• कर्म कसौटी

नज्म - कराहती जिंदगी


हुक्मरानी बाअदब बस हाशिए पे जिन्दगी गम बुलाए तो बुलाए कर ले खुद से खुदखुशी हँस रही चोटें बदन पर नाचती रॉनाइयॉ छोड़ ये शागिर्दगी चल हो मुकम्मल आदमी बर्क यादों के जहन में मुन्तजीर मै कौन हूँ सोचने की जद मे आ तू सच मे शातिर तिश्नगी बेबसी अमले है हाजिर जिस्त ऑखो का कहर सुन सको आवाजे अजी तो सुन लो तोहमत कागजी ---- पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी


0 views

                                           KarmKasauti

                            Kanpur Uttar Pradesh

          Email: karmkasauti@gmail.com

   Copyright 2018. All Rights Reserved.