• संवाददाता

त्रिवेंद्र सिंह रावत से आई थी न्याय मांगने, सीएम ने डांट कर किया सस्पेंड, रो पड़ीं बुजुर्ग शिक्षिका


देहरादून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दरबार में अपने ट्रांसफर की फरियाद लेकर पहुंची उत्तरकाशी की एक स्कूल टीचर उत्तरा पंत बहुगुणा को सीएम से इंसाफ तो मिला नहीं, उल्टे वह सस्पेंड जरूर हो गईं। शिक्षिका और सीएम के बीच की तल्खी का विडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। काफी यूजर्स बुजुर्ग शिक्षिका के प्रति सीएम के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं। उधर, सीएम के व्यवहार से आहत उत्तरा पंत अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और रोते हुए कहा कि मेरे पति नहीं हैं, मेरा भाई नहीं है तो मुझे पूछने वाला कोई नहीं है।

दरअसल इस पूरे मामले की शुरुआत गुरुवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के जनता दरबार से शुरू हुई। शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा सीएम दरबार में ट्रांसफर की मांग लेकर पहुंचीं थीं। शिक्षिका को जब बोलने का मौका मिला तो उन्होंने अपनी मांग रखी। शिक्षिका ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के बीजेपी के नारे को लेकर भी सीएम के सामने तंज कस दिया। यहीं से सीएम रावत भड़क गए। दोनों के बीच तू तू-मैं मैं बढ़ता गया। सीएम ने भी 'इसे तुरंत सस्पेंड करो और बाहर निकालो' का आदेश जारी कर दिया। इसके बाद शिक्षिका चोर-उचक्का कहकर गुस्से में शोर मचाने लगीं। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें जनता दरबार से बाहर कर दिया। सीएम के आदेश के बाद सस्पेंड हुई शिक्षिका से शुक्रवार को न्यूज एजेंसी एएनआई ने जब सवाल पूछा तो वह रो पड़ीं। शिक्षिका ने कहा कि सीएम ने कहा, 'इसे बाहर ले जाओ। इसे क्या होता है। मैं क्या कोई गई-गुजरी हूं? मुझे कोई पूछने वाला नहीं है? शिक्षिका ने रोते हुए कहा कि उनके पति नहीं हैं और भाई नहीं हैं तो उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जब एक सीएम महिला शिक्षिका को ऐसा कह रहे हैं तो शिक्षिका क्यों नहीं जवाब दे सकती। उन्होंने कहा कि मैंने जो कहा, ठीक कहा और भगवान भी रहते तो यही बात कहती।

सीएम के व्यवहार को याद कर रो पड़ीं शिक्षिका। जनता दरबार में शिकायत लेकर पहुंची शिक्षिका, CM ने खोया आपा सोशल मीडिया पर भी डाली है कहानी उत्तरा पंत बहुगुणा ने अपनी पूरी समस्या पिछले दिनों फेसबुक पोस्टों और उनमें लिखी कविताओं के जरिये व्यक्त की है। पिछले 2 सालों से उत्तरा पंत बहुगुणा अपनी पहली तैनाती वाले विद्यालय की ही जांच की मांग कर रही हैं। 25 सालों से वह अपने गृह जनपद के बाहर नौकरी कर रही हैं। 53 साल की उत्तरा पंत बहुगुणा की पति की मौत हो चुकी है। उन्होंने सीएम के सामने इसी का हवाला देते हुए कहा था कि बच्चों की देखभाल के लिए उनका ट्रांसफर देहरादून किया जाए। पर राहत की बजाय उन्हें सस्पेंशन झेलनी पड़ी है।

सोशल मीडिया पर शेयर किया दर्द।

उत्तरा पंत बहुगुणा कहती हैं, 'मुझे घर से मीलों दूर रहकर नौकरी करते हुए चौबीस साल हो गए। पति की मौत के बाद घर की परिस्थितियां विपरीत होती चली गईं। शिक्षा विभाग द्वारा मेरा मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक हानि भी की जाती रही।' शिक्षा विभाग के अधिकारियों से हताश होकर वह अंतिम फरियाद लेकर सीएम दरबार पहुंचीं थीं।

शिक्षिका ने कहा कि वह पिछले 25 साल से दुर्गम क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहीं है और अब पति की मृत्यु के बाद अपने बच्चों के साथ रहना चाहती हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार माध्यमिक शिक्षा सचिव भूपेंद्र कौर औलख ने शिक्षिका को मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबित कर दिया है। सीएम के आदेश के बाद उन्हें कुछ देर के लिए हिरासत में भी रखा गया। उत्तरा पंत ने शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर पीएम मोदी तक को लिख रखा है।


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