• लेखक पंकज कुमार मिश्र

अफवाहों पर ध्यान दें


भारत एक समावेशी देश कहा जाता है ,क्योकि यहॉ की प्रतिभा विलक्षण होने के साथ साथ दकियानुसी अफवाहों की गुलाम भी मानी जाती है ।हमारे देश मे अफवाहों का आना जाना लगातार बना रहता है , अफवाहों का बाजार गर्म हो जाता है और लोगो के बीज आग की लपटों की तरह यह विकृति बड़ी जनसंख्या को अपनी चपेट में ले लेती है ।इन अफवाहों को फैलने मे बहुत बड़ी भूमिका सोसल साईट्स भी अदा करते है । कुछ वर्षों से ,सोशल मीडिया पर अफवाह को वायरल करके और जनमानस में फैलाकर विकृत मानसिकता के लोग सामाजिक सौहाद्र और शांति में खलल डालते रहे है । पिछले वर्ष पश्चिमी उ० प्र० , झारखंड और बिहार में बच्चा चोरी की ऐसी ही अफवाहें वायरल हुई कि कई निर्दोष लोगों की जान पर बन आई थी । पिछले वर्ष ही चोटीकटवॉ कि अफवाहों ने सारे देश मे खलबली सी मचा दी । गॉव के गॉव लोगो ने पुजा पाठ दवॉये झाड़ फूँक रतजगे और ना जाने क्या क्या पापड़ बेले ,लोग चुड़ैल,भूत-प्रेतया अपराधी तत्वों की साजिश मानकर,भ्रमित थे , तो कई लोगो का यहा तक मानना था कि यह पड़ोसी राज्य चीन का साइबर वार है जो रोबोटिक कीड़े द्वारा चोटी कटवा रहा । हद है भला चीन को चोटी काट कर रोटी कैसे मिलेगी ! अफवाहों का कोई ओर छोर नही होता । यह जनभ्रम देश मे पसरते ही जा रहा था और ऐसे में जब कहीं से भी इसका तथ्यपूर्ण कारण नहीं मालुम हो रहा था, ऐसे में फेसबुक और अन्य सोसल मिडीया ने इसका विषाणु खोज डाला ,तथ्य रखे गये कि एक किड़ा है जो चोटीकटवॉ है बॉल खाता है ।उसे ही आखिर 2-3 माह बाद सर्व स्वीकार्यता मिली । हम वैज्ञानिकवादिता का दावा करते है ,ताकि दुनिया मे यह संदेश जाए कि हम रूढ़ियों से सचमुच बाहर निकल चुके है और विज्ञान और तकनिकी पर गहन आस्था रखते है पर,आधुनिकता की ओर निकलते निकलते हम अफवाहों की कैद में आ गये । हमारे देश मे कोई अफवाहें उठी है और मिनटो में वायरल होकर पलक झपकते सारे देश मे फैल जाती है।हम सांस्कृतिक रूप से बेहद भावुक है, अक्सर जन -प्रवादों को सच मान ,बिना मष्तिष्क पर जोर डाले, कही सुनी बातो को सच मान भ्रान्तियॉ फैलाने लगते है , और फिर यह वायरल भ्रम सारे देश मे एक बड़ा सैलाब बनकर उफान लाता है ।किसी विदेशी दार्शनिक ने कहॉ था कि भारत में लोगो की तरकीब उनके अफवाहों के समय मापी जा सकती है । जगभर में हमारे विश्वगुरु होने पर,जग हँसाई होती है क्योकि, इनमें कई धार्मिक अंधविश्वास भी शामिल है जैसे पत्थरो का तेल और दुध पीना , कब्र से चादर और दरगाहो से जिन्न का गायब होना ,चर्चो से पवित्र जल मिलना फलॉ फलॉ । यह सब हमारी मानसीक और व्यक्तिगत कमजोरीयॉ है जिसका दोष हम ऐसे अफवाहों को देकर खुद की उत्तरदायीता खत्म कर लेते है । 21 सितम्बर 1995 ,गुरुवार को किसी ने दिल्ली के एक मंदिर में गणेश जी की संगमरमरी मूर्ति को दूध पीते देखा और फिर सारे देश में मूर्तियां दूध पीने लगी ।विज्ञान की माने तो सामान्य घटना है क्योकि वस्तुओं मे अणुओं के कैपिलरी चेनल्स में द्रव को अवशोषित करने की क्षमता होती है । ७ मई 2001 को मजलिसे पीर की दरगाहों से चादर गायब होने की खबरें वायरल हुई ,अब शरारती तत्वो या जरूरतमंदो ने रातो रात ऐसे कारनामे किये तो भी चमत्कार । २००१ में ही दिल्ली की यमुना पार बस्ती में छत पर कूदकर लोगों को घायल करने वाले काले बंदर का खूब आतंक मचा था और 13 मई को नोएडा के सेक्टर 17 में एक मजदूर की मौत के बाद सारी दिल्ली काले बंदर की दहशत में रतजगा करने को विवश हो गई थी ।फरवरी 2002 में वाराणसी से शुरू हुआ मुँह नोंचवा का आतंक सारे पूर्वी उत्तरप्रदेश में फैल गया था ।