से कहा कि ऐप के दुरुपयोग पर रोक लगाने के उपायों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। फर्जी खबरों एवं गलत सूचनाओं की चुनौती से निपटने के लिए सरकार, समाज और आईटी कंपनियों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।


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