भयभीतलोग कहते थे लाईट सा टिमटिमाता कोई जानवर उड़ता हुआ आता है और चेहरे पर झपट्टा मारकर घायल कर देता है ।मई 2015 में हरियाणा में यह अफवाह जोरों पर थी कि रातमें कोई बुढ़िया आकर चुपचाप सिलबट्टे को खूरँच कर चली जाती है ।ऐसी ही अफवाह मप्र ग्वालियर और सिवनी क्षेत्र में भी फैली हुई थी ।बाद में जागरण झांसी के डकोर के एक संवाददाता ने एक कीड़े की तस्वीर कैमरे मेंकैद की जो पत्थर पर निशान छोड़ता था । 17 जुलाई 2017 को दैनिक भास्कर ने राजमाता सिंधिया कृषि विवि के प्रो आर वी एस भदौरिया की रिपोर्ट छापी थी जिसमें उन्होंने इसे स्टोन बीटल की करतूत बताई ।चींटी की तरह के स्टोन बीटल कॉलेओप्टेरा आर्डर के अन्तर्गत आते है तथा अक्सर नम स्थानों पर चींटियों द्वारा बनाये गे पत्तियों के घोसलों(लीफ लिटर्स) में रहते है ।इसी प्रजाति का कोई कीट चकिया को कुरेदकर उसके नीचे छिपे सूक्ष्म जीवों का भक्षण करता था ।20 अगस्त 2016 को माहिम के समुद्र तट पर मकदूम अली माहिम की दरगाह के समीप किसी अकीदतमंद को समुद्र का पानी मीठा लगा और फिर मुरीदों की तो भीड़ ही लग गई ।कोई यह नहीं समझा कि बरसात के कारण नदियों द्वारा भारी मात्रा में समुद्र में जल लाने से समुद्री पानी की लवणता कम हो गई है ।11 नवम्बर 2016 को देश मे एकाएक नमक की किल्लत की अफवाह फैली और नमक के दाम 20 गुना तक बढ़ गए ।बदायूँ के कुंवरगांव कड़बे में नमक 300 रु किलो तक बिक गया,मुरादाबाद जैसे शहर में 200 रु किलो तक इसे बेचा गया और 12 नवम्बर को अनियंत्रित भीड़ ने जबलपुर की गुरंदी में नमक के लिए दुकानों को लूटा ।जून 2017 में इलाहाबाद के बीबीपुर(फूलपुर)से उठी सुई भोंकवा की अफवाह ने खजूरी,रामपुर के साथ कई गांव के लोगों को 2 माह तक दहशत में डालकर रखा ।ऐसी ही सबसे बड़ी अफवाह की शुरुआत जून 2017 में राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा तहसील से शुरू हुई जहां 6 जून को मैनसर के राजूराम नायक की पत्नि की चोटी काटने की घटना सामने आई ।12 जून को हिंयादेसर (नोखा) के पप्पूराम जाट की पत्नि , के साथ तथा उनावड़ा(बेदुखेड़ा) में मैनादेवी रामूराम जाट , के साथ भी ऐसा ही हुआ ।17 जून को बीकानेर के चिमाना(चाखू) में बच्चू पुत्री लक्ष्मणराम जाट तथा आऊ के श्यामलालजाट की बहन के बाल कटने की घटना हुई । चिमाना,चाखू,रियाँ,नोखा,राइसर,नापासर,बीठनोक,हियादेसर,बेन्दूखेड़ा(उनावाड़ा)फलौदी आदि में यह अफवाह तेजी से फैली और फिर राजस्थान के शेष जिलों में भी यह आग की तरह पसर गई ।लोगों में यह भ्रम फैला कि यह किसी चुड़ैल की हरकत है ।ओझाओं ने पैसे ऐंठने ऐसी अफवाहों को खूब बढ़ावा दिया ।इसके बाद 23 जून 2017 को बीकानेर के पीपाड़ कस्बे के समीप रियां गांव में सुरमा पुत्री मालाराम चौकीदार की चोटी कटने की खबर भास्कर में"रात में बाल कटने की खबर अफवाह या सच्चाई" नाम से प्रकाशित हुई और जुलाई के अंतिम सप्ताह में तो सारे देश में चोटीकटवॉ की खबरों की बाढ़ सी आ गई ।लोग रतजगा करने लगे,टोने-टोटकों ,नीम की टहनियॉ टॉगना इत्यतादि करने लगे,कई जगह बेकसूर लोगों के साथ बुरी तरह मारपीट भी की गई । फरवरी 2018 में गया के गुरारू प्रखंड के डीहा गांव में झुनी पुत्री मनोज कुमार की चोटी कटने की घटना के साथ ऐसी अफवाहें देश के विभिन्न भागों में सुनाई पड़ी । दोस्तों सच्चाई की तह तक गये बगैर हम पढ़े लिखे लोग ऐसे खबरो को आखिर वायरल कैसे होने देते है ? सोच का विषय है कि विकासशील बन रहे भारत के नागरिक तेजी से अफवाहों की चपेट में कैद होते जा रहे । -- पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी ।


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